DNA ANALYSIS: 9 बजे 9 मिनट 'उम्मीद की रोशनी' से कैसे दूर भागेगा कोरोना?

थोड़ी देर के लिए ये अंधकार आपको कोरोना के संकट की याद दिला सकता है. लेकिन, इस अंधेरे को दूर करने की जिम्मेदारी भी आपकी होगी.

DNA ANALYSIS: 9 बजे 9 मिनट 'उम्मीद की रोशनी' से कैसे दूर भागेगा कोरोना?

जब कोई परिवार या देश संकट से गुज़र रहा होता है, तब उसके मुखिया का दायित्व सबसे अहम होता है. विपत्ति से लड़ने का संकल्प और संयम इस बात पर निर्भर करता है कि आपका मुखिया इस घड़ी में आपको कितना एकजुट रख पाता है. वो आपका उत्साह कितना बढ़ा पाता है. और ऐसे में संवाद की भूमिका बढ़ जाती है. कोरोना वायरस फैलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 हफ्ते के अंदर, आज पांचवीं बार देश की जनता को संबोधित किया.  

आज सुबह 9 बजे, प्रधानमंत्री ने देश के लोगों से अपील की कि वो 5 अप्रैल को रात नौ बजे 9 मिनट तक मोमबत्ती, दीया, टॉर्च या मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाएं. प्रधानमंत्री ने अपने साढ़े 11 मिनट के संबोधन में 6 बार प्रकाश और 7 बार शक्ति या ताकत शब्द का प्रयोग किया.इसके अलावा उन्होंने संबल, मनोबल, ऊर्जा, आशा, उजाला, संकल्प, उत्साह, आत्मविश्वास और विजय जैसे शब्दों का भी प्रयोग किया. ये सारे वैसे शब्द हैं, जो सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं.

आज हम अंधकार से रोशनी की ओर ले जाने वाले, इसी सकारात्मक संवाद का, सामाजिक और वैज्ञानिक विश्लेषण करेंगे. लेकिन पहले आप ये सुन लीजिए कि प्रधानमंत्री ने आज क्या कहा.  प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में संस्कृत के एक श्लोक का प्रयोग किया. जिसका अर्थ होता है कि इस दुनिया में उत्साह से बढ़कर कोई ताकत नहीं है और उत्साह की ताकत से हम इस दुनिया में किसी को भी हरा सकते हैं. कहने का मतलब ये है कि प्रधानमंत्री ने देश की जनता को, यानी आप सभी को 5 अप्रैल को रात नौ बजे उम्मीदों का दीया जलाने को कहा है. उनकी बात को ध्यान से समझिए. घर की सभी लाइटें बंद करनी है. ऐसा करते ही चारों तरफ अंधेरा छा जाएगा. 

थोड़ी देर के लिए ये अंधकार आपको कोरोना के संकट की याद दिला सकता है. लेकिन, इस अंधेरे को दूर करने की जिम्मेदारी भी आपकी होगी. यानी पूरे देश में 5 अप्रैल को , रात 9 बजे कितना उजाला होगा, ये सिर्फ और सिर्फ आपकी कोशिशों पर निर्भर होगा. और ये उजाला उम्मीदों का उजाला होगा. नौ मिनट की वो रोशनी आपके जीवन में उम्मीदों का उजाला भरने का काम करेगी. इस बात में सिर्फ सामाजिकता ही नहीं, बल्कि एक तरह का मनोविज्ञान भी है, जिसे Collective consciousness यानी सामूहिक चेतना कहते हैं. 

100 में से 5 लोग जब कोई पहल करते हैं, तब बाकी 95 लोगों की ऊर्जा भी उसमें शामिल हो जाती है. ये वो मनोविज्ञान है, जो कोरोना वायरस के खिलाफ कारगर हो सकता है. यानी 5 अप्रैल को देश के लोगों को एकजुट होकर रोशनी का एक त्योहार मनाने का मौका मिलेगा. जो दिवाली की तरह बुराई के अंधकार से उम्मीदों के उजाले की ओर जाने का संदेश देगा. वैसे भी पिछले दिनों जो त्योहार आए, उन पर लॉकडाउन का असर रहा. इस वजह से लोगों को उत्सव मनाने का मौका नहीं मिला. 

