DNA ANALYSIS: राम जन्मभूमि में मिलीं खंडित मूर्तियों का 'अखंड विश्लेषण'

कोरोना वायरस के दौर में लॉकडाउन के दौरान आपने भी रामायण सीरियल देखा होगा, इस सीरियल की लोकप्रियता देखकर पता चलता है कि भगवान राम में हमारे देश के लोगों की कितनी आस्था है.

DNA ANALYSIS: राम जन्मभूमि में मिलीं खंडित मूर्तियों का 'अखंड विश्लेषण'

नई दिल्ली: कोरोना वायरस के दौर में लॉकडाउन के दौरान आपने भी रामायण सीरियल देखा होगा, इस सीरियल की लोकप्रियता देखकर पता चलता है कि भगवान राम में हमारे देश के लोगों की कितनी आस्था है. इसलिए आज हम भगवान राम से जुड़ी बड़ी खबर का विश्लेषण करेंगे. 

हमारे देश का आदर्श वाक्य है- सत्यमेव जयते यानी जीत हमेशा सच की ही होती है. आज भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या से भी वो सच निकला है, जिस सच को छुपाने में बड़े बड़े इतिहासकारों, बुद्धिजीवियों और नेताओं ने पूरा जोर लगा दिया था. ये वो लोग हैं, जो भगवान राम के अस्तित्व को ही नकारते रहे हैं और ये कहते रहे हैं कि अयोध्या में मंदिर होने की बातें मनगढंत हैं. 

ऐसी सोच वाले लोगों ने ही राम जन्मभूमि का मामला वर्षों तक अदालतों में फंसाए रखा और आखिर तक ये लोग यही कहते रहे कि अयोध्या में तो कोई मंदिर ही नहीं था. इन लोगों को अयोध्या पर पिछले वर्ष आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी पसंद नहीं आया था. लेकिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में मंदिर होने की बात मानी थी और पूरी जमीन पर रामलला विराजमान को मालिकाना हक दिया था, अब राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए जो काम चल रहा है, उसमें भी पुराना मंदिर होने के नए सबूत मिले हैं. 

मंदिर निर्माण के लिए बने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का दावा है कि जन्मभूमि पर हो रही खुदाई में बड़ी संख्या में ऐसे पुरातत्विक अवशेष मिले हैं, जो किसी प्राचीन मंदिर के होने के प्रमाण दे रहे हैं. इनमें देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां शामिल हैं, और पुष्प, कलश और दूसरे प्रतीकों जैसी कई प्राचीन कलाकृतियां भी शामिल हैं. इस तरह की कलाकृतियां अक्सर भारत के प्राचीन मंदिरों में देखी जाती हैं. इसके अलावा मंदिर के शीर्ष भाग में लगने वाला आमलक का हिस्सा भी मिला है. यहां से करीब पांच फीट आकार का एक शिवलिंग भी मिला है. 

इसके अलावा जन्मभूमि पर गर्भगृह के पास खुदाई में एक कुआं भी मिला है. 15 की संख्या के करीब विशेष पत्थरों के दो तरह के खंभे मिले हैं. इन खंभों में देवी देवताओं की मूर्तियां बनी हुई हैं. कई लोगों के मुताबिक ये खंभे उसी मंदिर का हिस्सा हो सकते हैं, जिस मंदिर का निर्माण इसी जगह पर करीब 2 हजार वर्ष पहले सम्राट विक्रमादित्य ने करवाया था. ऐसी मान्यता है कि प्राचीन काल में अयोध्या का जीर्णोद्धार सम्राट विक्रमादित्य ने करवाया था.

ये भी कहा जाता रहा है कि जिस मंदिर को तोड़कर वर्ष 1528 में मुगल बादशाह बाबर के सैन्य कमांडर मीरबाकी ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद बनवाई थी, वो मंदिर सम्राट विक्रमादित्य के समय में ही बनवाया गया था. हालांकि अब जन्मभूमि से मंदिर के जो नए अवशेष मिले हैं, उनके बारे में पूरे निरीक्षण के बाद एक्सपर्ट्स ही पुख्ता तौर पर बता सकते हैं. लेकिन एक बात तो ये दिख रही है कि राम जन्मभूमि परिसर में अयोध्या के पुराने इतिहास की बहुत कहानियां दबी हैं, जो अब धीरे धीरे सामने आ रही हैं. 

