DNA ANALYSIS: क्या आप चीन में बने सामान के बहिष्कार के लिए तैयार हैं?

क्या आप सिर्फ अपने-अपने घरों में अपने परिवार के साथ चाय की चुस्कियां लेते हुए इस खून खराबे का लाइव टेलिकास्ट देखना चाहते हैं, इस पर सिर्फ चर्चा करना चाहते हैं? या फिर आप भी इस युद्घ में एक सशक्त भूमिका निभाना चाहते हैं?

DNA ANALYSIS: क्या आप चीन में बने सामान के बहिष्कार के लिए तैयार हैं?

नई दिल्ली: सोमवार को भारत सरकार ने चीन के खिलाफ एक ऐतिहासिक कदम उठाया और चीन में बने मोबाइल ऐप्स को बैन कर दिया. चीन को ये बात बहुत चुभी है. क्योंकि ये चीन का वो अंतरराष्ट्रीय अपमान है, जिसकी उम्मीद चीन ने कभी नहीं की थी. भारत के इस कदम ने चीन के खिलाफ एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के दरवाजे खोल दिए हैं. इसलिए आज हम आपको बताएंगे कि भारत के नेतृत्व में कैसे पूरी दुनिया चीन को चारों तरफ से घेर सकती है और उसे घुटने टेकने पर मजबूर कर सकती है.

लेकिन इससे पहले हम एक बड़ा सवाल आपके लिए लेकर आए हैं. हमारा सवाल ये है कि चीन के खिलाफ सेना और सरकार तो अपना अपना काम कर रही हैं. लेकिन आप चीन को जवाब देने के लिए क्या कर सकते हैं? क्या आप सिर्फ अपने-अपने घरों में अपने परिवार के साथ चाय की चुस्कियां लेते हुए इस खून खराबे का लाइव टेलिकास्ट देखना चाहते हैं, इस पर सिर्फ चर्चा करना चाहते हैं? या फिर आप भी इस युद्घ में एक सशक्त भूमिका निभाना चाहते हैं?

जब कोई देश युद्ध लड़ता है तो दुश्मन को जवाब देना सिर्फ सैनिकों का काम नहीं होता बल्कि उस देश के लोगों को भी पूरी शिद्दत के साथ उस युद्ध में हिस्सा लेना होता है. जब से सीमा पर सैनिकों ने चीन को उसी की भाषा में जवाब दिया है और जब से सरकार ने चीन के बहिष्कार की शुरुआत की है, तब से देश के लोगों की भावनाएं पूरे उबाल पर रही हैं. चीन के खिलाफ लोगों का जोश सबसे ऊंचे स्तर पर है. लेकिन लोगों के मन में ये सवाल भी है कि वो इसमें क्या भूमिका निभा सकते हैं. 

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इसलिए Zee News आपको एक ऐसा मंच दे रहा है जिसके जरिए आप चीन के खिलाफ बिना बंदूक उठाए एक सैनिक की भूमिका निभा सकते हैं. और यकीन मानिए अगर इस मंच पर भारत के 137 करोड़ लोगों ने एक साथ आकर अपनी आवाज उठा दी तो इसकी गूंज ना सिर्फ पूरी दुनिया को सुनाई देगी बल्कि चीन युद्ध लड़ने से पहले ही घुटने टेक देगा.

इसके लिए हमने Made In India मुहिम की शुरुआत की है और आप इस मुहिम का हिस्सा बनकर पूरी दुनिया तक अपनी आवाज पहुंचा सकते हैं. आपकी आवाज को मंच देने के लिए हम एक नंबर जारी कर रहे हैं. ये नंबर है 7 8 3 4 9 9 8 9 9 8. अगर आप चीन में बने सामान का बहिष्कार करना चाहते हैं और Made In India को बढ़ावा देना चाहते हैं तो आप इस नंबर पर मिस्ड कॉल दे सकते हैं. अगर भारत को आत्मनिर्भर बनना है तो मेड इन चाइना को हराना होगा और अगर मेड इन चाइना को हराना है तो Made In India को मजबूत करना होगा. इसके अलावा आप #MadeInIndia पर ट्वीट करके भी अपनी बात हम तक पहुंचा सकते हैं. और याद रखिए आपको Made India पर सिर्फ ट्वीट ही नहीं करना बल्कि इसपर गर्व भी करना है.

भारत की जनसंख्या इस समय 137 करोड़ है. और अगर भारत के 137 करोड़ लोग एक साथ चीन के खिलाफ आवाज उठाएंगे तो इसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई देगी. पूरी दुनिया को ये सुनाई देगा कि भारत के 137 करोड़ लोग चीन के बारे में क्या सोचते हैं. भारत की संख्या में ही भारत की असली शक्ति छिपी है. और चीन जैसे विशाल देश को हम संख्या के दम पर ही हरा सकते हैं.

