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DNA ANALYSIS: चीन पर भारत की डिजिटल स्‍ट्राइक, अब चीनी Apps की 'नो एंट्री'

भारत सरकार ने चीन के जिन ऐप्स पर बैन लगाने का फैसला किया है उनमें टिकटॉक, कैम स्कैनर, शेयर इट, हेलो, विगो वीडियो, UC ब्राउजर और क्लब फैक्ट्री जैसे मशहूर ऐप्स शामिल हैं. 

DNA ANALYSIS: चीन पर भारत की डिजिटल स्‍ट्राइक, अब चीनी Apps की 'नो एंट्री'

नई दिल्ली: भारत ने चीन के करीब 59 मोबाइल ऐप्स को बैन करने का फैसला लिया है. भारत सरकार ने चीन के जिन ऐप्स पर बैन लगाने का फैसला किया है उनमें टिकटॉक, कैम स्कैनर, शेयर इट, हेलो, विगो वीडियो, UC ब्राउजर और क्लब फैक्ट्री जैसे मशहूर ऐप्स शामिल हैं. 5 मई के बाद से जिस तरह भारत और चीन के रिश्ते बिगड़े हैं उसके बाद से ये चीन के खिलाफ भारत की सबसे बड़ी कार्रवाई है.

भारत, चीन के इन मोबाइल ऐप्स का सबसे बड़ा बाजार है. भारत वैसे भी दुनिया के लिए सबसे बड़ा सोशल मीडिया मार्केट है. क्योंकि भारत में 100 करोड़ से ज्यादा लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं. और भारत ने अब पूरी दुनिया को संदेश दे दिया है कि अगर कोई देश भारत की तरफ आंख उठाकर भी देखेगा तो उसे दुनिया के इस सबसे बड़े बाजार का हिस्सा नहीं बनने दिया जाएगा. 

माना जा रहा है कि ये तमाम ऐप्स भारत की सुरक्षा और अखंडता के लिए खतरा बन चुके थे और इनसे यूजर्स का गोपनीय डेटा लगातार चीन के हाथ लग रहा था. और विशेषज्ञों का मानना है कि अगर चीन से रिश्ते नहीं बिगड़ते तब भी इन ऐप्स को भारत में ऑपरेट करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए थी.

एक आंकलन के मुताबिक चीन के ये ऐप्स दुनिया भर से जो कमाई करते हैं उसका औसतन 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा भारत से आता है. उदाहरण के लिए TikTok इस साल सितंबर तक भारत से 100 करोड़ रुपये कमाना चाहता था. ये सिर्फ भारत में चाइनीज ऐप्स की कमाई का एक उदाहरण है. लेकिन अब भारत के बाजार से चीन के इन ऐप्स की विदाई हो जाने के बाद, भारत से हजारों करोड़ रुपये कमाने का चीन का ये सपना अधूरा रह जाएगा. चीन के ये ऐप्स हवा के रास्ते भारत के लोगों के दिमाग को चीन का वैचारिक उपनिवेश बना रहे थे. इसलिए भारत ने चीन की इस सॉफ्ट पावर पर एक अभूतपूर्व Digital Air Strike किया है. ठीक वैसे ही जैसे 2019 में भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट पर एयर स्ट्राइक और 2016 में PoK में सर्जिकल स्ट्राइक करके पाकिस्तान को कड़ा जवाब दिया था. इसलिए आज भारत सरकार के इस बहुत बड़े फैसले का विश्लेषण जरूरी है. गलवान में शहीद हुए भारत के सैनिकों को सच्ची श्रद्धांजलि यही है कि हम अब जीवन के हर क्षेत्र में हिंदी चीनी Bye-Bye कहना शुरू कर दें.

चीन बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट (Belt And road Project) के जरिए पूरी दुनिया तक अपना विस्तार करना चाहता है. चीन की इस परियोजना में शामिल देश आज परेशान हैं क्योंकि चीन उनपर कर्ज वापस करने का दबाव बना रहा है. चीन भारत को भी इस नए सिल्क रूट का हिस्सा बनाना चाहता था लेकिन भारत ने इससे साफ इनकार कर दिया और अब भारत ने चीन के डिजिटल सिल्क रूट पर भी एयर स्ट्राइक कर दिया है.

चीन सिर्फ सीमा पर ही नहीं बल्कि आपकी जिंदगी और आपको दिलो-दिमाग पर भी इंटरनेट की मदद से अतिक्रमण कर रहा था. आप सिर्फ चीन में निर्मित मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल नहीं कर रहे थे बल्कि जाने-अनजाने में चीन की कंपनियों और वहां की सरकार को अपनी सभी निजी जानकारियां सौंप रहे थे.

