DNA ANALYSIS: कोरोना काल में बाढ़ से जूझते असम की 'दुर्दशा'

असम में स्थिति बहुत खराब है. वहां लगभग 70 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. साढ़े तीन करोड़ की आबादी वाले राज्य में ये बहुत बड़ी संख्या है. लोगों के घर नष्ट हो गए हैं, फसलें नष्ट हो गई हैं, मवेशी मारे गए हैं. बाढ़ में फंसे लोगों को किसी तरह से बचाने की कोशिश हो रही है. 

DNA ANALYSIS: कोरोना काल में बाढ़ से जूझते असम की 'दुर्दशा'

नई दिल्ली: आज हम उस बाढ़ के बारे में बात करने जा रहे हैं जिसका इलाज हमारा देश आजादी के 73 वर्षों के बाद भी नहीं ढूंढ पाया है. उदाहरण के लिए जब दिल्ली में कुछ घंटे की बारिश होती है और यहां का मिंटो ब्रिज हमेशा की तरह डूब जाता है, तो पूरे दिन राष्ट्रीय मीडिया में इसी की चर्चा होती है. लेकिन देश का एक बड़ा हिस्सा, एक महीने से बाढ़ में डूबा है. फिर भी इस पर मीडिया के एक वर्ग का ध्यान नहीं है. ज़ी न्यूज़ लगातार इस पर देश को ध्यान दिला रहा है. इसलिए आज हम असम, बिहार और पूर्वोत्तर के इलाकों में आई बाढ़ की बात करेंगे. 

खासतौर पर असम में स्थिति बहुत खराब है. वहां लगभग 70 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. साढ़े तीन करोड़ की आबादी वाले राज्य में ये बहुत बड़ी संख्या है. लोगों के घर नष्ट हो गए हैं, फसलें नष्ट हो गई हैं, मवेशी मारे गए हैं. बाढ़ में फंसे लोगों को किसी तरह से बचाने की कोशिश हो रही है. डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों को उनके घरों से निकाल कर राहत शिविरों में पहुंचाया गया है.

असम में बाढ़ से त्राहि-त्राहि
असम से बाढ़ की विचलित कर देने वाली तस्वीरें आ रही हैं. चारों तरफ पानी ही पानी दिख रहा है. असम के 33 जिलों में 5 जिलों को छोड़कर बाकी 28 जिलों में बाढ़ की स्थिति है. इसी से आप अंदाजा लगाइए कि असम कितने बड़े संकट से गुजर रहा है. एक तरफ कोरोना वायरस और दूसरी तरफ ऐसी बाढ़, असम के लोगों के लिए ये बड़ी त्रासदी है.

असम में कोरोना वायरस से जितने लोगों की मौत नहीं हुई, उससे दोगुनी मौत तो बाढ़ से हो चुकी है और इसमें 100 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. सबसे चिंता की बात ये है कि अभी इस स्थिति में कोई सुधार नहीं दिख रहा है. क्योंकि आने वाले कुछ दिनों में असम और पूर्वोत्तर के कुछ इलाकों में, और भी ज्यादा भारी बारिश हो सकती है.

असम की बाढ़ ने ना तो इंसानों को बख्शा है, ना ही इसने जानवरों को छोड़ा है. संरक्षित वन्य जीवों के लिए मशहूर वहां के काजीरंगा नेशनल पार्क का 90 प्रतिशत हिस्सा बाढ़ में डूब गया है. यहां पर 100 से ज्यादा जानवरों की मौत हो चुकी है और जान बचाने के लिए जानवर अब इस नेशनल पार्क से भाग रहे हैं. गैंडे और हाथी जैसे जानवर अब हाईवे और बस्तियों में इधर-उधर भटक रहे हैं.

हर वर्ष आती है बाढ़
वैसे तो असम के एक बड़े हिस्से में हर वर्ष बाढ़ आती है, लेकिन इस बार की बाढ़ में हालात बद से बदतर हो चुके हैं. क्योंकि एक महीने के अंदर असम में तीन बार बाढ़ आ चुकी है. जब देश का एक राज्य इस तरह की बड़ी मुसीबत में फंसा है, तो पूरे देश को असम के लिए प्रार्थना करनी चाहिए, कि इस संकट में वहां पर कम से कम नुकसान हो और जल्द से जल्द हालात बेहतर हों.

बाढ़ से जूझ रहे देश के 7 राज्य
देश के सात राज्यों में इस वक्त बाढ़ की चुनौती है. इन सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों से प्रधानमंत्री ने बात भी की थी. क्योंकि कोरोना वायरस के संक्रमण के बीच इन राज्यों पर दोहरी मुसीबत आ गई है. भारत में बाढ़ हर वर्ष की एक बड़ी समस्या है.

आपको ये सुनकर हैरानी होगी कि दुनिया में बाढ़ से होने वाली 20 प्रतिशत मौतें, सिर्फ भारत में होती हैं. आजादी से लेकर अब तक भारत में बाढ़ से एक लाख से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है.

वैसे असम में बाढ़ तो पहले भी आती थी, लेकिन ऐसा चार-पांच वर्ष में एक बार होता था. अब पिछले कुछ वर्षों से असम में हर वर्ष बाढ़ आने लगी है. ऐसा क्यों हो रहा है, इसे आप तीन बातों से समझ सकते हैं.

