ZEE जानकारी: भोपाल गैस कांड के पीड़ितों को अबतक नहीं मिला न्याय

आज से ठीक 35 वर्ष पहले 2 और 3 दिसंबर 1984 की रात को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में, 3 हजार 7 सौ से ज्यादा लोग एक जहरीली गैस का शिकार हो गए थे.

ZEE जानकारी: भोपाल गैस कांड के पीड़ितों को अबतक नहीं मिला न्याय

हमारे इस विश्लेषण का आधार भोपाल गैस कांड है. आज से ठीक 35 वर्ष पहले 2 और 3 दिसंबर 1984 की रात को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में, 3 हजार 7 सौ से ज्यादा लोग एक जहरीली गैस का शिकार हो गए थे. ये गैस भोपाल के Union Carbide के प्लांट से निकली थी. और हजारों लोगों की मौत का जिम्मेदार Warren Anderson, हमारे देश के ही कुछ लोगों की मदद से भागने में कामयाब हो गया था. उस वक्त Warren Anderson... Union Carbide का चेयरमैन और CEO था. जो जीवन भर भारतीय कानून से बचता रहा, दो वर्ष पहले उसकी मौत भी हो गई. लेकिन भोपाल गैस कांड के पीड़ितों को अबतक न्याय नहीं मिला है. वो हर वर्ष न्याय की मांग करते हैं लेकिन हमारे सिस्टम ने इसे भी सिर्फ एक वार्षिक घटना बना दिया है.

मध्य प्रदेश सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक भोपाल गैस कांड में 3 हजार 787 लोग मारे गए थे. हालांकि गैर सरकारी आंकड़े के मुताबिक भोपाल गैस कांड में 15 से 20 हज़ार लोगों की मौत हुई थी.

उस वक्त भोपाल की कुल आबादी साढ़े 8 लाख थी. और वर्ष 2006 में मध्य प्रदेश सरकार के हलफनामे के मुताबिक करीब 5 लाख 20 हजार लोग ज़हरीली गैस से सीधे तौर पर प्रभावित हुए थे.

और इसकी वजह से एक लाख से ज़्यादा लोग बेघर, बीमार और विकलांग हो गए. लेकिन सबसे बड़े औद्योगिक आतंकवाद के जिम्मेदार Warren Anderson को बचाने के लिए हमारे देश का पूरा सिस्टम लगा रहा. ये शायद हमारे देश की एकमात्र ऐसी घटना थी जिसमें भारत के नेताओं ने लचर कानून का फायदा उठाकरभारतीयों के हत्यारे को देश की सीमाओं से बाहर जाने दिया.

Warren Anderson, भोपाल गैस कांड के चार दिन बाद भोपाल पहुंचा था. तब उसे गिरफ्तार भी कर लिया गया था. लेकिन सिर्फ़ 25 हज़ार रुपये में Anderson को ज़मानत मिल गई थी. उसे Union Carbide के भोपाल गेस्ट हाउस में नज़रबंद करके रखा गया था. फिर रातों-रात एक सरकारी विमान में उसे भोपाल से दिल्ली लाया गया. इसके बाद वो दिल्ली में अमेरिकी राजदूत के घर पर पहुंचा.और बाद में वहां से एक प्राइवेट एयरलाइंस से पहले मुंबई और फिर अमेरिका चला गया. मध्य प्रदेश के पूर्व एविएशन डायरेक्टर आरएस सोढ़ी ने इसे लेकर बयान दिया था कि उनके पास एक फोन आया था, जिसमें भोपाल से दिल्ली के लिए एक सरकारी विमान तैयार रखने के लिए कहा गया था. इसी विमान में बैठकर Warren Anderson दिल्ली भाग गया था. तब एंडरसन को विमान में चढ़ाने के लिए भोपाल के एसपी और डीएम तक आए थे. Anderson एक नीली Ambassador कार में एयरपोर्ट पहुंचा था और उस कार पर लाल बत्ती लगी हुई थी. इस वक्त आप वर्ष 1984 की वही तस्वीरें देख रहे हैं. उस समय मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे अर्जुन सिंह और प्रधानमंत्री थे राजीव गांधी. अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के दस्तावेज़ों के मुताबिक Anderson की रिहाई का आदेश तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने दिया था. हालांकि अर्जुन सिंह ने अपनी किताब में लिखा कि राज्य सरकार को दिल्ली से गृह मंत्रालय के सचिव का फोन आया था. और उस वक्त पीवी नरसिम्हा राव देश के गृह मंत्री थे.

दुख की बात ये है कि हमारे देश के सिस्टम ने देश से भाग जाने में उसकी मदद की. और हज़ारों लोगों का कातिल देश के भ्रष्ट नेताओं और अफसरों की मदद से भारत से भाग गया. वर्ष 2014 में Anderson दुनिया से भी चला गया. लेकिन हम उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाए. आज यूनियन कार्बाइड का वीरान कारखाना औद्योगिक आतंकवाद का सबसे बड़ा सबूत बनकरभोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों का मज़ाक उड़ा रहा है. हो सकता है भोपाल से हमारे कुछ दर्शक भी इस हादसे के पीड़ित हों. और ये खबर उनके दर्द को और बढ़ा दे. लेकिन हम चाहते हैं कि भोपाल की पीड़ा को आज देश के 135 करोड़ लोग महसूस करें.

भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ित आज भी न्याय और पर्याप्त मुआवज़ा नहीं मिलने की शिकायत कर रहे हैं. 26 वर्ष बाद जब इसके 7 गुनहगारों के खिलाफ फैसला आया. तो उन्हें सिर्फ़ 2 साल की सज़ा हुई थी. और सबसे दुख की बात ये रही कि इस औद्योगिक आतंकवाद के मुख्य गुनहगार Warren Anderson को हम कभी सज़ा ही नहीं दे पाए.

भोपाल गैस Tragedy के पीड़ितों की याद में आज के दिन देश में National Pollution Control Day मनाया जाता है. ताकि लोगों को बढ़ते वायु प्रदूषण से सावधान किया जा सके. वायु प्रदूषण की जांच करनेवाली अंतरराष्ट्रीय संस्था Air Visual की वर्ष 2018 की रिपोर्ट में. दुनिया के 20 सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में 15 भारत के हैं. देश के ज्यादातर शहरों की हवा सांस लेने लायक नहीं है. जिसमें राजधानी दिल्ली भी शामिल है. वर्ष 1984 में भोपाल में जहरीली गैस ने एक रात में ही लोगों की जान ले ली थी. लेकिन आज ऐसी हवा में सांस लेकर लोग हर दिन किस्तों में अपनी जान दे रहे हैं.