DNA ANALYSIS: लॉकडाउन और कोरोना वायरस ने बदल दी रिश्तों की परिभाषा

लॉकडाउन और कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में रिश्तों की परिभाषा बदल दी है. उदाहरण के लिए जो देश अब इस महामारी से उबर रहे हैं वहां तलाक के मामले बढ़ने लगे हैं. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स (Global times) के मुताबिक चीन के हुनान प्रांत में वकीलों के पास पानी पीने का भी समय नहीं है. क्योंकि तलाक की अर्जी देने वालों की लंबी कतारें लगी हई हैं.

DNA ANALYSIS: लॉकडाउन और कोरोना वायरस ने बदल दी रिश्तों की परिभाषा

लॉकडाउन और कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में रिश्तों की परिभाषा बदल दी है. उदाहरण के लिए जो देश अब इस महामारी से उबर रहे हैं वहां तलाक के मामले बढ़ने लगे हैं. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स (Global times) के मुताबिक चीन के हुनान प्रांत में वकीलों के पास पानी पीने का भी समय नहीं है. क्योंकि तलाक की अर्जी देने वालों की लंबी कतारें लगी हई हैं.

अब कुछ लोग इसे Covi-Divorce कह रहे हैं. Covi- Covid-19 का शॉर्ट फॉर्म है. चीन में तलाक के बढ़ते आंकड़ों के पीछे वजह ये बताई जा रही है कि वहां कई पति-पत्नियों को 2 महीने लगातार बिना घर से बाहर निकले एक छत के नीचे बिताने पड़े, इसका नतीजा ये हुआ कि लड़ाई-झगड़े बढ़ गए और लॉकडाउन हटते ही कई लोगों ने एक दूसरे के साथ ना रहने का फैसला ले लिया.

विशेषज्ञ तो ये भी कह रहे हैं कि इस दौरान पैदा होने वाले बच्चों को कोरोना बेबीज कहा जाने लगेगा और जब वो 13 वर्ष के होंगे तो उन्हें टीन की बजाय Quaran-teen कहा जाएगा. इस दौरान जो लोग अपना जीवन साथी ढूंढ रहे हैं, उनसे कहा जा रहा है कि आप बहुत ध्यान से अपना जीवन साथी चुनें क्योंकि हो सकता है आपको आने वाले समय में उसके साथ कई महीनों तक एक ही घर में रहना पड़े. 

अब आपको अंदाज़ा हो गया होगा कि जो दुनिया अक्सर एक साथ, एकजुट होने का दावा करती है, जन्मों-जन्मों तक साथ निभाने की कसमें खाती है. उसकी हकीकत कैसे इस महामारी ने सामने ला दी है. हम ये नहीं कह रहे कि सब ऐसा ही करते हैं, या सब हिंसा ही करते हैं. पूरी दुनिया में बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो एक छत के नीचे रहते हुए भी दूसरों को स्पेस देना जानते हैं. काम में एक दूसरे की मदद करना जानते हैं. बड़ों को सम्मान देना और छोटों को स्नेह देना जानते हैं. और ये लोग लॉकडाउन के दिनों में भी ऐसा ही कर रहे हैं लेकिन हम उन लोगों की बात कर रहे हैं जिनके सच को कोरोना वायरस सामने ले आया है. ऐसे लोग घरों से बाहर ना निकलकर वायरस से तो बच रहे हैं..लेकिन अपने ही परिवार में हिंसा का वायरस फैला रहे हैं जो कहीं ज्यादा घातक है.

 
अब सवाल ये है कि कोराना काल में कैसा आचरण अपनाया जाए कि लोग एक दूसरे के खिलाफ हिंसा ना करें और रिश्तों की गरिमा भी बनी रहें. लॉकडाउन के दौरान किसी परिवार में तीन पीढ़ियां एक साथ हैं, किसी में दो पीढ़ियां तो कहीं पति पत्नी एक दूसरे के साथ घर में बंद हैं. ऐसे में विचारों का टकराना स्वाभाविक है. लेकिन आप शिष्टाचार के कुछ तरीके अपनाकर मनमुटाव और हिंसा से बच सकते हैं और रिश्तों को नई मजबूती दे सकते हैं. लॉकडाउन के दौरान अहंकार के ज्वालामुखी पर बैठे रिश्तों को शांत बनाए रखने के लिए आप कुछ टिप्स अपना सकते हैं. लेकिन पहले ये समझ लीजिए कि रिश्तों में द्वंद और हिंसा की नौबत आती ही क्यों है. रिश्तों में ये खिंचाव तब आता है जब आप अपनी इच्छाओं और अहंकार को दूसरों पर थोपते हैं. और लॉकडाउन के दौरान जब आप लगातार एक दूसरे के साथ रहते हैं तो इस अहंकार को और बल मिलता है. 