उदाहरण के लिए चीन के ज्यादातर मोबाइल ऐप्स दूसरे ऐप्स के मुकाबले उपभोक्ताओं से 45 प्रतिशत ज्यादा परमिशन मांगते हैं.

इनमें Tiktok, UC Browser, Helo और Share- It जैसे Apps शामिल हैं. कई मामलों में तो ये ऐप्स आपके स्मार्टफोन के कैमरा और माइक्रोफोन के इस्तेमाल की भी इजाजत मांगते हैं. जबकि इनकी कोई जरूरत नहीं होती. यानी जरूरत पड़ने पर इन ऐप्स की मदद से आपकी निजी बातचीत सुनी जा सकती है और आपके आसपास की तस्वीरें और वीडियोज भी रिकॉर्ड किए जा सकते हैं और ये सब बिना आपकी इजाजत के संभव है.

ये भी पढ़ें- #DigitalAirStrike: सिर्फ ऐप पर प्रतिबंध नहीं, चीन को एक बड़ा संदेश

चीन के कानून के मुताबिक सभी कंपनियों को वहां की सरकार के साथ डेटा शेयर करना होता है. यानी आपका प्राइवेट डेटा चीन की सरकार के हाथ भी लग सकता है. और जैसा कि हम DNA में आपको कई बार बता चुके हैं कि आने वाले जमाने में वही देश दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश बन पाएगा जिसके पास सबसे ज्यादा डेटा होगा. अब युद्ध जीतने के लिए परमाणु बम या मिसाइलों की जरूरत नहीं है, बल्कि सिर्फ आपके डेटा का इस्तेमाल करके भी किसी देश को घुटने टेकने पर मजबूर किया जा सकता है.

चीन की ये डिजिटल विस्तारवादी नीति भारत जैसे देशों के लिए सिर्फ सुरक्षा के नजरिए से ही खतरा नहीं है. बल्कि इससे स्थानीय व्यापारियों और उद्यमियों को भी नुकसान हो रहा था.

भारत के मोबाइल ऐप मार्केट में चाइनीज ऐप्स की घुसपैठ पिछले कुछ वर्षों में बहुत बढ़ गई थी. हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं. मोबाइल ऐप डाउनलोड के मामले में 2017 में टॉप 100 ऐप्स में सिर्फ 18 चाइनीज ऐप्स थे, लेकिन 2018 में टॉप 100 ऐप्स में चाइनीज ऐप्स बढ़कर 44 हो गए.

भारत में सबसे लोकप्रिय चाइनीज ऐप्स में Tik-Tok है, जिसके भारत में 20 करोड़ से भी ज्यादा एक्टिव यूजर्स हैं. इस बात की भी पूरी संभावना है कि आप या आपके परिवार का कोई ना कोई सदस्य Tik-Tok पर जरूर होगा. इस पर अब प्रतिबंध लग गया है. ये ByteDance नाम की एक चाइनीज कंपनी का ऐप है.

मोबाइल फोन पर PUBG जैसा गेम खेलने वाले भारतीयों की संख्या 5 करोड़ से ज्यादा है. और आपको गेमिंग की लत लगाने वाला PUBG भी एक चाइनीज कंपनी Tencent द्वारा संचालित है. हालांकि इस पर बैन लगाए जाने की अभी कोई सूचना नहीं है.

चीन का UC ब्राउजर, गूगल क्रोम के बाद 22 प्रतिशत मार्केट शेयर के साथ भारत का नंबर 2 इंटरनेट ब्राउजर बन चुका है. UC ब्राउजर चीन की कंपनी अलीबाबा का है. इस पर भी अब प्रतिबंध लग गया है.

इसी तरह से Helo एक सोशल नेटवर्किंग ऐप है जिसके भारत में 40 लाख से ज्यादा यूजर्स हैं. ये भी ByteDance कंपनी के तहत ही संचालित होने वाला ऐप है. इस ऐप पर भी भारत में प्रतिबंध लग गया है.

अपने मोबाइल फोन में Share it का इस्तेमाल भी आपने किया होगा. ये फाइल शेयरिंग ऐप है, जो भारत में बहुत लोकप्रिय है. इसके अलावा Vigo video नाम का ऐप भी आप इस्तेमाल करते होंगे. इस पर भी अब प्रतिबंध लग गया है.

CamScanner नाम के ऐप का इस्तेमाल भी भारत में बहुत होता है. ये भी एक चाइनीज ऐप है, जिसमें डॉक्युमेंट और पिक्चर्स स्कैन किए जाते हैं और इसके करीब 10 करोड़ यूजर्स हैं. इसपर भी प्रतिबंध लग गया है.

