DNA ANALYSIS: आत्मनिर्भर भारत का सफर लंबा लेकिन नामुमकिन नहीं

भारत में वर्ष 2014 तक मोबाइल फोन बनाने की 2 फैक्ट्रियां थीं, लेकिन 2019 तक मोबाइल फोन की 200 फैक्ट्रियों हो गईं. 

DNA ANALYSIS: आत्मनिर्भर भारत का सफर लंबा लेकिन नामुमकिन नहीं
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नई दिल्ली: हम आपको मेड इन इंडिया मुहिम के असर के बारे में बताते हैं. हमने आपको ये बता चुके हैं कि किस तरह से लोग, अब बाजारों में स्वदेशी उत्पाद को लेकर जागरूक हुए हैं. बिजली उपकरणों और खिलौनों के बाजार में, लोग अब दुकानदारों से मेड इन इंडिया प्रोडक्ट्स मांग रहे हैं. लेकिन हमारे सामने एक बड़ी चुनौती भी है. 

हमने भारत के मोबाइल फोन बाजार पर एक ग्राउंड रिपोर्ट की है, जिससे ये पता चलता है कि इस मामले में आत्मनिर्भर बनने के लिए हमें अभी लंबा सफर तय करना है. क्योंकि भारत के मोबाइल फोन बाजार में 70 प्रतिशत हिस्सा चीन की कंपनियों का है. आप सभी के पास जो भी मोबाइल फोन है उसका कोई ना कोई उपकरण चीन का है.

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हालांकि विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले चार-पांच वर्षों में कुछ सकारात्मक बदलाव हुए हैं. कई मोबाइल फोन कंपनियों ने भारत में अपनी फैक्ट्रियां लगाई हैं. जिसकी वजह से भारत में मोबाइल फोन की स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग बढ़ी है और इस वक्त मोबाइल फोन बनाने में भारत दुनिया का दूसरे नंबर का देश है.

भारत में वर्ष 2014 तक मोबाइल फोन बनाने की 2 फैक्ट्रियां थीं, लेकिन 2019 तक मोबाइल फोन की 200 फैक्ट्रियों हो गईं. वर्ष 2014 में देश में 6 करोड़ मोबाइल फोन बनते थे, लेकिन 2019 तक भारत में 33 करोड़ मोबाइल फोन बनने लगे. दूसरे देशों से मोबाइल फोन का आयात भी 80 प्रतिशत से घटकर 3 प्रतिशत रह गया है.

अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा मोबाइल फोन भारत में बिकते हैं और भारत के इतने बड़े बाजार में चीन की कंपनियां ही हावी हैं. सिर्फ मोबाइल फोन ही नहीं, खेल का सामान हो या फिर फुटवेयर मार्केट, भारत के बाजार, अभी चीन पर बहुत निर्भर हैं.

लेकिन कैसे हम इस मामले में चीन पर अपनी निर्भरता कम कर सकते हैं? हमारे सामने क्या बड़ी चुनौतियां हैं? ये समझने के लिए देखें हमारी ये ग्राउंड रिपोर्ट-