DNA ANALYSIS: घरेलू हिंसा वाले 'वायरस' को 'लॉकडाउन' करने वाला DNA टेस्ट

दुनिया में किसी के लिए सबसे सुरक्षित उसका घर होता है. ये बात कोरोना के संकटकाल में तो बिल्कुल फिट बैठती है. लेकिन बाहर कोरोना का खतरा हो, और घर के अंदर भी आप सुरक्षित ना हों तो फिर आप कहां जाएंगे. लॉकडाउन के बीच शायद आपको पता नहीं होगा है कि हमारे घरों में क्या हो रहा है. घरेलू हिंसा के मामले अचानक बढ़ गए हैं. 

DNA ANALYSIS: घरेलू हिंसा वाले 'वायरस' को 'लॉकडाउन' करने वाला DNA टेस्ट

आज लॉकडाउन का 10वां दिन है लेकिन कोरोना वायरस को लेकर खबर अच्छी नहीं है. पूरी दुनिया में ये वायरस अब तक 10 लाख लोगों को संक्रमित कर चुका है और 54 हज़ार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. हैरानी की बात ये है कि इस महा-मारी से संक्रमित लोगों का आंकड़ा ढाई लाख पहुंचने में 80 दिनों का समय लगा था लेकिन पिछले सिर्फ 13 दिनों में साढ़े सात लाख लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं.

भारत में भी स्थिति अच्छी नहीं है. भारत में पिछले 24 घंटों में संक्रमण के 478 नए मामले आए हैं और संक्रमित लोगों की संख्या 2877 हो गई है. जबकि 74 लोगों की मौत हो चुकी है. लेकिन यहां हम आपको ये बता दें कि ये आंकड़े देश के अलग-अलग राज्यों में मौजूद Zee News के रिपोर्टर्स द्वारा दिए गए है. जबकि स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े इससे थोड़े अलग हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकडों के मुताबिक संक्रमित मरीज़ों की संख्या 2547 है, जबकि मौतों का आंकड़ा 62 है. ये अंतर इसलिए है..क्योंकि कई बार राज्य सरकारों से आंकड़े केंद्र तक पहुंचने में कुछ समय लगता है. और ये एक ऐसी महा-मारी है जिसके आंकड़े लगातार बदल रहे हैं.

जो लोग बार-बार कह रहे थे कि भारत में कोरोना वायरस के टेस्ट ज्यादा संख्या में नहीं हो रहे, उन्हें हम बता दें कि पहली बार 24 घंटे में 8 हज़ार टेस्ट किए गए हैं और इसीलिए ये आंकड़ा तेज़ी से बढ़ रहा है. इस वायरस की वजह से लोगों की जिंदगियां तो खतरे में है लेकिन प्रकृति को अपना पुराना रूप वापस मिल गया है. प्रदूषण में कमी आने की वजह से अब शहरों से सैंकड़ों किलोमीटर दूर स्थित पहाड़ों को साफ साफ देखा जा सकता है. 

इस समय आपकी स्क्रीन पर पंजाब के जालंधर की एक तस्वीर है. इस तस्वीर में आप हिमाचल प्रदेश की धौलाधार पर्वत श्रंखला को देख सकते हैं.  आपको जानकर हैरानी होगी कि जालंधर से इन पहाड़ों की दूरी करीब 200 किलोमीटर है लेकिन अब इतनी दूर से भी जालंधर के लोग इन पहाड़ों को देख पा रहे हैं. आमतौर पर इतनी दूर से पहाड़ों को देखना संभव नहीं होता. लेकिन आप इसे प्रकृति का कमाल कह सकते हैं.

यानी प्रदूषण घटते ही प्रकृति खुद आपके पास आ गई है. पंजाब में 30 वर्षों के बाद प्रदूषण सबसे कम स्तर पर पहुंच गया है. दिल्ली और मुंबई समेत देश के कई बड़े शहरों में भी प्रदूषण कम हुआ है. दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी प्रदूषण का स्तर 60 के आसपास है. जबकि मुंबई में ये 74 के आसपास है. इन शहरों में प्रदूषण वाले दिनों में ये आंकड़ा 800 से हज़ार तक पहुंच जाता है. इस समय देश के 103 शहरों की हवा की क्वालिटी बहुत अच्छी श्रेणी में आ चुकी है, और 65 शहर ऐसे हैं जहां हवा की क्वालिटी संतोषजनक श्रेणी में हैं.

