DNA ANALYSIS: 'कोरोना काल' में भगवान श्री राम से सीखिए ये 6 गुण, बदल जाएगी आपकी जिंदगी!

आज हमारे लिए सही समय है कि हम कोरोना के संकट काल में, भगवान राम के गुणों को अपने जीवन में उतार लें.

DNA ANALYSIS: 'कोरोना काल' में भगवान श्री राम से सीखिए ये 6 गुण, बदल जाएगी आपकी जिंदगी!

आज रामनवमी है. आप सभी के जीवन में शायद ये पहला मौका होगा जब रामनवमी के दिन मंदिर बंद हैं. लेकिन, भगवान राम इन दिनों रामायण सीरियल के जरिये स्वयं आपके घरों में पहुंच रहे हैं. ऐसे में, टीवी पर रामायण देखते हुए आपको खुद से ये पूछना चाहिए कि आप भगवान राम के जीवन से क्या सीख रहे हैं. रामायण का एक प्रसंग है, जिसमें लंका को जलाने के बाद हनुमान सीता के पास आज्ञा लेने जाते हैं. और उनसे कहते हैं कि भगवान राम के लिए आपका कोई संदेश हो तो बताएं. इसपर सीता कहती हैं - भगवान से कहना. सीता पर इस समय भारी संकट है, वो इस संकट को तुरंत दूर कर दें. भगवान राम ने कैसे सीता का संकट दूर किया, ये तो आप रामायण सीरियल में देखेंगे ही. लेकिन आज हमारे लिए सही समय है कि हम कोरोना के संकट काल में, भगवान राम के गुणों को अपने जीवन में उतार लें.

श्रीराम हमें जो सबसे बड़ा गुण सिखाते हैं, वो है त्याग. वो हमें संकल्प और संयम भी सिखाते हैं. भगवान हमें अ-परिग्रह यानी कम संसाधनों के साथ जीवन-यापन करना भी सिखाते हैं. इसके अलावा वो हमें विनम्रता के बारे में भी बताते हैं. लेकिन, विनम्रता के साथ-साथ भगवान हमें क्रोध का उचित तरीका भी सिखाते हैं. और आखिर में श्रीराम हमें लोक-लाज के गुण को संभाल कर रखने की प्रेरणा भी देते हैं.

सबसे पहले श्रीराम का पहला गुण, यानी त्याग. कोरोना के इस संकट काल में त्याग ही हमारी ताकत है. पिता के कहने पर भगवान ने राज-पाट छोड़ दिया था. क्या आप देश को बचाने के लिए त्याग कर सकते हैं? श्रीराम का दूसरा गुण है- संकल्प और संयम. भगवान ने 14 वर्षों का वनवास स्वीकार किया. इस दौरान कभी धैर्य नहीं खोया. कैकेयी के प्रति भी राम ने हमेशा आदर का भाव रखा. और लक्ष्मण से भी कहा कि वो कभी उनके प्रति द्वेष का भाव ना रखें. जबकि कैकेयी के ही कहने पर राम को वनवास हुआ था. यहां हम श्रीराम से संकल्प और संयम के गुण सीख सकते हैं.

श्रीराम का तीसरा गुण आपके लिए, आज के समय में बहुत उपयोगी है. ये गुण है- Mini-malism यानी अपरिग्रह. भगवान ने राज-पाठ छोड़कर संन्यास का जीवन अपनाया. महल की सुविधा को त्याग कर, कम संसाधनों में जीवन बिताने लगे. प्रकृति के बीच चले गए.  कोरोना से लड़ाई लड़ने के लिए भी हमें अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा. श्रीराम से सीखने लायक चौथा गुण है- विनम्रता. उन्होंने कभी अहंकार नहीं किया. निषाद-राज जैसे गरीब मित्रों को गले से लगाया. बंदर-भालुओं, यानी वंचितों को भी सम्मान दिया.

भगवान का जो पांचवां गुण आपको अपनाना चाहिए, वो है- उचित क्रोध. लंका में प्रवेश के लिए श्रीराम ने पहले समुद्र से रास्ता मांगा. लेकिन, जब समुद्र को विनती की भाषा समझ में नहीं आई तब भगवान ने क्रोध दिखाया. जब श्रीराम ने समुद्र को सुखा देने की चेतावनी दी, तब जाकर समुद्र ने पुल बनाने का अवसर दिया, यानी अपनी लहरों को शांत कर दिया . यानी भगवान हमें सिखाते हैं कि क्रोध को कारगर बनाने के लिए जरूरी है कि... पहले आप नरमी भी दिखाएं.

और आखिर में भगवान से हमें लोक-लाज का भाव भी जरूर सीखना चाहिए. राम-राज में सीता को भी अग्निपरीक्षा से गुज़रना पड़ा था. एक आम नागरिक के सवाल उठाने पर सीता को भी वन जाना पड़ा था. ये सारा कुछ भगवान ने इसलिए किया क्योंकि वो लोक-लाज का लिहाज करते थे. राम चरित मानस में, भगवान राम ने कहा है. मैं मृत्यु से नहीं डरता, लेकिन बदनामी से डरता हूं.

कोरोना के इस संकट काल में आपको चारों ओर दुर्भाग्य दिखाई देता होगा. लेकिन इस दुर्भाग्य में आपको सौभाग्य की तलाश करनी है. भविष्य के लिए खुद को तैयार करना चाहते हैं तो, श्रीराम इस काम में आपकी मदद कर सकते हैं.