ZEE जानकारी: देश में बलात्कार पर रोष प्रकट करना एक फैशन बन गया है

तब दिल्ली की निर्भया थी और अब हैदराबाद की दिशा है. लेकिन पिछले 7 वर्षों में आखिर क्या बदला. ये समझने के लिए आपको हैदराबाद से आई एक तस्वीर देखनी चाहिए.

ZEE जानकारी: देश में बलात्कार पर रोष प्रकट करना एक फैशन बन गया है

हैदराबाद में एक महिला डॉक्टर के साथ हुई रेप और हत्या की वारदात को लेकर पूरा देश गुस्से में है. देश के लोगों ने ऐसा ही गुस्सा आज से 7 साल पहले भी दिखाया था. तब दिल्ली की निर्भया थी और अब हैदराबाद की दिशा है. लेकिन पिछले 7 वर्षों में आखिर क्या बदला..ये समझने के लिए आपको हैदराबाद से आई एक तस्वीर देखनी चाहिए.

ये तस्वीर उस वक्त की है जब हैदराबाद पुलिस रेप के आरोपियों को जेल ले जा रही थी. इन आरोपियों को एक बस में बिठाकर कड़ी सुरक्षा के बीच जेल ले जाया जा रहा था. जिस बस में ये आरोपी बैठ थे. उसके आगे पीछे पुलिस की कुल 7 गाड़ियों का काफिला चल रहा था. पुलिस के बहुत सारे जवान सड़क पर भीड़ को भी काबू करने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन आरोपियों के लिए की गई सुरक्षा व्यवस्था देखकर ऐसे लग रहा था जैसे बस में रेप और हत्या के आरोपी नहीं..बल्कि कुछ VIP जा रहे हैं.

आरोपियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोग और उनकी सुरक्षा में जुटी पुलिस. अगर समाज में होने वाले अपराधों को लेकर पहले से इतने जागरूक और सजग होते..तो शायद इस महिला डॉक्टर की जान बचाई जा सकती थी.

हमारे देश में किसी महिला के साथ बलात्कार हो जाने के बाद..रोष प्रकट करना और शोक सभाएं करना एक फैशन बन गया है. लेकिन असल समस्या हमारे देश के सिस्टम में है और आज हम इसी समस्या को समझने की कोशिश कर रहे हैं.

किसी के साथ दुष्कर्म करना और उसकी जान ले लेना भी एक तरह का आतंकवाद है. इसलिए आज आपको एक आतंकवाद की परिभाषा भी समझनी चाहिए. आतंकवाद शब्द की उत्पत्ति आतंक शब्द से हुई है. आतंक ऐसे कार्य को कहते हैं जिसका इस्तेमाल आतंक फैलाने के लिए किया जाता है और इसे अंजाम देने वाले को आतंकवादी कहते हैं. हैदराबाद के मुख्य आरोपी को आप क्या कहेंगे..क्या वो एक प्रकार का आतंकवादी नहीं है?

और इस आतंकवाद के लिए जिम्मेदार कौन है ? हमारा समाज, हमारा सिस्टम, हमारी सरकारें या फिर.. हम सब ? आज हम ये सवाल इसलिए पूछ रहे हैं क्योंकि अगर हमारा समाज, सिस्टम और हमारी सरकारें जागरुक होती तो इस गैंग रेप और हत्या के मुख्य आरोपी मोहम्मद आरिफ को वारदात से पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया होता . इतना ही नहीं वारदात में इस्तेमाल होने वाला ट्रक भी पुलिस जब्त कर चुकी होती और वो महिला आज जिंदा होती .

हम आपको ये सब इसलिए बता रहे हैं क्योंकि वारदात का आरोपी.. मोहम्मद आरिफ पिछले 2 वर्षों से अपने ट्रक को बिना ड्राइविंग लाइसेंस के चला रहा था. इतना ही नहीं वारदात से कुछ घंटे पहले ही इस ट्रक को Regional Transport Office यानी RTO, vigilance और प्रवर्तन विभाग की संयुक्त टीम ने रोका भी था. तब भी जांच में सामने आया था कि मोहम्मद आरिफ बिना लाइसेंस के Over Loaded ट्रक चला रहा था. जांच टीम द्वारा पकड़े जाने पर मोहम्मद ने चालाकी से ट्रक का Spark Plug निकाल दिया, इसलिए जब अधिकारी जांच कर रहे थे तो ट्रक स्टार्ट नहीं हुआ. जल्दी बाज़ी में जांच करने वाली टीम आगे बढ़ गई और मोहम्मद आरिफ ट्रक लेकर फरार हो गया.

