DNA ANALYSIS: भारत और अमेरिका के संबंधों के इतिहास, वर्तमान और भविष्य का विश्लेषण

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहली भारत यात्रा करीब 60 घंटे बाद शुरू होने वाली है. इस यात्रा की शुरुआत अहमदाबाद से होगी और वहां पर दुनिया का सबसे विशाल क्रिकेट स्टेडियम विश्व के दो शक्तिशाली नेताओं के लिए तैयार है. दुनिया के सबसे बड़े और दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र के संबंधों पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं.

DNA ANALYSIS: भारत और अमेरिका के संबंधों के इतिहास, वर्तमान और भविष्य का विश्लेषण
अहमदाबाद में सुरक्षा के इंतजाम से लेकर शहर को सजाने की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी है.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहली भारत यात्रा करीब 60 घंटे बाद शुरू होने वाली है. इस यात्रा की शुरुआत अहमदाबाद से होगी और वहां पर दुनिया का सबसे विशाल क्रिकेट स्टेडियम विश्व के दो शक्तिशाली नेताओं के लिए तैयार है. दुनिया के सबसे बड़े और दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र के संबंधों पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं.

अहमदाबाद में सुरक्षा के इंतजाम से लेकर शहर को सजाने की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी है. ट्रंप के स्वागत की तैयारियों की चर्चा गुजरात से 13 हजार किलोमीटर दूर अमेरिका में भी हो रही है. ट्रंप अपनी चुनावी रैलियों में लगातार भारत यात्रा की चर्चा कर रहे हैं. यानी अब भारत के 135 करोड़ लोगों के साथ अमेरिका के 32 करोड़ लोग भी इस यात्रा का इंतजार कर रहे हैं. ट्रंप की भारत यात्रा का महत्व समझाने के लिए आज आपको भारत और अमेरिका संबंधों का भूत, वर्तमान और भविष्य बताएंगे.

1950 के दशक में जब दुनिया की दो महाशक्तियों के बीच शीत युद्ध यानी कोल्ड वार चल रहा था, तब भारत और अमेरिका के संबंध भी कोल्ड हुआ करते थे. यानी उस समय दोनों देश उतने करीब नहीं थे जितने आज हैं लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की आपसी दोस्ती ने दोनों देशों को रिश्ते को अभूतपूर्व ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है. सबसे पहले आपको अहमदाबाद में ट्रंप के स्वागत की तैयारियों की जानकारी देते हैं. भारत में अतिथि 24 फरवरी को दोपहर साढ़े 11 बजे ट्रंप अपने विशेष विमान एयर फोर्स वन (Air Force One) से अहमदाबाद के सरदार वल्लभ भाई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचेंगे. यहां ट्रंप के साथ उनकी पत्नी मेलानिया, उनकी बेटी और प्रमुख सलाहकार इवांका ट्रंप और इवांका के पति जेरेड कुशनर (Jared Kushner) भी होंगे. जेरेड कुशनर भी ट्रंप के प्रमुख सलाहकार हैं. राष्ट्रपति ट्रंप के प्लेन से उतरते ही 19 कलाकार उनके लिए शंखनाद करेंगे. भारतीय संस्कृति में किसी भी शुभ काम की शुरुआत शंख की ध्वनि से की जाती है. 

कलाकारों के ग्रुप डांस करके करेंगे ट्रंप का स्वागत
एयरपोर्ट पर ट्रंप का स्वागत खास गुजराती अंदाज में होगा. करीब 150 फीट लंबे रेड कार्पेट के दोनों तरफ कलाकारों का 6 ग्रुप डांस करके ट्रंप का स्वागत करेंगे. इसके बाद, एयरपोर्ट से लेकर सरदार पटेल स्टेडियम तक मोदी और ट्रंप का रोड शो होगा. इस रोड शो की लंबाई 22 किलोमीटर से कम करके 9 किलोमीटर कर दी गई है. दोपहर साढ़े 12 बजे मोदी और ट्रंप मिलकर सरदार पटेल स्टेडियम का उद्घाटन करने के बाद नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करेंगे. इस स्टेडियम में करीब 1 लाख 10 हजार लोग मौजूद होंगे और स्टेडियम के बाहर भी लोग ट्रंप का स्वागत करने के लिए मौजूद होंगे.