इसी तरह से BeautyPlus नाम का चाइनीज ऐप भी है, जो एंड्रॉइड यूजर्स के लिए फोटो एडिटिंग ऐप है, इसके भी भारत में करीब 10 करोड़ यूजर्स हैं.

एक अनुमान के मुताबिक भारत में डाउनलोड होने वाले कुल एंड्रॉइड ऐप्स में चीन की हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत है.

ये चाइनीज ऐप्स, प्राइवेसी और सुरक्षा की दृष्टि से कितने खतरनाक हैं, इसकी चर्चा पूरी दुनिया में होती है. कई देश इन चाइनीज ऐप्स को पहले ही बैन कर चुके हैं.

मार्च 2018 में ऑस्ट्रेलिया ने अपने सैनिकों द्वारा WeChat (वी-चैट) के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी थी.

जनवरी 2018 में US काउंसिल ऑफ फॉरेन रिलेशंस ने दावा किया था कि Baidu जैसे चाइनीज ऐप्स के जरिये चीन की कम्युनिस्ट सरकार प्रोपगेंडा चलाती है.

दिसंबर 2017 में भी भारत सरकार ने Share-IT समेत चीन की 42 मोबाइल फोन ऐप्स को सुरक्षा और प्राइवेसी के मद्देनजर खतरनाक घोषित किया था. और सैन्य बलों को इन ऐप्स के इस्तेमाल से बचने की चेतावनी भी जारी की थी.

जांच में पाया गया कि चीन की Beautyplus और YouCam जैसी कैमरा ऐप्स के इस्तेमाल से मोबाइल फोन का डेटा चोरी हो सकता है और आपके मोबाइल फोन पर साइबर अटैक हो सकता है.

अगस्त 2017 में चीन ने खुद माना था कि Weibo, WeChat और Baidu जैसी ऐप्स साइबर सुरक्षा से जुड़े नियमों का उल्लंघन करती हैं. 

ऐसा नहीं है कि चीन के सिर्फ मोबाइल ऐप्लिकेशन्स ही यूजर्स की प्राइवेसी और सुरक्षा को खतरे में डालते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक मेड इन चाइना मोबाइल फोन्स के जरिये भी चीन, लोगों की जासूसी करता है. चीन की मोबाइल फोन निर्माता कंपनी श्याओमी पर आरोप लगते हैं कि वो दुनियाभर में अपने यूजर्स का डेटा गुप्त तरीके से चीन को भेजती है.

बात सिर्फ चाइनीज ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने की नहीं है, बात उस बड़े संदेश की है, जो इस फैसले के जरिए चीन को दिया गया है. क्योंकि सिर्फ चाइनीज ऐप्स ही नहीं, भारत में चीन के सामान की घुसपैठ घर-घर में हो चुकी है. 

पिछले वर्ष ही चीन से करीब 5 लाख करोड़ रुपये का सामान भारत आया था और भारत से सिर्फ एक लाख 30 हजार करोड़ रुपये का सामान चीन गया. यानी भारत में चीन से आयात और निर्यात के बीच बहुत बड़ा अंतर है. भारत में सबसे ज्यादा 17 प्रतिशत आयात चीन से ही होता है, दूसरे स्थान पर अमेरिका है, जहां से चीन की तुलना में सिर्फ आधा आयात ही होता है.

अगर आप सिर्फ अपने देश के इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार का आंकड़ा देख लें तो आप हैरान रह जाएंगे. चीन की कंपनियों ने पिछले वर्ष 1 लाख 40 हजार करोड़ रुपये के स्मार्टफोन, टेलीविजन, लैपटॉप और दूसरे गैजेट्स, भारत में बेचे हैं. भारत के मोबाइल फोन मार्केट में चाइनीज ब्रांड्स की हिस्सेदारी 71 प्रतिशत हो चुकी है, जबकि भारतीय कंपनियों की हिस्सेदारी 2 प्रतिशत से भी कम है. टेलीवीजन के मार्केट में चाइनीज कंपनियों की हिस्सेदारी 38 प्रतिशत है, जबकि भारतीय कंपनियों की हिस्सेदारी अपने ही बाजार में केवल 9 प्रतिशत है.