हम आपसे बंदूक उठाने के लिए नहीं कह रहे बल्कि सिर्फ मोबाइल फोन उठाकर मिस्ड कॉल देने के लिए कह रहे हैं. ये चीन के खिलाफ दुनिया का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म है जिसके जरिए आप घर बैठे-बैठे चीन को जवाब दे सकते हैं. हो सकता है कि जब आपमें से कुछ लोग इस नंबर पर मिस्ड कॉल दें तो आपको घंटी की आवाज ना आए. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आपकी कॉल दर्ज नहीं हुई है.

जैसे ही आप इस नंबर पर मिस्ड कॉल देंगे वैसे ही आपके मोबाइल फोन पर Zee News की तरफ से एक SMS आएगा जो इस बात का प्रमाण है कि आपकी राय दर्ज हो गई है. इस SMS में दिए गए लिंक पर क्लिक करके आप एक सर्वे में हिस्सा ले सकते हैं. आप चीन को कैसे जवाब दे सकते हैं इसके लिए हमने एक प्रश्नावली तैयार की है. लिंक पर क्लिक करते ही ये प्रश्नावली आपके सामने होगी और आप इसकी मदद से अपनी बात हम तक पहुंचा सकते हैं. ये चीन के खिलाफ सबसे बड़ा सर्वे होगा और आपको इसका हिस्सा जरूर बनना चाहिए. इस सर्वे के लिए हम चैट बोट की मदद लेंगे. ये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक पर आधारित सर्वे है. यहां चैट का मतलब है बातचीत और बोट का मतलब है रोबोट यानी एक ऐसा रोबोट जो आपसे बातचीत कर सकता है. इसलिए आप भी इस चैट बोट की मदद से अपनी राय दर्ज करा सकते हैं.

भारत के खिलाफ चीन इस समय एक ऐसा युद्ध लड़ रहा है जिसे देश के लोगों के बिना नहीं लड़ा जा सकता. इसलिए ये आपको तय करना है कि ये जिम्मेदारी आप सिर्फ सेना और सरकार के कंधों पर डालना चाहते हैं या खुद भी इसमें एक मजबूत भूमिका निभाना चाहते हैं.

भारत में एक वर्ग ऐसा भी है जो चीन के इस बहिष्कार का मजाक उड़ा रहा है, हो सकता है कि ये वर्ग हमारी इस मुहिम का भी मजाक बनाने लगे. लेकिन आपको याद रखना होगा कि ये वही वर्ग है जिसने सेना और सरकार से सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगे थे. बालाकोट एयरस्ट्राइक में मारे गए आतंकवादियों की संख्या पूछी थी, लेकिन जब ये लोग चीन के खिलाफ आवाज उठाने वालों की संख्या देखेंगे तो इन्हें अपने आप जवाब मिल जाएगा. 

सीमा पर चीन से टकराव के बीच भारत ने जब से चीन के ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया, तब से कुछ लोग इस फैसले का मजाक उड़ा रहे हैं. ये लोग कह रहे हैं कि टिकटॉक जैसे चाइनीज ऐप्स पर बैन लगाने से क्या होगा? इससे चीन पर कोई असर नहीं पड़ेगा. लेकिन ऐसे लोगों को चीन की प्रतिक्रिया जरूर जाननी चाहिए, जिससे इन लोगों को अंदाजा होगा कि जिसे ये मामूली कदम बता रहे हैं, उस मामूली कदम से ही चीन कितना परेशान हो गया है.

पहले चीन के विदेश मंत्रालय ने भारत के इस कदम पर चिंता जताई, फिर भारत के चीन के दूतावास ने बयान जारी किया और इन दोनों के बयानों का अर्थ यही निकलता है कि भारत का कदम भले ही सांकेतिक हो, लेकिन इससे चीन को बड़ा संदेश मिल गया है. और ये बड़ा संदेश यही है कि सीमा पर तनाव के बीच चीन के साथ भारत के पहले जैसे संबंध नहीं रह सकते. यानी ऐसा नहीं हो सकता कि बॉर्डर पर सैनिक डटे रहें और हम व्यापार करते रहें. 

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चाइनीज ऐप्स पर प्रतिबंध लगाए जाने के फैसले पर चीन की पहली प्रतिक्रिया आई, और चीन के विदेश मंत्रालय ने ये कहा कि वो भारत के इस कदम से बहुत चिंतित है. इसके बाद चीन नसीहत देने पर उतर आया, वो अंतरराष्ट्रीय कानूनों की बता करने लगा और भारत को जिम्मेदारियां समझाने लगा. 