इस स्टेडियम में 40 फीट लंबा और 40 फीट चौड़ा एक स्टेज बनाया जा रहा है. इस स्टेज के सामने 14 हजार वीआईपी लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी. और दोनों नेताओं की सुरक्षा के लिए यहां पर 40 करोड़ रुपए के खर्च से फायर सेफ्टी के उपकरण लगाए गए हैं. अहमदाबाद में ट्रंप करीब 4 घंटे का वक्त बिताएंगे. अभी ये तय नहीं है कि मोदी और ट्रंप साबरमती आश्रम जाएंगे या नहीं. और भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक अमेरिका की सरकार इसपर अंतिम फैसला लेगी. जब स्टेडियम में नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम हो रहा होगा, उस समय अहमदाबाद का एयरपोर्ट नो फ्लाइंग जोन (No Flying Zone) बन जाएगा. और तब वहां आने वाली 100 से ज्यादा फ्लाइट्स को वडोदरा में लैंड कराया जाएगा.

Namaste Trump

ट्रंप को नमस्ते ट्रंप प्रोग्राम का सबसे ज्यादा इंतजार
पिछले कुछ दिनों से अमेरिका में अपने चुनाव प्रचार में ट्रंप लगातार भारत और नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम की चर्चा कर रहे हैं. अमेरिका में इसी वर्ष नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं, लेकिन अमेरिका के चुनाव में आमतौर पर छोटी सभाएं होती हैं और वहां के नेताओं के लिए भी इतनी बड़ी रैली करना कोई आम बात नहीं है. इसलिए नमस्ते ट्रंप प्रोग्राम का सबसे ज्यादा इंतजार ट्रंप कर रहे हैं. इससे पहले मोदी और ट्रंप ने मिलकर सितंबर 2019 में अमेरिका में हाउडी मोदी कार्यक्रम में एक भरे हुए स्टेडियम में भाषण दिया था. और वहां की भीड़, लोगों का उत्साह देखकर ट्रंप भी हैरान हो गए थे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की कूटनीतिक ताकत के साथ देश के 135 करोड़ नागरिकों का प्रतिनिधित्व करते हैं. तो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आर्थिक विकास और वैभव के ब्रांड एंबैस्डर हैं. अहमदाबाद के स्टेडियम में ईस्ट और वेस्ट के दो बड़े नेताओं का ये कार्यक्रम भारत और अमेरिका की बराबरी वाली कूटनीति का सबसे बड़ा संदेश है. इसलिए Zee News अहमदाबाद, आगरा और दिल्ली से दो दिनों के इस दौरे की सबसे बड़ी कवरेज कर रहा है. अहमदाबाद में 24 फरवरी को मोदी और ट्रंप का रोड शो होगा. लेकिन उससे पहले आज Zee News की टीम ने उसी रूट से एक स्पेशल रिपोर्ट तैयार की है. ताकि आपको 3 दिनों बाद होने वाले कार्यक्रम की सही तस्वीर मिले.

24 फरवरी को अहमदाबाद में कार्यक्रम के बाद दोपहर साढ़े तीन बजे ट्रंप और मेलानिया ताजमहल देखने के लिए आगरा जाएंगे. इसी दिन ट्रंप आगरा से वापस दिल्ली आ जाएंगे और 25 फरवरी को दोपहर 12 बजे मोदी और ट्रंप के बीच द्विपक्षीय बातचीत होगी. और इस मुलाकात में 5 अहम क्षेत्रों में समझौता होने की उम्मीद है. आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने पर भारत और अमेरिका कुछ बड़े फैसले ले सकते हैं. भारत में सटीक खुफिया सूचनाओं की कमी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी समस्या रही है और इस मुश्किल का हल निकालने के लिए अमेरिका की होमलैंड सिक्योरिटी और भारत के इंटेलीजेंस ब्यूरो के बीच समझौता हो सकता है. जिसके तहत दोनों देश एक दूसरे के साथ आतंकवादियों से जुड़ी जानकारियां साझा करेंगे.