इसी का फायदा उठाते हुए चीन ने दिवाली और होली जैसे त्योहारों पर भी कब्जा कर लिया है. पिछले साल दिवाली के त्योहार पर शायद आपने भी मेड इन चाइना लाइट्स और हो सकता है देवी देवताओं की मूर्तियां भी खरीदी होंगी. पहले हमारे देश में मिट्टी के दीप जलाए जाते थे. लेकिन लगातार इनका इस्तेमाल कम हो रहा है. इसी तरह होली में भी चीन में बनी पिचकारियां, रंग और गुलाल ज्यादा उपयोग किए जाते हैं. हमारे त्योहारों में चीन की इस घुसपैठ के बारे में देश के करोड़ों लोगों को शायद कोई जानकारी नहीं होगी. उद्योग संगठन ASSOCHAM के मुताबिक अगर बाजार में 4 पिचकारियां या लाइट्स बिकती हैं तो उनमें से तीन का निर्माण चीन में होता है और सिर्फ 1 को ही भारत में बनाया जाता है. चीन में बना सामान ज्यादा इसलिए खरीदा जाता है क्योंकि ये भारत के मुकाबले 55 प्रतिशत सस्ता होता है.

आज भारत के फैसले के बाद चीन को ये भी समझना होगा कि वहां के निवेशकों ने भारत के उन Start Ups में भी बहुत पैसा लगाया है, जो Start Ups आपके दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुके हैं. और अगला प्रहार चीन के इस निवेश पर भी हो सकता है.

गेटवे हाउस नामक एक भारतीय Think Tank द्वारा की गई एक स्टडी के मुताबिक भारत में फिलहाल 30 ऐसे स्टार्सअप हैं जिनकी वैल्यू 7 हजार 500 करोड़ से ज्यादा है. इन्हें Unicorn Startup कहा जाता है और इनमें से करीब 18 में चीन की बड़ी हिस्सेदारी है. भारत की इन कंपनियों में चीन का करीब 30 हजार करोड़ रुपये का निवेश है.

इस समय भारत में ऐसे 75 Start Ups हैं जिनमें चीन का निवेश है और ये कंपनियां मुख्य रूप से ई-कॉमर्स, डिजिटल पेमेंट, मीडिया और सोशल मीडिया से जुड़ी सेवाएं दे रही हैं. इनमें OLA, बिग बास्केट, बायजू, ड्रीम 11, हाइक, Oyo, पेटीएम, स्नैपडील और जोमैटो जैसी कंपनियां शामिल हैं. वैसे तो भारत के कुल FDI में चीन का हिस्सा 1 प्रतिशत से भी कम है. लेकिन जिस तरह से चीन की कंपनियों ने दैनिक जीवन से जुड़ी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है वो भी चिंता का विषय है.

इससे पहले आपको याद होगा कि कॉमर्स मिनिस्ट्री यानी वाणिज्य मंत्रालय ने अपने E-Marketplace यानी GEM के लिए नया नियम बना दिया था, जिसमें किसी भी विक्रेता को अब इस E-Marketplace पर सामान बेचने के लिए उस सामान का कंट्री ऑफ ओरिजिन बताना होगा. यानी अब इस पोर्टल पर बिकने वाले हर प्रोडक्ट की इमेज के साथ ये बताया जाएगा कि ये प्रोडक्ट किस देश में बना है. 

इस फैसले का असर ये होगा कि जो लोग चीन से सामान आयात करते थे और इसे सरकार के E-Marketplace- GeM पर बेचते थे, वो लोग चीन से सामान खरीदकर भारत में बेचने के लिए हतोत्साहित होंगे और उन लोगों को बढ़ावा मिलेगा, जो देश में बने सामानों को प्राथमिकता देते हैं. यानी ये फैसला आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने लिए किया गया था और जैसे ही भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बढ़ेगा, तो सबसे गहरी चोट चीन को ही पहुंचेगी.

चाइनीज ऐप्स पर भारत के फैसले के बाद अब ये भी देखना होगा कि चीन की प्रतिक्रिया क्या होगी. क्योंकि सीमा विवाद के बीच भारत ने चीन को उसकी आंखों में आंखें डालकर जवाब दिया है. रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भारत दोस्ती निभाना जानता है तो आंखों में आंखें डालकर जवाब देना भी जानता है. ये बड़ा संदेश इसलिए भी है कि इसके जरिए भारत ने दुनिया को बताया है कि चीन के साथ सीमा विवाद में लड़ाई में वो प्रतिबद्ध है, भारत किसी भी दबाव में नहीं आएगा, बल्कि चीन को पूरा जवाब देगा.

चीन के खिलाफ पूरी दुनिया में गुस्सा है, लेकिन उसकी ताकत के सामने अधिकतर देश बोल नहीं पाते. भारत ने सीमा विवाद पर चीन के खिलाफ अब तक जो कड़े कदम उठाए हैं, उससे भारत, चीन के खिलाफ दुनिया की लड़ाई का लीडर बन चुका है. यानी भारत चीन के खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बना सकता है.