DNA ANALYSIS: हाया सोफिया की 'सेलिब्रिटी बिल्ली'

धर्म और राजनीति‍ में प्रतीकों का बहुत महत्व होता है. शब्दों की तुलना में प्रतीक ज्यादा असर करते हैं. और टर्की में भी ठीक ऐसा ही हो रहा है. पहले चर्च और फिर 86 वर्षों तक म्यूजियम रहने के बाद मस्जिद में बदल दी गई, टर्की की मशहूर हाया सोफिया (Hagia Sophia) में वर्ष 1934 के बाद, आज पहली बार जुमे की नमाज पढ़ी गई.

DNA ANALYSIS: हाया सोफिया की 'सेलिब्रिटी बिल्ली'

नई दिल्ली: धर्म और राजनीति‍ में प्रतीकों का बहुत महत्व होता है. शब्दों की तुलना में प्रतीक ज्यादा असर करते हैं. और टर्की में भी ठीक ऐसा ही हो रहा है. पहले चर्च और फिर 86 वर्षों तक म्यूजियम रहने के बाद मस्जिद में बदल दी गई, टर्की की मशहूर हाया सोफिया (Hagia Sophia) में वर्ष 1934 के बाद, आज पहली बार जुमे की नमाज पढ़ी गई. इस म्यूजियम को मस्जिद में बदलने का आदेश टर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप आर्दोआन ने इसी वर्ष 10 जुलाई को दिया था. जिस पर बाद में टर्की की सुप्रीम कोर्ट ने भी मुहर लगाई थी. आज खुद टर्की के राष्ट्रपति, हाया सोफिया में नमाज पढ़ने पहुंचे थे. इस दौरान करीब एक हजार लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए नमाज पढ़ी.

धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक 
इस्तांबुल में स्थित करीब पंद्रह सौ वर्ष पुरानी हाया सोफिया मस्जिद को छठी शताब्दी में एक चर्च के तौर पर बनाया गया था. हालांकि चौदहवीं शताब्दी में जब यूरोप में ओट्टोमन साम्राज्य आया तो इसे मस्जिद में बदल दिया गया. ओट्टोमन साम्राज्य के अंत के बाद वर्ष 1934 में आधुनिक टर्की के संस्थापक मुस्तफा कमाल अता तुर्क ने इसे एक म्यूजियम बना दिया और हाया सोफिया टर्की की धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक बन गई.

हाया सोफिया, टर्की में इस्लाम और ईसाइयों की सामूहिक आस्था का प्रतीक रही है. हाया सोफिया म्यूजियम, सभी पंथों के अनुयायियों के लिए सांस्कृतिक और सामाजिक आस्था का केंद्र था. जिसमें कोई भी प्रवेश कर सकता था. लेकिन अब 86 वर्षों बाद एक बार फिर से हाया सोफिया को मस्जिद में बदल दिया गया है. और इमारत के एक बड़े हिस्से को सिर्फ मुस्लिम समुदाय के लिए रिजर्व कर दिया गया है. इमारत में ईसाई धर्म से संबंध रखने वाली कई कलाकृतियों और प्रतीक चिन्हों को या हटा दिया गया है या फिर उन्हें ढंक दिया गया है. उदाहरण के लिए आज हुई नमाज से पहले हया सोफिया में मौजूद वर्जिन मैरी और बेबी जीसस के चित्रों पर पर्दा डाल दिया गया क्योंकि ये मक्का की दिशा में बने हैं और इसी दिशा में दुनिया भर के मुसलमान नमाज पढ़ते हैं.

यूनेस्को ने जताई आपत्ति
टर्की एक मुस्लिम बाहुल्य देश है, जहां करीब 98 प्रतिशत जनता इस्लाम को मानती हैं. और टर्की की गिनती उन गिने चुने मुस्लिम देशों में होती है जिन्हें सबसे ज्यादा धर्मनिरपेक्ष यानी धर्मनिरपेक्ष माना जाता है. इसलिए हाया सोफिया को मस्जिद में बदलने के फैसले को लेकर टर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन की आलोचना भी हो रही है.

इस पर अमेरिका ने कहा है कि वो हाया सोफिया का दर्जा बदलने के टर्की सरकार के फैसले से निराश हैं. यूनेस्को ने कहा है कि इसमें किसी भी तरह के बदलाव से पहले टर्की को उसे सूचना देनी चाहिए थी. क्योंकि हाया सोफिया, यू​नेस्को की विश्व धरोहरों में भी शामिल है.