आज लॉकडाउन का 10वां दिन है. हम उम्मीद करते हैं कि अब तक आपके ये 10 दिन सुख और शांति से बीते होंगे और आपके भीतर विचारों का शोर भी कुछ कम हुआ होगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा के मामले तेज़ी से बढ़े हैं और ऐसा सिर्फ भारत समेत पूरी दुनिया में हो रहा है.

यानी जो महत्वा-कांक्षाएं पहले घरों के बाहर टकराकर शोर मचाती थीं, वो अब बंद दरवाज़ों के पीछे टकरा रही हैं. यानी बाहर की हिंसा घरों के अंदर शिफ्ट हो गई है. इस समय दुनिया के करीब 300 करोड़ लोग लॉकडाउन में हैं, यानी अपने घरों में बंद हैं. ये दौर अपने परिवार के साथ समय बिताने का है और एक दूसरे को बेहतर तरीके से समझने का है, एक दूसरे से प्यार जताने का है लेकिन इसके विपरित घरों में बंद लोग आपस में लड़ रहे हैं और अहंकार की लड़ाई हिंसा में बदल गई है.
 
लॉकडाउन के दौरान कैसे दुनियाभर के लोग अपनों को ही सता रहे हैं, इसके बारे में हम आपको बताएंगे. लेकिन अभी ये जान लीजिए कि इस समय लॉकडाउन की वजह से दुनिया के करोड़ों लोग इस समय घरों में बंद हैं, सड़कों पर गाड़ियां नहीं दौड़ रहीं और फैक्ट्रियां भी बंद हैं . इस शांति की वजह से पृथ्वी का शोर भी कम हो गया है. दुनियाभर में हर रोज़ शोर-शराबे की जो गतिविधियां होती हैं. वो थम गई हैं और इन गतिविधियों के बीच पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने से जो शोर और कंपन पैदा होता है उसमें 33 प्रतिशत की कमी आई है.
 
ये दावा बेल्जियम की Royal Observatory का है. विज्ञान की भाषा में इसे seismic noise कहा जाता है. लेकिन पृथ्वी को शांत करने वाले इंसानों के मन में हिंसा का शोर पैदा हो गया है और ये शोर अब लोगों के मन और शरीर दोनों को घायल कर रहा है. हालांकि लॉकडाउन के दौरान सोशल मीडिया पर आपने ऐसी कई तस्वीरें देखी होंगी, जिसमें पति-पत्नी एक दूसरे की मदद कर रहे हैं, मिलकर खाना बना रहे हैं, पति घर की साफ सफाई कर रहे हैं, परिवार के सभी सदस्य खुशी खुशी एक साथ समय बिता रहे हैं. लेकिन जो तस्वीरें आपके सामने नहीं आ रहीं..वो हैं हिंसा की तस्वीरें, इनमें मानसिक और शारीरिक दोनो प्रकार की हिंसा शामिल है.

पूरी दुनिया में और भारत में इस दौरान घरेलू हिंसा की घटनाएं तेज़ी से बढ़ी हैं और ये बहुत चिंताजनक तस्वीर है..सबसे पहले आपको भारत की स्थिति देखनी चाहिए. इस दुनिया में किसी के लिए सबसे सुरक्षित उसका घर होता है. ये बात कोरोना के संकटकाल में तो बिल्कुल फिट बैठती है. लेकिन बाहर कोरोना का खतरा हो, और घर के अंदर भी आप सुरक्षित ना हों तो फिर आप कहां जाएंगे. लॉकडाउन के बीच शायद आपको पता नहीं होगा है कि हमारे घरों में क्या हो रहा है. घरेलू हिंसा के मामले अचानक बढ़ गए हैं. 

महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों पर शिकायतें करीब दोगुनी हो गई हैं. राष्ट्रीय महिला आयोग के पास मार्च के पहले हफ्ते में 111 शिकायतें आई थीं, मार्च के आखिरी हफ्ते में 257 शिकायतें आईं. मार्च के पहले हफ्ते में घरेलू हिंसा की 30 शिकायतें आई थीं, लॉकडाउन के बाद 69 शिकायतें आई हैं. शिकायतों पर पुलिस भी पूरी तरह से ध्यान नहीं दे पा रही है क्योंकि पुलिस लॉकडाउन के नियमों का पालन करवाने में ताकत लगा रही है. ये तो वो शिकायतें हैं जो दर्ज हो रही हैं लेकिन हज़ारों महिलाएं ऐसी होंगी जिनकी शिकायत सुनने वाला कोई नहीं है. जो घरेलू हिंसा को बर्दाश्त कर रही होंगी.

ये सिर्फ भारत की बात नहीं है, हम आपको दुनिया का हाल भी बता देते हैं. फ्रांस में 17 मार्च से लॉकडाउन चल रहा है. वहां पिछले एक हफ्ते में घरेलू हिंसा के मामले 32 प्रतिशत बढ़ गए हैं. राजधानी पेरिस में ये मामले 36 प्रतिशत बढ़े हैं. स्पेन में 14 मार्च से लॉकडाउन चल रहा है. वहां घरेलू हिंसा के पीड़ितों के लिए सरकारी हेल्पलाइन नंबर पर अचानक कॉल्स बढ़ गई हैं. लॉकडाउन के पहले दो हफ्ते में 12 प्रतिशत ज़्यादा कॉल्स आईं. हेल्पलाइन की वेबसाइट पर ऑनलाइन कंसल्टेशन 270 प्रतिशत बढी हैं

इटली में वहां के एक्टिविस्ट बता रहे हैं कि हेल्पलाइन नंबर पर इमरजेंसी कॉल्स तो कम आ रही हैं, लेकिन उन्हें पीड़ितों से घबराहट और बेचैनी भरे टेक्स्ट मैसेज और ईमेल्स मिल रहे हैं. ऐसा इसलिए कि महिलाओं को घर से कॉल करने में डर लगता है. चीन का हुबेई प्रांत, जो कोरोना वायरस का पहला केंद्र रहा, वहां पर लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा के मामले पिछले वर्ष की तुलना में 47 से बढ़कर 162 हो गए. 

अमेरिका में नेशनल डोमेस्टिक वॉयलेंस हॉटलाइन (National Domestic Violence Hotline) में रोज़ाना करीब 2000 कॉल्स आती हैं. आजकल इनमें करीब 950 कॉल्स में लोग घरेलू हिंसा की शिकायत पर कोरोना का ज़िक्र कर रहे हैं. अमेरिका के सिएटल में घरेलू हिंसा के मामले 21% बढ़े हैं. ब्राजील में महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने बताया कि पिछले एक महीने में घरेलू हिंसा के मामले 40 से 50 प्रतिशत बढ़े हैं. 

ऑस्ट्रेलिया में खुद वहां के प्रधानमंत्री ने कहा है कि लॉकडाउन के दौरान मदद मांगने के लिए गूगल सर्च में 75 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. कैटालोनिया में लॉकडाउन के कुछ ही दिनों में महिला हेल्पलाइन नंबर पर इमरजेंसी कॉल्स 20% बढ़ गई हैं. इसी तरह साइप्रस में कोरोना का पहला केस आने के एक हफ्ते में ही महिला हेल्पलाइन नंबर पर इमरजेंसी कॉल्स 30% बढ़ गई हैं. 

सोचिए किस तरह की मनोस्थिति होगी कि आप घर से बाहर भी नहीं निकल सकते और घर पर भी नहीं रह सकते. क्योंकि बाहर वायरस का खतरा है और अंदर घरेलू हिंसा का खतरा है. ऊपर से सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि घरेलू हिंसा के बारे में खुलकर बोला नहीं जाता है. इस समस्या से पूरी दुनिया में कैसे निपटा जा रहा है. ये भी हम आपको बताते हैं. 
 
फ्रांस में घरेलू हिंसा के पीड़ितों के होटल में रुकने का खर्च सरकार उठाएगी. फ्रांस में मेडिकल स्टोर्स और सुपरमार्केट्स के ज़रिए घरेलू हिंसा के पीड़ितों के लिए एक इमरजेंसी वार्निंग सिस्टम शुरू करने का प्लान है. ऐसी पहल सबसे पहले स्पेन में हुई थी. जहां ये तरीका निकाला गया कि अगर किसी किसी महिला को घरेलू हिंसा की शिकायत करनी है तो वो पास के मेडिकल स्टोर में जाती है और "मास्क 19" कोडवर्ड कहती है, इसके बाद उस मेडिकल स्टोर से तुरंत सिस्टम को अलर्ट कर दिया जाता है. 

