DNA ANALYSIS: चीन की 'कठपुतली' ओली की चालबाजी का विश्लेषण

नेपाल के प्रधानमंत्री इस समय पूरी तरह चीन के इशारों पर चल रहे हैं और चीन उनकी सरकार बचाने की भी पूरी कोशिश कर रहा है. 

DNA ANALYSIS: चीन की 'कठपुतली' ओली की चालबाजी का विश्लेषण

नई दिल्ली: कुछ दिनों पहले नेपाल ने एक नया नक्शा जारी करते हुए भारत के तीन इलाकों को अपना हिस्सा बताया था और ये नक्शा नेपाल की संसद के दोनों सदनों से भी पास हो गया था. लेकिन इस नए नक्शे का विरोध करने वाली एक मात्र सांसद को उनकी पार्टी और संसद से निकालने का फैसला लिया गया है. इस सांसद का नाम है सरिता गिरी. सरिता गिरी नेपाल की समाजबादी पार्टी की सांसद हैं. सरिता गिरी का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने इस नए नक्शे का विरोध किया था और सच बोलते हुए कहा था कि भारत के लिपुलेख लिपिया धुरा और कालापानी को नेपाल के नक्शे में शामिल किए जाने का कोई आधार नहीं है. लेकिन नेपाल की सरकार को ये सच बर्दाश्त नहीं हुआ और सरिता गिरी को सच बोलने की सजा अपना पद गवांकर भुगतनी पड़ी. 

नेपाल के प्रधानमंत्री इस समय पूरी तरह चीन के इशारों पर चल रहे हैं और चीन उनकी सरकार बचाने की भी पूरी कोशिश कर रहा है. और इसमें सबसे बड़ा रोल नेपाल में चीन की राजदूत निभा रही हैं. जिसका नाम है हू यान की. कहा जाता है कि भारत और नेपाल के तलाक की पटकथा हू यान की ने ही लिखी है और ये विवादित नक्शा तैयार करने के पीछे भी उनका ही हाथ है. चीन की ये राजदूत लगातार नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली समेत तमाम राजनेताओं से मुलाकात कर रही हैं ताकि नेपाल की कम्यूनिस्ट पार्टी को टूटने से बचाया जा सके. 

हू यान की को आप नेपाल पर्यटन का एंबेसडर भी कह सकते हैं क्योंकि वो अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ये दिखाती हैं कि वो नेपाल और नेपाल की संस्कृति को कितना पसंद करती हैं. उन्हें नेपाल में सोशल मीडिया स्टार का दर्जा हासिल है और यहां तक कि नेपाल की मीडिया पर भी उनका अच्छा खासा दबदबा है. वो लगातार नेपाल के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के दफ्तर का दौरा करती रहती हैं.

अब नेपाल के लोग भी चीन की इस दखलअंदाजी का विरोध कर रहे हैं और सड़कों पर उतरकर चीन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं .

कहते हैं किसी नेता की पहचान तभी होती है जब उसका देश संकट के दौर से गुज़र रहा होता है । ऐसे दौर में एक नेता का नेतृत्व ही ये तय करता है कि आगे की दशा और दिशा क्या होगी. Covid 19 ने दुनिया के तमाम शक्तिशाली नेताओं की परीक्षा ली है. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौरान बहुत अच्छा काम किया है और इसकी तारीफ अब दुनिया कर रही है. अंतरराष्ट्रीय पोलिंग एजेंसी मॉर्निंग कंसल्ट (Morning Consult) ने दुनिया भर के कई नेताओं की अप्रूवल रेटिंग जारी की है. इस पोल के मुताबिक भारत के 74 प्रतिशत लोगों को प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व पर यकीन है. और इस मामले में उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को भी पीछे छोड़ दिया है.

इसी पोल के आधार पर एक अंतरराष्ट्रीय अखबार फाइनेंशियल टाइम्स (Financial Times) ने एक रिपोर्ट तैयार की जिसमें कहा गया है कि मुश्किल के इस दौर में मोदी की मसीहा जैसी छवि में भारत के लोगों का भरोसा आज भी कायम है.