इससे बचने का पहला उपाय और सही आचरण ये कि अगर परिवार के किसी सदस्य के साथ आपके मतभेद हैं तो उन विषयों पर फिलहाल चर्चा ही मत कीजिए. सबसे बेहतर है कि एक घर में रहते हुए भी आप एक दूसरे को कुछ समय के लिए अकेला छोड़ दें. यानी लॉकडाउन के दौरान आपको एक और लॉकडाउन लागू करना है और जिसके तहत आपको दूसरों की इच्छाओं और विचारों का सम्मान करना है. दूसरी बात एक साथ रहते हुए भी हर व्यक्ति की अपनी निजता यानी प्राइवेसी होती है, इसका हमेशा सम्मान करें. प्रेम में निजता को अहमियत देना सबसे महत्वपूर्ण है और यही प्रेम का सच्चा स्वरूप भी है.

तीसरी बात ये है कि हमेशा अपनी ही बात मनवाने की कोशिश ना करें. उदाहरण के लिए टीवी के रिमोट पर अपना कंट्रोल रखने जैसी छोटी छोटी बातें पर ना लड़ें. कुछ देर आप अपनी पसंद के कार्यक्रम देखें तो कुछ देर दूसरों को उनकी पसंद के कार्यक्रम देखने दें कोशिश करें कि लॉकडाउन के दौरान अपने पूरे परिवार के साथ भोजन करें. कई स्टडीज का ये दावा है कि पूरे परिवार के साथ भोजन करने से तनाव में कमी आती और ये मनमुटाव दूर करने में भी मदद करता है.

Organization for Economic Cooperation and Development द्वारा की गई एक रिसर्च के मुताबिक जो बच्चे अपने परिवार के साथ बैठकर भोजन नहीं करते वो स्कूल में भी ज्यादातर गैरहाज़िर रहते हैं. स्टडीज का ये भी दावा है कि एक साथ भोजन करने से मोटापे की आशंका भी कम हो जाती है. लॉकडाउन के दौरान एक साथ रहने का अर्थ ये नहीं है कि आप हमेशा एक दूसरे में उलझे रहें, इस दौरान आप अपने लिए भी कुछ समय निकालें. आपको जिन चीज़ों का शौक है, उन्हें पूरा करने पर ध्यान दें. आप कुछ पल निकालकर मेडिटेश्न भी कर सकते हैं. इसके अलावा आपको Mini-malism को अपनाना चाहिए. ताकि आप कम संसाधनों में भी खुशी-खुशी रहना सीख जाएं. और आपकी इच्छाएं आपके नियंत्रण में रहें.

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घर पर रहते हुए अपने मोबाइल फोन को जितना हो सके. खुद से दूर ऱखें. हो सकता है कि मोबाइल फोन पर नज़रे टिकाने की आपकी आदत इतनी मजबूत हो गई हो, कि आपने लंबे समय से अपने ही परिवार के सदस्यों का चेहरा ना देखा हो. इसलिए मोबाइल फोन की स्क्रीन पर समय बिताने की बजाय परिवार के साथ समय बिताएं इससे आपके जीवन में ब्राइटनेस भी आएगी और आप खुद को रिचार्ज भी कर पाएंगे. घर के काम-काज को अपने जीवन साथी और परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ मिलकर निपटाएं. Work From Home का अर्थ ये नहीं है कि आप पूरे दिन काम का बहाना बनाकर अपने ही लोगों की मदद से इनकार कर दें.

और सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि ये समय आपको सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) तो सिखा रहा है लेकिन आपको इसके नाम पर अपनों की अनदेखी करने की ज़रूरत नहीं है. दूसरों की मदद करने से पहले अपने परिवार की मदद करें. और याद रखें कि कोई परफेक्ट नहीं होता. लोगों की सहायता करें और धैर्य बनाए रखें क्योंकि धैर्य से अच्छा साथी कोई नहीं होता.