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इस यात्रा में दोनों देशों के बीच दो बड़े रक्षा समझौते भी हो सकते हैं. भारतीय नौसेना के लिए 18 हजार 200 करोड़ रुपए में 24 अमेरिकी हेलीकॉप्टर्स और 5600 करोड़ में भारतीय सेना के लिए 6 अपाचे हेलीकॉप्टर्स खरीदे जा सकते हैं. ये डील पिछले कई सालों से सेना के हथियारों की कमी को पूरा करेगी और भारत की सैन्य ताकत को बढ़ाएगी. भारत और अमेरिका के बीच इंडो पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने के लिए भी एक अहम समझौता हो सकता है. चीन के बढ़ते वर्चस्व को देखते हुए इस इलाके की सुरक्षा भारत और अमेरिका दोनों के लिए ही जरूरी है. कुछ ही दिनों में अमेरिका और तालिबान के बीच अफगानिस्तान में एक डील होने की संभावना है. जिससे इस इलाके में शांति बनाए रखने में भारत का रोल बढ़ सकता है. अमेरिका-अफगानिस्तान में अपने ऑपरेशन में भी भारत की मदद चाहता है और भारत को भी चीन का मुकाबला करने के लिए अमेरिका की जरूरत है.

H1-B वीसा भी दोनों ट्रंप और मोदी के बीच बातचीत का बड़ा मुद्दा रहेगा. ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से ये मुद्दा विवादों में है. एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका काम करने जाने वाले भारतीयों का वीज़ा खारिज होने की घटनाएं बढ़ी हैं. वर्ष 2015 में सिर्फ 1 प्रतिशत भारतीयों का वीज़ा एप्लिकेशन रद्द किया गया था. जो कि वर्ष 2019 में बढ़कर 8 से 10 प्रतिशत तक पहुंच गया है. उम्मीद जताई जा रही है कि ट्रंप के इस दौरे के बाद इस स्थिति में सुधार आएगा.

Intellectual Property Rights यानी IPR पर भी एक समझौता होने की संभावना है. IPR के तहत पेटेंट्स और कॉपीराइट जैसी चीजें आती हैं. अमेरिका की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत उन 10 देशों में शामिल है जहां IPR उल्लंघन के सबसे ज्यादा मामले होते हैं. भारत के लिए इस एग्रीमेंट के बाद ऐसे सभी रिसर्च जिसमें अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से पेटेंट्स और कॉपीराइट्स की जरूरत होती है उसमें आसानी होगी. और दवाइयों की टेस्टिंग और उनसे जुड़े पेटेंट्स हासिल करने में भी भारतीय कंपनियों को आसानी होगी.

हालांकि ट्रंप के इस दौरे में अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील होने की उम्मीद थी. जो अभी कुछ समय के लिए टल गई है. अमेरिका-भारत के साथ अपने दवाइयों के व्यापार को बढ़ाना चाहता है और कृषि उत्पाद खासकर डेयरी प्रोडक्ट की भारत में एंट्री चाहता है. जबकि भारत, अमेरिका में अपने उत्पादों के एक्सपोर्ट पर मिलने वाले विशेष दर्जे को वापस चाहता है. वर्ष 2019 में विवाद के बाद ये दर्जा अमेरिका ने भारत से छीन लिया था. एक तथ्य ये भी है कि ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से भारत और अमेरिका के बीच व्यापार बढ़ा है. लेकिन अब भी ये वर्ष 2014 में तय किए गए 35 लाख करोड़ के लक्ष्य से बहुत दूर है. विशेषज्ञों के मुताबिक ट्रंप और मोदी की मुलाकात में इस विवाद को सुलझाने के लिए एक स्पष्ट रणनीति तैयार की जा सकती है, जो दोनों देशों के हित में होगी. 

