DNA ANALYSIS: कोरोना ने बदले क्रिकेट के नियम, जानें क्या हैं नए रूल्स

117 दिनों बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की वापसी हो गई है.

DNA ANALYSIS: कोरोना ने बदले क्रिकेट के नियम, जानें क्या हैं नए रूल्स

नई दिल्ली: भारत तो चीन से सीमा विवाद के मैच में जीत गया. लेकिन क्रिकेट की दुनिया में कोविड 19 से जुड़े नियमों का पालन करते हुए जीत हासिल करना आसान नहीं है. ये क्रिकेट का बहुत बड़ा टेस्ट है.

पिछले 46 वर्षों में ऐसा कभी नहीं हुआ कि 100 दिनों तक क्रिकेट का कोई अंतरराष्ट्रीय मैच ना हुआ हो. कोरोना संक्रमण की वजह से इस वर्ष ऐसा हुआ है, लेकिन अब क्रिकेट फैंस के लिए एक अच्छी खबर आई है. 117 दिनों बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की वापसी हो गई है.

वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के बीच, बुधवार से इंग्लैंड के साउथैम्पटन (Southampton) में 3 टेस्ट मैचों की सीरीज शुरू हुई है. कोरोना संक्रमण की वजह से वेस्टइंडीज के खिलाड़ी पिछले 14 दिनों से आइसोलेशन में थे और स्वास्थ्य जांच होने के बाद ही खिलाड़ियों को मैदान में उतारा गया.

लेकिन कोरोना के खतरे को समझते हुए स्टेडियम पूरी तरह से खाली रखा गया है. यानी स्टेडियम में कोई दर्शक नहीं है और ये टेस्ट मैच दर्शक TV पर ही देख रहे हैं. बुधवार को शुरू हुए इस मैच से पहले इसी साल मार्च में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच मैच खेला गया था.

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13 मार्च को हुए उस मैच में भी स्टेडियम में दर्शक नहीं थे, और इस मैच के बाद ही इंटरनेशलन क्रिकेट काउंसिल यानी ICC ने क्रिकेट मैचों पर रोक लगा दी थी, लेकिन तीन महीने बाद, नए नियमों के साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, मैदान में लौटा है.

क्रिकेट के नियमों में बदलाव 
कोरोना संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए ICC ने क्रिकेट के मैचों के लिए नियमों में कई अस्थाई बदलाव किए हैं.

जैसे गेंदबाज अब गेंद पर सलाइवा यानी लार का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे. ऐसा गेंदबाज आमतौर पर गेंद को स्विंग कराने के लिए करते हैं. लेकिन अब वो ऐसा नहीं कर पाएंगे और अगर उन्होंने नियम तोड़ा तो 2 बार चेतावनी दी जाएगी और तीसरी बार नियम तोड़ने पर, 5 रनों की पेनाल्टी लगेगी. यानी विरोधी टीम के खाते में 5 रन जुड़ जाएंगे.

सोशल डिस्टेंसिंग का नियम मैदान पर भी लागू होगा. इसका मतलब ये है कि विकेट गिरने, बाउंड्री लगने या मैच जीतने पर खिलाड़ी, एक दूसरे से हाथ मिलाकर या गले मिलकर मिलकर जश्न नहीं मनाएंगे. खिलाड़ी एक दूसरे को दूर से ही शाबाशी देंगे.

मैच के दौरान सेनेटाइजेशन ब्रेक भी होगा और इस दौरान स्टम्प्स को सैनेटाइज किया जाएगा. खिलाड़ी एक दूसरे को अपने ग्लव्स, शर्ट या पानी की बोतलें भी नहीं दे सकेंगे.

अब इन अंपायरों को मिलेगा मौका
इसके अलावा मैच के लिए ICC ने स्थानीय अंपायरों को चुना है. पहले के नियमों के मुताबिक न्यूट्रल अंपायर्स का चयन किया जाता था.

नए नियमों के मुताबिक टेस्ट मैच में एक अतिरिक्त DRS यानी डिसीजन रिव्यू सिस्टम (Decision Review System) दिया जाएगा. अब एक टीम को दो DRS मिलेंगे जिसमें वो अंपायर के फैसले पर थर्ड अंपायर से रिव्यू ले सकेंगे.

कोरोना संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए मैच में कोविड सब्स्टीट्यूट  नियम लागू किया गया है. यानी मैच के दौरान किसी खिलाड़ी की तबियत बिगड़ जाए, तो उसकी जगह पर कोई दूसरा खिलाड़ी मैच खेल सकेगा.

वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के बीच इस टेस्ट मैच की एक खास बात ये भी है कि नस्लवाद के विरोध में दोनों टीमें 'Black Lives Matter' का लोगो लगाकर मैदान पर उतरी हैं. ये लोगो खिलाड़ियों की कमीज पर है. इसके जरिए खिलाड़ी नस्लवाद के खिलाफ एकजुटता दिखा रहे हैं.

क्रिकेट के मैदान में तो कोविड 19 से जुड़े नियमों का पालन हो रहा है. लेकिन ऐसा लगता है कि ये वायरस खुद कोई भी नियम नहीं मानना चाहता.

WHO ने भी मानी ये बात
अभी तक ये माना जा रहा था कि कोरोना वायरस हवा से नहीं फैलता लेकिन अब विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने मान लिया है कि कोरोना वायरस हवा से भी फैल सकता है.

दरअसल 32 देशों के 239 वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में पाया है कि कोरोना वायरस के छोटे-छोटे कण हवा में भी जिंदा रहते हैं और ये ज्यादा लोगों को संक्रमित कर सकते हैं.

वैज्ञानिकों ने एक खुला पत्र लिखकर WHO को अपने दिशा-निर्देशों में संशोधन की मांग की थी. जिसके बाद मंगलवार को WHO ने ये स्वीकार किया कि कोरोना वायरस के हवा में फैलने के सबूत हैं.

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खासकर सार्वजनिक जगह पर, भीड़ में, बंद जगहों पर और खराब वेंटिलेशन के हालात में, हवा से ये वायरस फैल सकता है. हालांकि WHO ने ये भी कहा है कि हवा से वायरस फैलने पर उसे अभी और सबूत चाहिए.

इससे पहले WHO ने अपने दिशा-निर्देशों में ये साफ कहा था कि कोरोना वायरस हवा से नहीं फैलता, ये वायरस मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के नाक और मुंह से निकली ड्रॉपलेट्स यानी सूक्ष्म बूंदों से ही फैलता है.

WHO के मौजूदा नियमों के मुताबिक लोगों के बीच कम से कम 3.3 फीट की दूरी होने से वायरस संक्रमण को रोका जा सकता है. लेकिन अब शारीरिक दूरी के नियमों में बदलाव करना होगा, क्योंकि हवा के जरिए वायरस फैलने की बात स्वीकार की गई है. लोगों को अब और सतर्क रहना होगा और लगातार मास्क का इस्तेमाल करना होगा.

इटली में कैसे हैं हालात?
कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में होने वाली तमाम गतिविधियों पर ब्रेक लगा दिए है. इनमें विवाह जैसे आयोजन भी शामिल हैं. इटली कोरोना वायरस के सबसे बुरे दौर से उबर चुका है. लेकिन वहां अब भी विवाह के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने पर पाबंदी है. इस वजह कई लोग विवाह नहीं कर पा रहे.

इटली की कुछ दुल्हनें इसी नियम का विरोध करने के लिए रोम के मशहूर ट्रेवी फाउंटेन के सामने इकट्ठा हो गईं और इन्होंने अपनी वेडिंग ड्रेस पहनकर इस नियम का विरोध किया. इनमें से कई का विवाह लॉकडाउन की वजह से टल गया, तो कुछ सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की वजह से विवाह नहीं कर पा रही हैं. इटली में लागू नियमों के मुताबिक विवाह का कार्यक्रम पूरे दिन नहीं चल सकता और इसमें सीमित संख्या में ही लोगों को शामिल होने की अनुमति है. हालांकि इटली में 18 मई से विवाह कार्यक्रम करने की इजाजत मिल चुकी है. लेकिन इस कार्यक्रम में आने वाले सभी मेहमानों के लिए मास्क जरूरी है और इसका उल्लंघन करने की इजाजत दूल्हा-दुल्हन को भी नहीं है.

पेरिस फैशन वीक पर कोरोना का कहर
कोविड 19 की वजह से सिर्फ विवाह जैसे कार्यक्रम ही नहीं बल्कि दुनिया भर के कई मशहूर आयोजनों का तरीका भी बदल गया है. इन्हीं में से एक है पेरिस फैशन वीक. कोविड 19 की वजह से इस बार पेरिस फैशन वीक का आयोजन ऑनलाइन किया जा रहा है. कुछ फैशन शोज का लाइव प्रसारण किया जा रहा है तो कुछ की रिकॉर्डिंग इंटरनेट पर अपलोड की जा रही है. यानी इस बार दर्शक दुनिया के इस सबसे मशहूर फैशल शो को सिर्फ ऑनलाइन ही देख सकते हैं.