चीन के दूतावास ने भारत के कदम को पक्षपातपूर्ण बताया और ये कहा कि चीन ऐसे कदम का विरोध करता है. चीन ने कहा है कि जिन ऐप्स पर बैन लगाया गया, उन ऐप्स के भारत में बड़ी संख्या में यूजर्स हैं. ये ऐप्स भारतीय कानून का पूरा पालन करते रहे हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा के जिस आधार पर भारत ने इन ऐप्स को बैन किया है, वो आधार अपने आप में संदिग्ध हैं. ये विश्व व्यापार संगठन WTO के नियमों का भी उल्लंघन है. चीन ने कहा है कि भारत को भेदभाव पूर्ण रवैया बंद करना चाहिए, सभी निवेशकों के साथ बराबरी से पेश आना चाहिए और द्विपक्षीय संबंधों के हितों को ध्यान में रखकर फैसले करने चाहिए.

चीन अब ये कह रहा है कि वो अपनी कंपनियों से हमेशा अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने के लिए कहता है और विदेश में व्यापार करने के लिए वहां के कानूनों का पालन करने पर जोर देता है. इसी में चीन ने ये बात जोड़ी कि भारत सरकार की जिम्मेदारी है कि चीन सहित अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के कानूनी हितों की अनदेखी ना होने दे. भारत में चीन के दूतावास ने तो इससे एक कदम आगे बढ़कर बात की है.

जो चीन खुद अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन नहीं करता, जिस चीन ने खुद अपने यहां राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर ट्विटर, फेसबुक और यूट्यूब पर प्रतिबंध लगा रखे हैं, वो चीन अब भारत को उपदेश दे रहा है, क्योंकि उसे भारत का ये कदम बहुत चुभ रहा है. अगर चीन को ये बात परेशान कर रही है, तो इसका मतलब यही है कि भारत ने अपना तीर सही निशाने पर लगाया है.

भारत के एक छोटे कदम से ही चीन को दुनिया भर के नियम कानून याद आने लगे, वो पारदर्शिता की बात करने लगा. अभी तो भारत ने सिर्फ कुछ चाइनीज ऐप्स ही बैन किए हैं, अगर इसके बाद कोई और बड़ा कदम उठा लिया, तो अब आप सोचिए कि इस पर चीन में कैसी खलबली मच जाएगी? ग्लोबल टाइम्स जैसे चीन के सरकारी मीडिया में अब ये बात हो रही है कि चीन के उन निवेशकों के लिए भारत में बड़ा खतरा हो गया, जिन निवेशकों को भारत बहुत पसंद है.

ग्लोबल टाइम्स में इस बात का जिक्र किया गया कि पिछले तीन वर्षों में चीन के निवेशकों ने भारत में करीब 75 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया है. लेकिन कट्टर राष्ट्रवाद की वजह से भारत, चीन के निवेशकों का भरोसा तोड़ने में जुटा है और ऐसा करके भारत, निवेश की पसंदीदा जगह की छवि भी कमजोर कर रहा है.

यानी चीन को अब अपने पैसे की चिंता हो रही है. लेकिन चीन की चिंता करने वाले लोग तो भारत में भी हैं. चाइनीज ऐप्स पर प्रतिबंध के बाद भारत में एक खास सोच वाले लोग, या तो इस फैसले का मजाक उड़ा रहे हैं या फिर इस तरह की बातें कर रहे हैं, जिसमें चीन के लिए फिक्र ज्यादा और भारत के लिए फिक्र कम दिखती है.

जैसे सोशल मीडिया पर कुछ लोग ये कह रहे हैं कि टिकटॉक ने कोरोना वायरस से लड़ाई में पीएम केयर्स फंड में 30 करोड़ रुपये का दान दिया है, अब जब टिकटॉक पर प्रतिबंध लग गया है तो क्या इस पैसे को वापस लौटाया जाएगा. इसी तरह से कुछ लोग ये कह रहे हैं कि अगर सुरक्षा कारणों से चाइनीज ऐप्स को बैन किया गया है तो ऐसे भारतीय ऐप्स पर भी प्रतिबंध लगाया जाएं.

कई लोग टिकटॉक के लिए ये कहकर आंसू बहा रहे हैं, इससे भारत के युवा बेरोजगार हो जाएंगे, ये इस तरह की बातें हैं कि जैसे भारत की अर्थव्यवस्था ही इन चाइनीज ऐप्स से चल रही थी. इसी तरह से कई लोग, टिकटॉक स्टार्स की बात कर रहे हैं और ये कह रहे हैं कि छोटे-छोटे शहरों के लोगों से टिकटॉक को छीन लिया गया. ये उसी तरह की बात है, जैसे टिकटॉक जैसे ऐप्स के बिना कोई जी नहीं सकता या फिर इसका कोई विकल्प ही नहीं है.

इसी बीच टिकटॉक ने भी अपने बयान में कहा है कि वो सरकार की चिंताओं पर, सरकार के सामने अपना पक्ष रखने को तैयार है. डेटा प्राइवेसी और सिक्योरिटी पर टिकटॉक भारत के कानूनों का पालन करता रहा है और वो यूजर्स की कोई भी जानकारी, चीन ही क्या, किसी भी सरकार को नहीं देता है. ना ही भविष्य में ऐसा करेगा.