हालांकि इन नए सबूतों की पुष्टि फिलहाल भारतीय पुरातत्व विभाग यानी ASI ने नहीं की है. लेकिन पिछले वर्ष राम मंदिर पर आए एतिहासिक फैसले में ASI की रिपोर्ट्स को आधार बनाया गया था.  सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ये कहा था कि अयोध्या में मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनाई गई थी. इसका मतलब ये था कि वहां पर पहले से कोई ढांचा मौजूद था. सुप्रीम कोर्ट ने इस बात के लिए Archaeological Survey of India यानी ASI की रिपोर्ट्स को आधार बनाया था. 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा था कि वर्ष 1862 से 1865 के दौरान ASI के डायरेक्टर Alexander Cunningham(एलेक्जेंडर कनिंघम) ने 4 रिपोर्ट्स तैयार की थी, जिसके मुताबिक राम जन्मस्थान मंदिर अयोध्या शहर के बीच में मौजूद था, और मुस्लिम हमलावरों ने वहां के कई प्राचीन मंदिरों को नष्ट कर दिया था. 

वर्ष 1889 में ASI की रिपोर्ट के मुताबिक राम जन्मभूमि पर भगवान रामचंद्र का पुराना मंदिर बहुत भव्य तरीके से बनाया गया था, क्योंकि मंदिर के कई स्तंभों का इस्तेमाल बाबरी मस्जिद के निर्माण में भी किया था. यानी ASI ने साफ कहा था कि बाबरी मस्जिद अयोध्या में उसी जगह पर बनाई गई थी, जहां पर राम जन्मभूमि का पुराना मंदिर स्थापित था. 

वर्ष 1891 में ASI की एक और रिपोर्ट में ये भी लिखा गया है कि जन्मस्थान पर मौजूद मंदिर की जगह पर वर्ष 1524 में मस्जिद का निर्माण किया गया था. ASI की एक और रिपोर्ट वर्ष 2003 में आई थी, जिसे इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने रखा गया था. उस रिपोर्ट के मुताबिक विवादित स्थल नीचे करीब 50 स्तंभों के आधार पर बनाया गया. 10वीं शताब्दी का एक मंदिर जैसा ढांचा मिला था. 

ASI ने ये भी बताया था कि विवादित स्थल पर तीन अलग-अलग समय के मंदिरों के अवशेष मिले थे. ASI ने इन्हें अलग अलग नाम दिए. Temple-1 , Temple-2 और Temple-3. बताया गया था कि Temple-1 के अवशेष 8वीं शताब्दी के हैं यानी करीब 1200 वर्ष पहले के हैं. Temple-2 के अवशेष 9वीं शताब्दी के हैं यानी करीब 1100 वर्ष पहले के हैं और Temple-3 के अवशेष 12वीं शताब्दी के हैं यानी करीब 800 वर्ष पहले के हैं. 

देखें DNA- 

वर्ष 1976 में राम जन्मभूमि की खुदाई करने वाली ASI टीम में केके मोहम्मद भी शामिल थे, जो ASI के पूर्व निदेशक भी रह चुके हैं. केके मोहम्मद हमेशा ये दावा करते थे कि अयोध्या की जमीन पर खुदाई में ऐसे सबूत मिले थे, जो इस्लाम से जुड़ी किसी इमारत का हिस्सा नहीं हो सकते थे. लेकिन हमारे यहां धर्मनिरपेक्षता के ठेकेदारों और दरबारी इतिहासकारों ने उनकी बातों को कभी महत्व नहीं दिया. उन्हें लगातार परेशान किया था. लेकिन आज उन्हीं की बातें सच साबित हो रही हैं.  

आपने आज-कल में सोशल मीडिया पर अयोध्या को ट्रेंड होते हुए देखा होगा. लोगों के अंदर उन लोगों के प्रति गुस्सा है, जिन्होंने अयोध्या में मंदिर होने की बात कभी नहीं मानी और इस मामले को वर्षों तक अपने वैचारिक एजेंडे और राजनीति की वजह से लटकाए रखा. जबकि सच ये था कि ये करोड़ों लोगों के लिए सिर्फ आस्था की ही बात नहीं थी है बल्कि मंदिर होने के प्रमाण हमेशा से ही रहे हैं. वैसे तो सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद पिछले वर्ष ही ये मामला हमेशा के लिए खत्म हो गया था. लेकिन अब मंदिर भी बन रहा है और उन लोगों का झूठ भी सामने आ रहा है, जिन लोगों ने अयोध्या पर अपने फायदे के लिए जानबूझ तक विवाद बनाए रखा और सच को छुपाते रहे.