DNA ANALYSIS:श्रीलंका-फिलीपींस में बिना मास्क निकलने पर गिरफ्तारी, भारत में सख्ती क्यों नहीं?

विदेशों में बिना मास्क (Mask) घर से बाहर निकलने पर लोगों की गिरफ्तारी तक हो रही हैं. वहीं भारत में लोग अब भी मास्क को लेकर लापरवाही करते दिखते हैं.

DNA ANALYSIS:श्रीलंका-फिलीपींस में बिना मास्क निकलने पर गिरफ्तारी, भारत में सख्ती क्यों नहीं?

नई दिल्ली: श्रीलंका में इन दिनों पुलिस Special Quarantine Operation चला रही है. इसके तहत जो व्यक्ति घर से बाहर बिना मास्क के निकलता है, उसे पुलिस उठा कर ले जाती है और उसे Quarantine Centre में सजा के तौर पर रहना पड़ता है. यानी आप कह सकते हैं कि मास्क नहीं लगाने पर लोगों को 14 दिन की जेल में रहना पड़ता है और ये जेल है Quarantine Centre.

श्रीलंका की तरह फिलीपींस में भी सख्ती

श्रीलंका (Sri Lanka) में ये सख्ती तब है, जब वहां कोरोना (Coronavirus) संक्रमण का ज़्यादा असर नहीं है. श्रीलंका की तरह Philippines के राष्ट्रपति ने भी पुलिस को ये आदेश दिया है कि ऐसे लोगों को सीधे गिरफ़्तार कर लें, जो मास्क सही से नहीं लगा रहे हैं. सोचिए इन देशों में संक्रमण काफी सीमित रूप में फैला हुआ है, फिर भी इतनी सख़्ती है. जबकि भारत में औसतन हर दिन चार लाख मामले दर्ज हो रहे हैं, इसके बावजूद लोग लापरवाह बने हुए हैं.

इसे आप हैदराबाद के उदाहरण से भी समझ सकते हैं. हैदराबाद में चार मीनार के पास एक मस्जिद में सामूहिक नमाज़ हुई. इनमें कई लोग बिना मास्क के दिखे और कई लोगों के चेहरों पर मास्क तो था लेकिन नाक से नीचे. सोशल डिस्टेंसिंग की बात को तो आप छोड़ ही दीजिए.

उत्तर प्रदेश में भी ऐसी ही तस्वीरें दिखाई दीं. वहां पर लोग पंचायत चुनाव में अपने उम्मीदवार की जीत का जश्न मनाते नज़र आए. इन लोगों ने भी नियमों का कोई पालन नहीं किया.

भारत में दिख रहा है उलट नजारा

महाराष्ट्र के अहमदनगर का हाल भी कुछ ऐसा ही था. अहमदनगर में शुक्रवार को जब पुलिस ने लॉकडाउन का उल्लंघन करने पर टोका तो भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया. इसके बाद पुलिसवालों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया.

सोचिए एक तरफ़ श्री लंका है, जहां मास्क नहीं लगाने पर पुलिस लोगों को उठा कर Quarantine Centre ले जा रही है. दूसरी तरफ़ हमारे देश के लोग हैं, जो पहले लॉकडाउन तोड़ते हैं और जब पुलिस के द्वारा उन्हें रोका जाता है तो वो पुलिस पर हमला करते हैं.

इसलिए आज हमारा सवाल यही है कि क्या श्रीलंका और Philippines जैसी सख़्ती भारत में नहीं होनी चाहिए?

जापान का स्पेशल चियरलीडर्स ग्रुप

अब आपको जापान की स्पेशल Cheerleaders के बारे में बताते हैं. इनकी उम्र 60 से 90 साल के बीच है. एक महिला तो इसमें 89 साल की है. 

जो लोग 90 साल जी लेते हैं वो मान कर चलते हैं कि उन्होंने काफी जिंदगी जी ली है और अब वो कुछ नया नहीं कर सकते हैं. ऐसे लोगों को इन महिलाओं से कुछ सीखना चाहिए. ये ग्रुप जापान (Japan) में काफी लोकप्रिय हो रहा है और उन्हें स्कूलों और दूसरे Events में Perform करने के लिए बुलाया जाता है.

दादियों के इस ग्रुप का नाम है POM POM. इस ग्रुप में 17 सदस्य हैं, जिनकी उम्र 60 साल से ज़्यादा है. इसकी फाउंडर 89 साल की एक महिला है. उकी कहानी भी उतनी ही रोचक है, जितना रोचक इनका ये ग्रुप है. 

बूढ़ों का देश बना जापान

जापान को बूढ़ों का देश कहते हैं. दुनिया में सबसे ज़्यादा बुजुर्ग लोग यहीं रहते हैं. जापान की आबादी करीब 12 करोड़ 63 लाख हैं, जिसमें 30% लोग यानी 3 करोड़ 80 लाख लोग 65 साल से ज्यादा उम्र के हैं.

जापान (Japan) में 65 प्लस उम्र के लोगों की संख्या पिछले दशकों में काफी बढ़ी है. 1980 से 2010 के बीच कुल आबादी के हिसाब से बुजुर्ग महिलाओं की संख्या 11.2% से बढ़ कर गई 20.3% हो गई, जबकि इसी बीच बुजुर्ग पुरूषों की संख्या 4.3% से बढ़ कर 11.1% हो गई.

लोगों में बढ़ी अकेलेपन की समस्या

उम्र बढ़ने के साथ ही यहां पर अकेलापन भी एक समस्या बनता जा रहा है, जिसकी वजह से जापान सरकार ने पिछले महीने Loneliness ministry यानी अकेलापन का मंत्रालय शुरू किया . ये मंत्रालय अकेले रहने वाले लोगों को सामूहिक गतिविधियों से जोड़ता है, जिससे लोग अकेलापन महसूस ना करें और आत्महत्याओं पर भी अंकुश लगाया जा सके. दरअसल जापान में अकेलेपन के कारण आत्महत्या के केस में वृद्धि हो रही है.

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पिछले साल जापान (Japan) में 21,081 लोगों ने आत्महत्या की. यह संख्या इसलिए ज़्यादा है, क्योंकि जापान एक बहुत छोटा देश है और यहां के लोग आर्थिक रूप से परेशान नहीं हैं, बल्कि वो बच्चों के चले जाने और अकेलेपन से दुखी रहते हैं.

अकेलापन बांट रही हैं चियरलीडर्स

इसलिए, इन बुजुर्ग cheerleaders की इस पहल की जापान (Japan) में काफी सराहना हो रही है. जापान की दादियों की ये कहानी हमें प्रेरणा देती है कि अगर हम कुछ नया करने की ठान लें तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती है.

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