Advertisement
trendingNow13080999

बंगाल में चुनाव से पहले खलबली, ममता के गढ़ में बीजेपी ने भेजे बाहरी नेता; क्या है मोदी-शाह का प्लान?

West Bengal Elections 2026: पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाले चुनाव को लेकर भाजपा पार्टी को मजबूत करने में जुटी है. इसके लिए कई बड़े नेताओं को बंगाल का दौरा करने भेजा गया है. 

बंगाल में चुनाव से पहले खलबली, ममता के गढ़ में बीजेपी ने भेजे बाहरी नेता; क्या है मोदी-शाह का प्लान?

West Bengal Elections: पश्चिम बंगाल में चुनाव को लेकर भाजपा पूरी तैयारी में जुटी है. इसको लेकर पार्टी ने राज्य में अपने वरिष्ठ नेताओं या प्रवासी सदस्यों को बुलाया है, जिसमें उत्तर प्रदेश के मंत्री जेपीएम राठौड़, उत्तराखंड के मंत्री धन सिंह रावत, राजस्थान बीजेपी किसान मोर्चा के अध्यक्ष कैलाश चौधरी, यूपी के पूर्व मंत्री सुरेश राणा, हरियाणा बीजेपी के महासचिव संजय भाटिया और कर्नाटक के पूर्व मंत्री सीटी रवि शामिल हैं. इन सभी सीनियर लीडर्स से बंगाल यूनिट में सभी लेवल पर आंतरिक मतभेदों को सुलझाने की उम्मीद जताई जा रही है. इनमें से अधिकतर नेता हिंदी बोलते हैं ऐसे में उनके साथ स्थानीय नेता भी होंगे, जो जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं और लोगों के साथ बातचीत के दौरान ट्रांसलेशन में सहयोग करेंगे. 

किन शहरों की मिली जिम्मेदारी? 

साल 2017 और 2022 में यूपी विधानसभा चुनावों के साथ-साथ साल 2019 के लोकसभा चुनावों को मैनेज करने वाले राठौर को पश्चिम बंगाल के 35 विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसमें पूर्वी मेदिनीपुर जिले के कोंटाई और तामलुक समेत पश्चिम मेदिनीपुर जिले के घाटाल और मेदिनीपुर शहर शामिल हैं. वहीं सुरेश राणा को उत्तर 24 परगना जिले के बैरकपुर, बारासात और बोंगांव की देखरेख करेंग. इससे पहले वह हरियाणा, दिल्ली, त्रिपुरा और मध्य प्रदेश में भी भाजपा के चुनावी प्रयासों का नेतृत्व कर चुके हैं. उन्हें 28 विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई है. हाल ही में उन्होंने संदेशखाली का दौरा भी किया था,  जहां साल 2024 में TMC नेताओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद एक बड़ा राजनीतिक विवाद हुआ था. 

ये भी पढ़ें- पंजाब में अब गैंगस्टरों की खैर नहीं, पकड़ने के लिए पुलिस ने चलाया ऑपरेशन; अबतक 1300 पकड़े   

Add Zee News as a Preferred Source

 

क्या है मकसद? 

'इंडियन एक्सप्रेस' के साथ बातचीत के दौरान एक प्रवासी नेता ने कहा,' अपने-अपने राज्यों के अनुभव के आधार पर हम राजनीतिक और संगठनात्मक प्रबंधन पर ध्यान दे रहे हैं. हम संगठनात्मक अभियानों और कार्यक्रमों की भी देखरेख कर रहे हैं और उन मतदान केंद्रों में अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, जहां हम कमजोर हैं, हालांकि हमारा मुख्य ध्यान स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच मतभेदों को सुलझाने पर है.' 

ये भी पढ़ें- 50 मैगी, 20 किलो चावल, सिलेंडर...घाटी में कई महीनों का खाना लेकर बंकर में छिपे थे जैश आतंकी, सेना ने किया भंडाफोड़ 

 

मतभेदों को दूर करेगी पार्टी? 

एक प्रवासी नेता ने 'IE' को बताया कि वे स्थानीय नेता नहीं हैं और राज्य के किसी भी पार्टी नेता के प्रति पक्षपातपूर्ण नहीं हैं. उन्होंने कहा,' वे हमसे खुलकर बात कर सकते हैं और अपनी समस्याओं और मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं. हमारे अनुभव के अनुसार हम बैठकों में मुद्दों को सुलझाते हैं और जटिल मुद्दों को सीनियर्स के साथ चर्चा के लिए नोट कर लेते हैं. हम उन नेताओं को एक साथ ला रहे हैं, जिनके बीच मतभेद हैं और उन्हें पार्टी के हित में अपने विवाद समाप्त करने के लिए मना रहे हैं क्योंकि पार्टी को सत्ता में लाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है.' 

Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Zee News Hindi पर. Hindi News और India News in Hindi के लिए जुड़े रहें हमारे साथ.

About the Author
author img
Shruti Kaul

ज़ी न्यूज में सब एडिटर. वनस्थली विद्यापीठ यूनिवर्सिटी राजस्थान से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन. ये राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मुद्दो से जुड़े विषयों पर लिखती हैं. लिखने के अलावा श्रुति ...और पढ़ें

TAGS

Trending news