DNA ANALYSIS: जानिए, लॉकडाउन के दौरान समय का कैसे करें उपयोग?

संडे से आप सभी Lock Down में हैं. आप सभी को बेचैनी हो रही होगी. शायद आप में से कई लोगों को अकेले रहना खल भी रहा होगा. हम सब सामाजिक प्राणी है और हमें दूसरे लोगों से मिलना जुलना बहुत पसंद है लेकिन ऐसा शायद पहली बार हो रहा है कि हम किसी से मिल नहीं पा रहे.

DNA ANALYSIS:  जानिए, लॉकडाउन के दौरान समय का कैसे करें उपयोग?

संडे से आप सभी Lock Down में हैं. आप सभी को बेचैनी हो रही होगी. शायद आप में से कई लोगों को अकेले रहना खल भी रहा होगा. हम सब सामाजिक प्राणी है और हमें दूसरे लोगों से मिलना जुलना बहुत पसंद है लेकिन ऐसा शायद पहली बार हो रहा है कि हम किसी से मिल नहीं पा रहे. समय ठहरा हुआ सा लग रहा है और सामाजिक दायरा बिल्कुल घट गया है. हम सब जब बाहर जाते हैं तो किसी से शाबाशी लेते हैं, किसी से सहानूभूति लेते हैं तो कोई हमारी तारीफ करता है. इसलिए हम सबको बाहर जाना और लोगों से मिलना इतना पसंद है. लेकिन इस महामारी ने लोगों को एकांत में रहने की कीमत भी बता दी है. एकांत आपका सबसे अच्छा साथी बन सकता है और अगर एक बार आपको एकांत की आदत हो गई तो यकीन मानिए. Social Distancing आपके जीवन का अभिन्न अंग बन जाएगी.

हम ये नहीं कह रहे कि आप लोगों से मिलना जुलना बिल्कुल बंद कर दें..लेकिन आज हम आपको एकांत में रहने के कुछ फायदे बताना चाहते हैं और ये भी समझाना चाहते हैं कि आप इस समय का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं. आपसे में शायद ही कोई पिछले काफी समय से अपने आप से मिला होगा. लेकिन इस संकट ने हमें खुद से मिलने का मौका दिया है. इसलिए आपको इसका भरपूर फायदा उठाना चाहिए. 

लोग घरों पर रहेंगे तो किताबें पढ़ रहे हैं, गाने सुनेंगे, आराम करेंगे, अपने शरीर और स्वास्थ्य पर ध्यान देंगे. कुछ नई कलाएं सीखेंगे. जीवन जीने के नए तरीके लोगों को समझ आएंगे. कुछ लोग ध्यान करेंगे, कुछ लोग प्रार्थना करेंगे, कुछ लोग नृत्यु करेंगे तो कुछ लोगों का सामना अपनी परछाई से होगा.

धीरे धीरे लोगों की सोच बदलने लगेगी. लोगों के मन के घाव भरने लगेंगे. असवंदेनशील तरीके से जीवन जीने वालों के अभाव में प्रकृति भी खुद को व्यवस्थित करने लगेगी. पृथ्वी की चोटें भी ठीक होने लगेंगी.

जब ये संकट समाप्त हो जाएगा तो लोग फिर से हाथ मिला लेंगे. कुछ लोगों के जाने का दुख होगा. लेकिन जीवन के लिए ये सारी घटना और त्रासदी एक नई शुरुआत की तरह होगी. लोग नए विकल्पों पर ध्यान देने लगेंगे. नए सपने देखेंगे और ऐसी जीवन शैली अपनाएंगे जिससे प्रकृति को कम से कम नुकसान हो. जिस तरह लोग स्वस्थ हुए. उसी तरह पृथ्वी भी स्वस्थ होने लगेगी. यानी जीवन थमेगा नहीं बल्कि Reset हो जाएगा और आप नई ऊर्जा और नए विचारों के साथ अपने नए और बेहतर Version का निर्माण कर पाएंगे.

आपको अकेले ना रह पाने के मनोविज्ञान को समझना होगा
जब भी कोई व्यक्कि अकेले रहता है तो वो अंदर से खाली महसूस करता है. जब आप दूसरों के साथ होते हैं तो वो लोग आपको आपके अस्तित्व का एहसास कराते हैं. जब वो लोग आपको नापंसद करते हैं तो आप दुखी हो जाते हैं और जब दूसरे लोग आपको पसंद करते हैं तो आप खुश हो जाते हैं. यानी आप अपना विश्लेषण दूसरों की नज़र से करते हैं.

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समाज साधारणत लोगों को अकेला रहना नहीं सिखाता आपको कोई ना कोई जिम्मेदारी, कोई ना कोई कार्य को ना कोई प्रथा लगातार निभानी पड़ती है. समाज आपको बताता है कि यही आपकी पहचान है. इसलिए जैसे ही इस रफ्तार पर ब्रेक लगता है. लोग बेचैन हो जाते हैं. लोगों से उनकी पहचान छूट जाती है. आपको हमेशा यही सिखाया जाता है कि आप जो खुद करते हैं. वो ठीक नहीं होता दूसरे आपसे जो कराना चाहते हैं वही सही है.

आप अपनी मर्ज़ी से जो भी करते हैं उसे हमेशा संदेह की नज़रों से देखा जाता है लेकिन जैसे ही आप दूसरे के कहे मुताबिक चीज़ें करने लगते हैं. आपकी तारीफ होने लगती है.लेकिन ये संकट आपको आपकी स्वतंत्रता की कीमत समझाकर जा सकता है. Virus ऊंच-नीच, धर्म जाति और गरीबी-अमीरी नहीं देखता. आप किस देश से हैं. इससे भी कोई फर्क नहीं पड़ता. महामारियों की नज़र में सब बराबर होते हैं और आपको भी इस समानता को समझना चाहिए. लेकिन बीमारियों से लड़ने की सबकी क्षमता अलग अलग होती है, कुछ लोग जल्दी ठीक हो जाएंगे ,कुछ लोगों को अस्पताल जाने की ज़रूरत पड़ेगी और शायद कुछ लोगों की जान भी ना बचाई जा सके. कुछ लोग संक्रमित ना होने के बावजूद मानसिक तनाव में चले जाएंगे.

इस वायरस ने हमें बता दिया है कि सबकी अपनी अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमताएं होती हैं. यानी सब अलग अलग पृवत्ति के होते हैं. और यही विभिन्नता हमें सबका सम्मान करना सीखाती है.इसलिए स्वयं के साथ साक्षात्कार का ये मौका गवाएं नहीं. इस एकांत का प्रयोग दर्पण की तरह करे और अगर इस दर्पण पर कुछ वक्त की कुछ धूल नज़र आ भी जाए.तो उसे साफ करते हुए सत्य का साक्षात्कार करें.