अभी अंतरराष्‍ट्रीय उड़ानों के लिए करना होगा इंतजार, अब इस तारीख तक रहेंगी सस्‍पेंड

यात्री उड़ान सेवा 25 मार्च को निलंबित कर दी गई थी, जब कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लगा दिया गया था.

अभी अंतरराष्‍ट्रीय उड़ानों के लिए करना होगा इंतजार, अब इस तारीख तक रहेंगी सस्‍पेंड

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने शेड्यूल्ड अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक उड़ानों के संचालन पर निलंबन शुक्रवार को 31 जुलाई तक बढ़ा दिया. 

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, "सरकार ने भारत से या भारत के लिए शेड्यूल्ड अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक यात्री सेवा पर निलंबन 31 अगस्त तक के लिए बढ़ा दिया है."

बयान में कहा गया है, "एयरमेन (एनओटीएएम) को इस बारे में खास सूचना जारी कर दी गई है."

हालांकि यह प्रतिबंध सभी कार्गो उड़ानों और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय द्वारा विशेष रूप से स्वीकृत अन्य उड़ानों पर लागू नहीं होगा.

बता दें कि यात्री उड़ान सेवा 25 मार्च को निलंबित कर दी गई थी, जब कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लगा दिया गया था. घरेलू उड़ान सेवा हालांकि 25 मई से बहाल हो गई है.

विमानन क्षेत्र के नियामक डीजीसीए ने शुक्रवार को कहा कि देश में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की आवाजाही पर रोक 31 अगस्त तक बढ़ा दी गयी है.

इससे पहले अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक सेवाएं 31 जुलाई तक रोक दी गयी थी. कोविड-19 महामारी के चलते मार्च के अंत में ये सेवाएं स्थगित कर दी गयी. हालांकि, मालवाहक उड़ानों और डीजीसीए द्वारा मंजूर उड़ानों को परिचालन की अनुमति दी गयी थी.

नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने एक बयान में कहा कि सरकार ने भारत से आने-जाने वाली अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक यात्री सेवाओं पर लगी रोक को 31 अगस्त तक विस्तारित करने का फैसला किया है.

अंतरराष्ट्रीय मालवाहक उड़ानों और डीजीसीए द्वारा मंजूर उड़ानों के परिचालन पर यह पाबंदी लागू नहीं होगी.

बयान के मुताबिक, सेवा स्थगित रहने के दौरान फंसे हुए लोगों को लाने-ले जाने के लिए भारत से अंतरराष्ट्रीय परिचालन के लिए 2500 से ज्यादा उड़ानों को मंजूरी दी गयी.

‘वंदे भारत मिशन’ के तहत छह मई से 30 जुलाई तक एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने फंसे हुए 2,67,436 लोगों को पहुंचाया तथा अन्य निजी उड़ानों ने फंसे हुए 4,86,811 लोगों को पहुंचाया.

बयान में कहा गया कि महामारी के बीच क्रमिक तरीके से यात्री विमानों को अनुमति देने की कवायद के तहत अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी से ‘ट्रांसपोर्ट बबल’ समझौते भी किए गए.

बयान के मुताबिक, ‘हाल में कुवैत के साथ भी ‘ट्रांसपोर्ट बबल’ समझौता किया गया. आगे इसी तरह के समझौते अन्य देशों के साथ भी किए जाने की संभावना है.

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