यानी अगर Transport Office, ट्रैफिक पुलिस, और प्रवर्तन विभाग ने पिछले दो वर्षों में अपना काम ईमानदारी से किया होता तो गैंग रेप और हत्या का मुख्य आरोपी ट्रक चला ही नहीं पाता. वो अक्सर Over Loaded ट्रक चलाया करता था और गैर कानूनी मुनाफे के पैसे से ट्रक में बैठकर ही शराब पीता था. वारदात से कुछ घंटे पहले भी उसने ऐसा ही किया था.

यानी एक ड्राइवर एक खतरनाक आतंकवादी में बदल चुका था. जो कभी भी किसी की हत्या या रेप करने का इरादा रखता था. लेकिन हमारा सिस्टम. रिश्वत के लालच में उसे देखकर..अपनी आंखें बद करता रहा और जेबें गरम करता रहा. इसका नतीजा ये हुआ कि एक अपराधी ने अपने वाहन को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया वो उसमें बैठकर दोस्तों के साथ शराब पीता था, महिलाओं को किडनैप करने की और उनके साथ बलात्कार करने की साजिश रचता था. लेकिन कोई उसे रोकने वाला नहीं था.

हैदराबाद ही नहीं आज देश के शहरों में काले शीशे वाली गाड़ियां और शराबी ड्राइवर कहीं से भी गुज़र सकते हैं. और जब इस सिस्टम पर सवाल उठाए जाते हैं तो चालान से जुड़े आंकड़े दे दिए जाते हैं. लेकिन हमारे देश में अपराधियों को पकड़ने का कोई Full Proof सिस्टम है ही नहीं.

7 साल पहले जिस बस में निर्भया के साथ सामुहिक दुष्कर्म हुआ था. उस बस का भी 8 बार चालान हो चुका था और उसे 6 बार जब्त भी किया गया था. लेकिन हर बार बस का मालिक जुर्माना भरकर. बस को फिर सड़क पर उतार लाता था. ये सिलसिला ऐसे ही चलता रहा. बार बार नियमों का उल्लंघन करने वाले बस ड्राइवर और Cleaner पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और आखिरकार दिल्ली की एक लड़की को इसी बस में बलात्कार का शिकार होकर अपनी जान गंवानी पड़ी.

हैदराबाद गैंग रेप का मुख्य आरोपी ही नहीं बल्कि हमारे देश की सड़कों पर ऐसे हज़ारों आतंकवादी गाड़ियां चला रहे हैं जिन्हें पाकिस्तान का नहीं बल्कि सिस्टम का समर्थन मिला हुआ है. ये लोग पाकिस्तान प्रायोजित नहीं है बल्कि इन्हें हमारा वो सिस्टम प्रोत्साहित करता है जिसकी ईंमानदारी 100, 200 या 500 रुपये में बिक जाती है.

National Crime records Bureau के मुताबिक, वर्ष 2017 में 48 हज़ार 503 सड़क दुर्घटनाएं उन वाहन चालकों द्वारा अंजाम दी गई थी..जिनके पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था. इन सड़क दुर्घटनाओं में सैंकड़ों लोगों की जान भी चली गई थी. यानी मारे गए लोग सिर्फ नियमों का उल्लंघन करने वाले ड्राइवरों के शिकार नहीं हुए बल्कि ये लोग एक प्रकार के आतंकवाद का शिकार हुए थे..जिसे हमारे सिस्टम का पूरा पूरा समर्थन हासिल था. और इनमें से बहुत सारे लोग सड़कों पर वापस भी आ गए होंगे.

आज गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने भी हैदराबाद की घटना को लेकर पुलिस पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार की ज़रूरत है.