कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद आतंकियों की भर्ती में भारी कमी, जानें क्या कहते हैं आंकड़े

5 अगस्त के बाद से अब तक केवल 14 युवाओं के आतंकवादी गिरोहों में शामिल होने की खबर है. 

कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद आतंकियों की भर्ती में भारी कमी, जानें क्या कहते हैं आंकड़े
फाइल फोटो

नई दिल्ली: कश्मीर (kashmir) घाटी में धारा 370 खत्म होने और केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद आतंकवादियों (Terrorists) के गिरोह में भर्ती होने वाले युवाओं की तादाद में बहुत कमी आई है. आम तौर पर हर महीने औसतन 8 स्थानीय युवा आतंकी गिरोहों में शामिल होते थे. लेकिन 5 अगस्त के बाद से अब तक केवल 14 युवाओं के आतंकवादी गिरोहों में शामिल होने की खबर है. यानि हर महीने लगभग 3 युवाओं ने आंतकवादी बनना मंज़ूर किया है.

खुफ़िया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 2016 में बुरहान वानी के मारे जाने के बाद पाकिस्तान के पाले हुए आतंकवादियों के प्रचार के शिकार होने वाले युवाओं की तादाद में भारी इजाफा हुआ था. 

क्या कहते हैं आंकड़े
2015 में जहां पूरे साल में 83 कश्मीरी युवा आतंकवादी बने थे वहीं 2016 में केवल आखिरी 6 महीने में ही 84 स्थानीय युवाओं ने आतंक का रास्ता पकड़ा था. 2017 में ये तादाद 128 हो गई और 2018 में 209 युवाओं की बड़ी तादाद पाकिस्तानी दुष्प्रचार का शिकार होकर आतंकवादियों के साथी बने. अगस्त तक 96 स्थानीय युवाओं के अलग-अलग आतंकवादी गिरोहों में शामिल होने की खबर की खुफिया एजेंसियों ने पुष्टि की थी. 

लेकिन इस तादाद में अगस्त के बाद बहुत तेजी से गिरावट आई. सेना के बड़े अधिकारी ने बताया कि कश्मीरी युवाओं का आतंकवाद से मोहभंग हो रहा है. 'स्थानीय युवाओं से बनी हिज़बुल मुजाहिदीन आतंकवादी संगठन के सभी बड़े कमांडर मारे गए और घाटी में मुख्यरूप से पाकिस्तानी आतंकवादी सक्रिय हैं. इन आतंकवादियों ने कश्मीरी लोगों की हत्याओं का सिलसिला शुरू किया जिससे लोगों को इनका असली चेहरा नज़र आने लगा है.

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अधिकारी ने कहा कि इस साल 27 नवंबर तक पाकिस्तान ने 2835 बार युद्धविराम का उल्लंघन किया है. इसमें केवल नवंबर में ही 268 बार सीमा पार से गोलाबारी की गई है. पूरे साल में 158 आतंकवादियों को सुरक्षा बलों ने मारा है जबकि इसी दौरान 172 आतंकवादी वारदातें हुईं. सीमापार से गोलाबारी और कश्मीर में आतंकवाद विरोधी कार्रवाइयों में सेना के भी 38 जवान और अधिकारी अब तक वीरगति पा चुके हैं.

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