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में संस्कृत के एक श्लोक का प्रयोग किया. जिसका अर्थ होता है कि इस दुनिया में उत्साह से बढ़कर कोई ताकत नहीं है और उत्साह की ताकत से हम इस दुनिया में किसी को भी हरा सकते हैं. कहने का मतलब ये है कि प्रधानमंत्री ने देश की जनता को, यानी आप सभी को 5 अप्रैल को रात नौ बजे उम्मीदों का दीया जलाने को कहा है. उनकी बात को ध्यान से समझिए. घर की सभी लाइटें बंद करनी है. ऐसा करते ही चारों तरफ अंधेरा छा जाएगा.

यानी बत्तियां बुझाने के बाद आपका सामना घोर अंधेरे से होगा. थोड़ी देर के लिए ये अंधकार आपको कोरोना के संकट की याद दिला सकता है. लेकिन, इस अंधेरे को दूर करने की जिम्मेदारी भी आपकी होगी. यानी पूरे देश में 5 अप्रैल को , रात 9 बजे कितना उजाला होगा, ये सिर्फ और सिर्फ आपकी कोशिशों पर निर्भर होगा. और ये उजाला उम्मीदों का उजाला होगा. नौ मिनट की वो रोशनी आपके जीवन में उम्मीदों का उजाला भरने का काम करेगी. इस बात में सिर्फ सामाजिकता ही नहीं, बल्कि एक तरह का मनोविज्ञान भी है, जिसे Collective consciousness यानी सामूहिक चेतना कहते हैं. 
  
कोरोना के संकट काल में, प्रधानमंत्री मोदी अब तक 4 बार टेलीविज़न के जरिये और एक बार रेडियो पर देश को संबोधित कर चुके हैं. वो सोशल मीडिया के ज़रिये भी लोगों से लगातार जुड़े हुए हैं. इस दौरान उन्होंने कितने असरदार तरीके से अपनी बात रखी, इसपर ध्यान दीजिए. सबसे पहले उन्होंने 19 मार्च को टीवी पर अपना संदेश दिया. जिसमें 22 मार्च को जनता कर्फ्यू लगाने की बात कही. इसी दिन उन्होंने ताली और थाली बजाकर उन लोगों का धन्यवाद करने को कहा, जो कोरोना के खिलाफ जान जोखिम में डालकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. और इसके बाद 24 मार्च को दोबारा टीवी पर आकर प्रधानमंत्री ने 25 मार्च से 21 दिनों के लॉक डाउन की घोषणा कर दी. 

25 मार्च को प्रधानमंत्री ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के लोगों से, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बात की और पूरे देश को कोरोना वायरस पर हेल्पडेस्क नंबर  दिया. 29 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी फिर एक बार रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में शामिल हुए और उन्होंने देश के लोगों को हुई परेशानियों के लिए माफी मांगी. और आज पांचवीं बार टीवी पर आकर उन्होंने पूरे देश से उम्मीदों का दीया जलाने की अपील की है. 

यानी प्रधानमंत्री लगातार पूरे देश को ये अहसास करा रहे हैं कि कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में वो हर कदम पर देशवासियों के साथ हैं. और ये भी कि वो अकेले कुछ भी नहीं कर सकते. इस लड़ाई में सफलता तभी मिलेगी, जब देश की 135 करोड़ जनता उनका साथ देगी. यही वजह है कि प्रधानमंत्री ने कोरोना को हराने के लिए  PM-CARES Fund भी बना दिया. प्रधानमंत्री ने देश की जनता से संवाद के अलावा, अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोगों से भी बात की. मिसाल के तौर पर उन्होंने राज्यों के मुख्यमंत्री से बात की, इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के पत्रकारों से बात की, उन्होंने मेडिकल सुविधाओं से जुड़े लोगों, Radio Jockeys और खिलाड़ियों के साथ भी चर्चा की. 

कुल मिलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये संदेश दिया जब आप अपने घरों में बंद हैं, तब संवाद की ज़रूरत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ जाती है. और इसके लिए प्रभावी तरीके से संचार करना होता है. यानी आपस में जुड़कर बात करनी होती है. 5 अप्रैल को रात नौ बजे 9 मिनट तक जब आप मोमबत्ती, दीया, टॉर्च या मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाएंगे, तब वो भी एक तरह का संवाद ही होगा. संवाद कभी-कभी मौन होकर भी बेहद शक्तिशाली होता है. क्योंकि उसकी ऊर्जा सामूहिक होती है. दो दिनों बाद आपको सामूहिक एकता दिखाने का, ऐसा ही एक मौका मिलने वाला है.