असम देश का ऐसा राज्य है, जो पूरी तरह से नदी घाटी पर बसा है. असम का 72 प्रतिशत इलाका ब्रह्मपुत्र नदी की घाटी में है, और जैसे ही ब्रह्मपुत्र नदी का जल स्तर बढ़ता है, इस इलाके पर बाढ़ का खतरा बन जाता है.

दूसरी बात ये है कि ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों पर बनाए गए बांध और तटबंध, बाढ़ की समस्या को कम करने के बजाए, उसे बढ़ा रहे हैं. इससे नदियों का प्राकृतिक रूप से प्रवाह नहीं हो पाता है और फिर जलस्तर बढ़ने पर नदियां अपने प्राकृतिक प्रवाह में आती है, जिससे बाढ़ की स्थिति बन जाती है.

तीसरी बात ये है कि नदियों के किनारे अतिक्रमण और बेरोकटोक निर्माण से भी पानी की निकासी प्रभावित होती है.

असम में तो औसत से ज्यादा बारिश होती है, इसलिए भी बाढ़ की समस्या हो जाती है, लेकिन हमारे शहर तो ऐसे हैं कि थोड़ी सी बारिश में ही, यहां पर बाढ़ वाली स्थितियां बन जाती हैं. हैरानी की बात ये है कि इसका कोई उपाय निकाला नहीं जाता और हर वर्ष हमको एक जैसी तस्वीरें देखने को मिलती हैं.

दिल्ली का मिंटो ब्रिज ऐसी ही एक जगह है. कुछ दिन पहले, इसी जगह पर एक बस डूब गई थी, और इसमें एक व्यक्ति की मौत भी हो गई थी. लेकिन बात सिर्फ इस साल की नहीं, हर साल, बारिश के मौसम में, ये जगह डूब जाती है और वहां पर ऐसे ही कोई बस फंस जाती है. 

वर्षों से दिल्ली की इस जगह पर यही हो रहा है. 87 वर्ष पुराना मिंटो ब्रिज, एक तरह से दिल्ली में बारिश और बाढ़ की पहचान बन गया है. फिर चाहे सरकार किसी की भी रही हो.

चीन में भयानक बाढ़
अब हम चीन में आई भयानक बाढ़ की बात करेंगे. वहां ऐसी बाढ़ पिछले 30 साल में नहीं देखी गई और इससे चीन के 27 राज्यों में करीब 4 करोड़ लोग बेघर हो गए हैं. हजारों लोगों के घर नष्ट हो चुके हैं और अब तक करीब 90 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है. ये सब हुआ है, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी कम्युनिस्ट पार्टी की नीतियों की वजह से.

क्योंकि उनका ध्यान तो इस वक्त दूसरे देशों में अतिक्रमण करने और दुनिया से उलझने में लगा है. लेकिन उन्हें अपने ही देश के लोगों की चिंता नहीं है. जून की शुरुआत से ही चीन में भारी बारिश हो रही थी। पिछले डेढ़ महीने से चीन की छोटी-बड़ी 433 नदियों में लगातार जलस्तर बढ़ रहा था, इसमें से 33 नदियों में जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया था, लेकिन चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने इस प्राकृतिक आपदा की एक तरह से अनदेखी की,

आज हालात ये है कि चीन के पूर्वी इलाके, मध्य इलाके और दक्षिण-पश्चिमी इलाके के कई शहर बाढ़ में डूब चुके हैं. चीन की सबसे बड़ी नदी Yangtze (यांगत्से) के किनारे बसे गांवों, कस्बों और शहरों में हर जगह पानी भर गया है. ये नदी उस हुबेई प्रांत से ही होकर बहती है, जहां के वुहान शहर से चीन ने दुनिया भर में कोरोना वायरस फैलाया गया था. चीन का ये प्रांत बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित है.

इस बाढ़ का एक कारण चीन के थ्री गॉर्जेस डैम को भी बताया जा रहा है. ये बांध, वुहान से 368 किलोमीटर दूर है और कहा ये जा रहा है कि चीन की सरकार ने जल्दबाजी में इस बांध के गेट खोल दिए, जिसकी वजह से बाढ़ की स्थिति बन गई. दुनिया के सबसे बड़े बांध के तौर पर थ्री गॉर्जेस डैम को चीन अपनी शान बताता रहा है, लेकिन अब चीन कह रहा है कि इस बांध के टूटने का भी खतरा है, इसलिए पानी छोड़ा गया.

चीन की चाल है वुहान में बाढ़? 
हालांकि कई लोग ये भी मानते हैं कि चीन ने जानबूझ कर वुहान जैसे शहरों में बाढ़ की स्थिति बनाई, क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक टीम वहां के दौरे पर जाने वाली थी, जो इस बात की जांच कर रही है कि आखिर वुहान में कोरोना वायरस कैसे आया. इसलिए आरोप लग रहे हैं कि चीन ने सबूतों को मिटाने के लिए जानबूझ कर बाढ़ का सहारा लिया और अपनी ही जनता को डूबने पर मजबूर कर दिया.