DNA ANALYSIS: क्या बच जाएंगे पालघर के गुनहगार? CID की चार्जशीट पर उठे सवाल

महाराष्ट्र CID ने अपनी जांच के बाद जो चार्जशीट दाखिल की है उसमें तो ये मामला सामान्य अपराध ही बना दिया गया. 

DNA ANALYSIS: क्या बच जाएंगे पालघर के गुनहगार? CID की चार्जशीट पर उठे सवाल

नई दिल्ली: आज हम महाराष्ट्र के पालघर में दो संतों की हत्या के मामले में दाखिल हुई उस चार्जशीट की बात करेंगे, जिससे इस मामले में धार्मिक एंगल को पूरी तरह गायब कर दिया गया है. इस इलाके में कम्युनिस्टों और इसाइयों के बढ़ते प्रभाव के एंगल को भी पूरी तरह से हटा दिया गया है. महाराष्ट्र की CID ने तीन महीने पहले हुई लिंचिंग के इस मामले में दो चार्जशीट दाखिल की है. आपको याद होगा कि 16 अप्रैल को मुंबई से सूरत जा रहे दो संतों और उनके ड्राइवर की पालघर में पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी और इसमें सबसे बड़ी बात ये थी कि ये हत्या पुलिस के सामने ही हुई थी. खुद पुलिस ने भगवा वत्र पहने इन संतों को भीड़ के हवाले कर दिया था.

इस तरह से हुई हत्या, सामान्य अपराध का मामला नहीं था, लेकिन महाराष्ट्र CID ने अपनी जांच के बाद जो चार्जशीट दाखिल की है, उसमें तो ये मामला सामान्य अपराध ही बना दिया गया. क्योंकि चार्जशीट में कहा गया है कि पालघर में संतों की हत्या के पीछे कोई सांप्रदायिक कारण नहीं थे, बल्कि ये हत्या अफवाहों की वजह से ही हुई थी और भीड़ ने संतों को बच्चा चोर समझ कर मार दिया था.

CID की इस चार्जशीट के मुताबिक पालघर के उस इलाके में उस वक्त, कई दिनों से अफवाहें थी कि कुछ लोग बच्चों को किडनैप करके उनके शरीर से अंग निकाल लेते हैं और ऐसे लोग साधु, पुलिस या डॉक्टर के भेष में आ सकते हैं. इसी अफवाह की वजह से स्थानीय लोगों ने संतों को किडनैपर समझ लिया और उन पर जानलेवा हमला कर दिया.

CID की चार्जशीट में धार्मिक एंगल नहीं
सिर्फ यही नहीं महाराष्ट्र CID ने चार्जशीट में इस बात को भी खारिज कर दिया कि इस मामले में वामपंथी विचारधारा या फिर पालघर के उस इलाके में धर्म परिवर्तन के लिए सक्रिय ईसाई मिशिनरीज का कोई हाथ था. CID को इस मामले में वामपंथियों और ईसाई मिशिनरीज की कोई भूमिका नजर नहीं आई.

इस मामले में महाराष्ट्र CID ने दो चार्जशीट दाखिल की हैं. 126 आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट करीब 5 हजार पन्नों की है और दूसरी चार्जशीट करीब 6 हजार पन्नों की है. लेकिन इस चार्जशीट पर बड़े सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि इसमें संतों की हत्या पर अफवाह वाली थ्योरी को ही प्रमुखता दी गई और अफवाह को ही हत्या की असली वजह बता दिया.

लेकिन अफवाह वाली थ्योरी पर तो पहले ही दिन से सवाल उठ रहे थे, क्योंकि संतों को चोर समझ कर बड़ी निर्दयता से मार डालने वाली बात किसी के गले नहीं उतर रही थी. इसके पीछे किसी ना किसी साजिश की बात हो रही थी और ये कहा जा रहा था कि संतों पर ये हमला, संतों से नफरत की वजह से किया गया हमला था. जिसमें साजिश के तहत भीड़ को इकट्ठा किया गया और फिर संतों की हत्या के लिए भीड़ को उकसाया गया.