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पिछले 73 वर्ष में भारत यात्रा पर आए 7 अमेरिकी राष्ट्रपति
पिछले 73 वर्ष में 7 बार अमेरिकी राष्ट्रपति भारत यात्रा पर आए हैं. और इन 7 दशकों में भारत और अमेरिका के संबंध सदी की सबसे शानदार भागीदारी में बदल गए हैं. वर्ष 1947 में भारत को आजादी मिलने के बाद पहले 50 वर्षों में सिर्फ 3 अमेरिकी राष्ट्रपति भारत आए. जबकि पिछले 20 वर्षों में ही 4 बार अमेरिकी राष्ट्रपति आए हैं. और डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा 5वीं होगी. आज हमने अमेरिका राष्ट्रपतियों के भारत दौरे का एक वीडियो एलबम तैयार किया है जो आपके ज्ञान को बढ़ाएगा. वर्ष 1959 में ड्वाइट आइजनहावर (Dwight Eisenhower) भारत के आधिकारिक दौरे पर आने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति थे. तब अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध चल रहा था. और भारत गुटनिरपेक्ष देशों की अगुवाई कर रहा था. आइजनहावर की इस यात्रा से उन अमेरिकियों का भारत के प्रति नजरिया बदल गया जो ये मानते थे कि भारत का झुकाव सोवियत यूनियन की तरफ है.

Eisenhower की यात्रा के 10 वर्षों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन (Richard Nixon) भारत आए थे. उस समय निक्सन की कोशिश तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ तनाव को कम करना था. इसके दो वर्षो बाद ही वर्ष 1971 में भारत और पाकिस्तान के युद्ध में अमेरिका ने पाकिस्तान का साथ दिया था और इसके जवाब में भारत ने गुट निरपेक्षता की नीति त्याग दी और सोवियत संघ के साथ समझौता कर लिया था.

वर्ष 1978 में जिमी कार्टर (Jimmy Carter) भारत की यात्रा पर आने वाले तीसरे अमेरिकी राष्ट्रपति थे. ये वो वक्त था जब भारत ने वर्ष 1974 में अपना पहला परमाणु परीक्षण कर लिया था. कार्टर ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के साथ और परमाणु परीक्षण ना करने का समझौता करना चाहते थे. लेकिन ये डील नहीं हो पाई. तब कार्टर दिल्ली के पास हरियाणा के एक गांव में गए थे और उस गांव का नाम कार्टरपुरी कर दिया गया. जिमी कार्टर के भारत दौरे के करीब 22 वर्षों बाद राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भारत आए. ये वो समय था जब भारत और अमेरिका एक दूसरे के करीब आ रहे थे. वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में अमेरिका ने भारत का पक्ष लिया था. और दोनों देशों के बीच मजबूत व्यापारिक संबंध बने थे.

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वर्ष 2006 में जब जॉर्ज डब्ल्यू वुश भारत पहुंचे तो उन्होंने भारत के साथ परमाणु समझौता करने की कोशिश की थी. तब भारत और अमेरिका के आर्थिक और रक्षा संबंध बेहतर हो रहे थे. इस यात्रा से 5 वर्ष पहले अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आतंकवादी हमला हुआ था. जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत और अमेरिका आतंकवाद के मुद्दे पर एक हो गए. बराक ओबामा दो बार भारत यात्रा पर आने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति हैं. उनकी पहली यात्रा वर्ष 2010 में हुई थी. उस समय मनमोहन सिंह भारत के प्रधानमंत्री थे. ओबामा ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता का समर्थन किया था. और उस समय भारत और अमेरिका के रिश्तों का स्वर्ण काल शुरु हो गया था. वर्ष 2015 में भारत के गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में शामिल होने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बन गए.