ग्रीस के संस्कृति मंत्रालय ने इसे खुलेआम उकसाने वाला फैसला करार दिया है. रूस के ऑर्थोडॉक्स चर्च के मुताबिक टर्की के इस फैसले से विभाजन बढ़ेगा जो शर्म की बात है. 

टर्की में भी हो रहा विरोध
हाया सोफिया को मस्जिद में बदलने के राष्ट्रपति अर्दोआन के फैसले का विरोध, खुद टर्की में भी हो रहा है. टर्की के उदारवादी समाज का बड़ा हिस्सा अर्दोआन के इस कदम को बहुसंख्यकों का तुष्टिकरण बता रहा है. उनका आरोप है कि टर्की की गिरती अर्थव्यवस्था से अर्दोआन की लोकप्रियता कम हो रही है, इसलिए वो देश के मुस्लिम बहुसंख्यकों को कट्टरता की तरफ धकेल रहे हैं.

टर्की के पहले नोबेल पुरस्कार से सम्मानित लेखक ओरहान पामुक  ने कहा है कि टर्की, पूरी दुनिया में एकमात्र ऐसा देश रहा है जिसकी बहुसंख्यक आबादी है. लेकिन टर्की हमेशा से एक धर्मनिरपेक्ष देश रहा है. हाया सोफिया इस गौरव का प्रतीक है. लेकिन इस गौरव को अब छीना जा रहा है.

इन अलोचनाओं के बावजूद टर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन बिलकुल भी बेचैन नहीं है, बल्कि वो तो खुश होंगे क्योंकि उन्होंने पिछले चुनावों में वादा किया था कि वो हाया सोफिया को मस्जिद में बदल देंगे और वो उन्होंने कर दिखाया.

हाया सोफिया की बिल्ली
हाया सोफिया की तरह इन दिनों पूरी दुनिया में एक बिल्ली भी चर्चा का विषय बनी हुई है. ये बिल्ली पिछले 16 वर्षों से हाया सोफिया में ही रहती है. ग्रे रंग की आंखों वाली ये बिल्ली वर्ष 2004 में हाया सोफिया परिसर में ही पैदा हुई थी  जिसका नाम ग्ली है. हया आने वाले पर्यटकों के लिए ये बिल्ली भी आकर्षण का केंद्र बनती है जो भी यहां घूमने आता है, इस बिल्ली के साथ एक फोटो जरूर खिंचवाता है. इस बिल्ली के प्रशंसकों में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा भी शामिल हैं जो वर्ष 2009 में हया सोफिया गए थे, तब वहां उनकी मुलाकात इस बिल्ली से भी हुई थी. और उन्होंने प्यार से उसकी पीठ पर एक थपकी भी दी थी.

इंस्टाग्राम पर अकाउंट
इस बिल्ली का इंस्टाग्राम पर अकाउंट भी है. एक टूरिस्ट गाइड ने चार वर्ष पहले ग्ली का इंस्टाग्राम अकाउंट शुरू किया था. जिसके प्रोफाइल में लिखा है,  मेरी धरती हाया सोफिया है. मैं एक सेलि​ब्रिटी कैट हूं. लोग मुझे यूनिटी ऑफ लव कहते हैं. और आप मेरी खूबसूरत तस्वीरें टैग कर सकते हैं.

हया सोफिया की इस सेलिब्रिटी कैट के इंस्टाग्राम पर 52 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं जो इस बिल्ली के साथ खींची गईं अपनी तस्वीरों को टैग करके पोस्ट करते हैं. इसके अलावा लोग, बिल्ली के बारे में अपने अनुभव भी शेयर करते हैं. और उसके साथ बनाए गए वीडियो भी पोस्ट करते हैं.

हाया सोफिया को मस्जिद में बदल देने के बाद लोगों को ये डर भी सता रहा था कि कहीं इस बिल्ली को वहां से हटा न दिया जाए. लेकिन टर्की की सरकार ने कहा है कि ये बिल्ली, हाया सोफिया में ही रहेगी और पहले की तरह ही उसका ख्याल रखा जाता रहेगा.

वैसे आमतौर पर भारत में बिल्ली को लोग, अशुभ जीव मानते हैं. लेकिन टर्की में ये मान्यता एकदम उलटी है. वहां बिल्ली को भाग्य की निशानी माना जाता है. वहां घरों में बिल्लियों को पाला जाता है. लोग, बेसहारा बिल्लियों को खिलाते-पिलाते हैं और उनका ख्याल रखते हैं. वैज्ञानिक शोध भी बताते हैं कि बिल्लियां इंसानों के जज्बात समझती हैं. उन्हें एहसास होता है कि कब उनके मालिक का मूड अच्छा है और कब बुरा.

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