चार्जशीट पर उठे सवाल
चार्जशीट पर सवाल इसलिए भी उठे हैं क्योंकि महाराष्ट्र CID पर आरोप है कि उसने इस मामले में मौके पर मौजूद उन स्थानीय नेताओं को क्लीन चिट कैसे दे दी, जिन पर पहले दिन से सवाल उठे थे. 16 अप्रैल को हुई इस लिंचिंग की रात, करीब 2 हजार लोगों की भीड़ थी, लेकिन बताया जा रहा है कि इसमें सिर्फ 800 लोगों से ही पूछताछ हुई. आरोप यही हैं कि जांच में आरोपियों का पक्ष तो रखा गया, लेकिन संतों का पक्ष नहीं रखा गया.

इन्हीं आशंकाओं की वजह से संत समाज पहले से ही मांग कर रहा था कि इस केस को सीबीआई या एनआईए जैसी केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा जाए. CID ने अपनी इस चार्जशीट में इस बात का भी खुलासा नहीं किया कि पालघर में शुरुआती दो घंटे तक संतों पर जानलेवा हमला क्यों नहीं हुआ और इसके बाद अचानक उस जगह पर संतों की हत्या करने के लिए भीड़ कैसे जुट गई.

कैसे लॉकडाउन में हजारों लोगों की भीड़ जुट गई थी? और क्या किसी ने जानबूझ कर इस भीड़ को इकट्ठा किया था? और अगर वाकई पालघर में अफवाह की वजह से संतों की हत्या की गई, तो पुलिस ने संतों को बचाने की कोशिश क्यों नहीं की थी. पुलिस ने खुद संतों को भीड़ के हवाले कर दिया था और फिर भीड़ ने पीट-पीट कर उनकी जान ले ली थी.

महाराष्ट्र सरकार ने अफवाह को बताई घटना की वजह
महाराष्ट्र सरकार पहले दिन से यही कह रही थी कि पालघर की घटना एक अफवाह की वजह से हुई थी. CID ने यही बात अपनी चार्जशीट में भी कह दी है. अब सवाल ये है कि इस चार्जशीट और इस जांच पर कितना भरोसा किया जाए? ज़ी न्यूज़ ने लगातार इस मामले में रिपोर्टिंग की है और इस केस की पड़ताल की है, जिससे यही पता चला कि ये सामान्य अफवाह से हुई हत्या का मामला नहीं था. पालघर में संतों की लिंचिंग के वक्त कुछ स्थानीय नेता भी मौजूद थे, जिसमें एनसीपी का नाम प्रमुखता से आया था, लेकिन इन नेताओं को क्लीन चिट दे दी गई.

सवाल ये है कि क्या ये इसलिए हुआ क्योंकि महाराष्ट्र में गृह मंत्रालय एनसीपी के पास है. आज ज़ी न्यूज़ की टीम एक बार फिर पालघर पहुंची और वहां पर स्थानीय लोगों से बात की. जिस गांव में ये घटना हुई थी, वहां की सरपंच से हमने बात की है. इन लोगों का कहना है कि वहां पर बच्चा चोर गिरोह की अफवाह जरूर थी, लेकिन ये किस वेष-भूषा में आएंगे, ऐसी कोई अफवाह नहीं थी.

जबकि CID ने ये कहा है कि चोरों के साधु, पुलिस या डॉक्टर के भेष में आने की अफवाह थी. लेकिन अगर ऐसा ही था, तो पुलिस पर हमला क्यों नहीं हुआ, संतों पर ही हमला क्यों हुआ. पालघर के कुछ स्थानीय लोगों ने हमें ये भी बताया कि इस मामले में असली आरोपियों को पकड़ा नहीं गया और दूसरे लोगों को फंसा दिया गया. 

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