जर्मनी में कहा गया है कि घरेलू हिंसा की पीड़ित महिलाओं के लिए खाली होटल्स और गेस्ट हाउस को सेफ हाउस की तरह इस्तेमाल किया जाएगा. इटली में कहा जा रहा है कि घरेलू हिंसा की पीड़ित को अपना घर छोड़ने की ज़रूरत नहीं है. घरेलू हिंसा करने वाले व्यक्ति को तुरंत घर छोड़ना होगा. इंग्लैड में ये कहा जा रहा है कि पुलिस को स्पेशल पावर दी जाए जिससे लॉकडाउन के दौरान घरेलू हिंसा के पीड़ितों को उनके घरों से सुरक्षित निकाला जाए.

DNA वीडियो:

 

अमेरिका में इस तरह की शिकायतें आ रही हैं, जिसमें एक महिला ने कहा कि उसके पति ने ये धमकी दी कि अगर वो महिला खांसती है, तो उसका पति उसे उठाकर सड़क पर फेंक देगा. एक महिला ने कहा कि उसके पार्टनर ने उसे पीटा लेकिन वो हॉस्पिटल भी नहीं जा सकती, क्योंकि कोरोना वायरस का खतरा है. एक पुरुष ने शिकायत की कि उसकी महिला मित्र लगातार दुर्व्यहार कर रही है, वो साफ-सफाई का सामान और सेनिटाइजर छुपा रही है. भारत में राष्ट्रीय महिला आयोग के पास इस तरह की शिकायतें आ रही हैं कि लॉकडाउन के बाद छोटी छोटी बातों पर पति ने पत्नी को पीटा. अपशब्द कहे औऱ मोबाइल फोन तोड़ दिया. एक महिला की शिकायत ये थी कि उसका पति मारपीट करता है लेकिन लॉकडाउन की वजह से वो घर छोड़कर नहीं जा सकती. पुलिस के पास वो जाना नहीं चाहती क्योंकि अगर पति के खिलाफ कार्रवाई हुई तो उसके सास-ससुर उसका टॉर्चर करेंगे.

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (National Family Health Survey) का एक आंकड़ा है कि देश में 30 प्रतिशत महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं. सबसे बड़ी ये है कि इनमें 75 प्रतिशत महिलाएं किसी से कुछ नहीं कहती. सिर्फ 1 प्रतिशत महिलाएं ही पुलिस के पास शिकायत लेकर जाती हैं. घरेलू हिंसा करने वाले लोग कोरोना वायरस की तरह होते हैं. बाहर के वायरस से तो बचा जा सकता है लेकिन घर के इस वायरस से आप को खुद ही बचना होगा. इसके लिए आपको आवाज़ उठानी होगी. देश में भले ही लॉकडाउन है लेकिन घरेलू हिंसा पर आप चुप ना रहें. घरेलू हिंसा के मामले की शिकायत करने के लिए आप 24x7 महिला हेल्पलाइन 181 और इमरजेंसी नंबर 112 पर कॉल करें. या फिर राष्ट्रीय महिला आयोग की वेबसाइट पर जाकर शिकायत दर्ज करें. आप सोशल मीडिया के ज़रिए भी राष्ट्रीय महिला आयोग में शिकायत कर सकती हैं.

आध्यात्मिक गुरु ओशो ने कहा था कि एकांत मूर्खों के लिए कैदखाना बन जाता है और ज्ञानी के लिए स्वर्ग बन जाता है. लॉकडाउन में रहना भी एकांत में रहना ही है. अब आप चाहें तो इसे कैद समझ सकते हैं और आप चाहें तो इसे एक अवसर समझकर खुद को बेहतर बना सकते हैं. लेकिन ज्यादातर लोग खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं. लोगों के मन में डर है. यही डर और बेचैनी रिश्तों की बलि ले रही है. इसलिए आपको लॉकडाउन के दौरान ऐसा आचरण अपनाने चाहिए, जिससे आपका आत्म सम्मान भी बना रहे और दूसरा आपके बर्ताव से आहत भी ना हो.