DNA ANALYSIS: क्या वाकई दुनिया ने कोरोना से डरना छोड़ दिया?

पूरी दुनिया में लॉकडाउन हटते ही लोग बड़ी संख्या में बाहर निकल रहे हैं. लोगों के मन में इस बात का जरा भी डर नहीं है कि उन्हें भी कोरोना वायरस का संक्रमण हो सकता है.

DNA ANALYSIS: क्या वाकई दुनिया ने कोरोना से डरना छोड़ दिया?

नई दिल्ली: आज हम उस थकान का विश्लेषण करेंगे जो जरूरत से ज्यादा काम की वजह से नहीं बल्कि कोरोना वायरस (Coronavirus) की वजह से पैदा हुई है. इस थकान को अंग्रेजी में 
महामारी थकान (Pandemic Fatigue) और आपदा थकान (Disaster Fatigue) कहा जाता है. यानी वो स्थिति जब किसी संकट का सामना करते-करते आपका मन और शरीर दोनों पूरी तरह से थक जाते हैं. यानी आप बर्न आउट होने लगते हैं. बर्न आउट एक ऐसी स्थिति है जब आपके शरीर और मन में जरा भी ऊर्जा नहीं बचती. इसी थकावट का नतीजा है कि पूरी दुनिया में लॉकडाउन हटते ही लोग बड़ी संख्या में बाहर निकल रहे हैं. लोगों के मन में इस बात का जरा भी डर नहीं है कि उन्हें भी कोरोना वायरस का संक्रमण हो सकता है.

ब्रिटेन की राजधानी लंदन में कुछ दिनों पहले पब और बार खोल दिए गए और लोग बिना सोशल डिस्टेंसिंग की परवाह किए, बड़ी संख्या में इन जगहों पर पहुंचने लगे. 

इसी तरह अमेरिका में भी कई बीच खोल दिए गए हैं और लोग बड़ी संख्या में लॉकडाउन से पैदा हुई थकावट मिटाने के लिए इन बीचेज पर जा रहे हैं. ये स्थिति तब है जब अमेरिका कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या के मामले में दुनिया में पहले नंबर पर है.

दुनिया भर में अनलॉक की प्रक्रिया शुरू
अमेरिका की तरह स्पेन में भी बड़ी संख्या में लोग बीच पर पहुंचकर कोविड 19 से पैदा हुई थकावट को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं. स्पेन एक समय में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से एक था. इसी तरह संक्रमण के मामले में दूसरे नंबर पर मौजूद ब्राजील में भी कई शहरों से लॉकडाउन हटा दिया गया है. और लोग बड़ी संख्या में बाहर निकल रहे हैं.

भारत कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के मामले में दुनिया में तीसरे नंबर पर है. लेकिन भारत में भी अब लॉकडाउन हटा दिया गया है और लोग संक्रमण के खतरे से बेपरवाह होकर, घूमने-फिरने के लिए बाहर निकल रहे हैं. इसी तरह वियतनाम में भी पिछले महीने एक फुटबॉल लीग का आयोजन हुआ और इस दौरान स्टेडियम पूरी तरह पैक था.

मार्च के महीने में 25 तारीख को भारत में जब लॉकडाउन लगाया गया था तो भारत में कोविड 19 के करीब 500 मरीज थे. और अब ये संख्या बढ़कर साढ़े सात लाख हो चुकी है. इसी तरह जब दुनिया के ज्यादातर देशों में कोविड 19 के मामले कुछ सौ से लेकर कुछ हजार के बीच थे तब दुनिया की करीब आधी आबादी यानी करीब 400 करोड़ लोग लॉकडाउन में चले गए थे और अब, जब पूरी दुनिया में कोविड 19 के मामले 1 करोड़ 18 लाख से अधिक हो चुके हैं और इससे मरने वालों की संख्या साढ़े पांच लाख हो गई है. तब लोग बाहर आ रहे हैं, पार्टी कर रहे हैं, फुटबॉल मैच देख रहे हैं, धार्मिक आयोजनों में हिस्सा ले रहे हैं और घूम-फिर रहे हैं.

लंदन की इन तस्वीरों को देखकर ऐसा लगता है कि या तो लोगों को डर लगना बंद हो गया है. या फिर लोग इस संकट का सामना करते-करते इतना थक गए हैं कि उन्हें कैद में रहना कोरोना वायरस का सामना करने से ज्यादा खतरनाक लगने लगा है. 

ये तस्वीरें देखकर आप कह सकते हैं कि लोग अब कोविड 19 के साथ सहज हो गए हैं. लोगों ने इसकी सच्चाई को स्वीकार कर लिया है और मान लिया है कि कोरोना वायरस का संक्रमण तो एक दिन होना ही है. कोविड 19 अपने साथ अनुशासन लेकर आया था. लेकिन अनुशासन के इस टेस्ट में लोग दो से तीन महीनों में ही फेल हो गए. लोग सावधानी बरतने की बजाय ऐसी दवाएं और गोलियां खाने के लिए तैयार हैं. जो उन्हें इस वायरस से बचाने का भरोसा दिलाती हैं. यानी लोग अनुशासन के लंबे रास्ते पर चलने की बजाय इंस्टेंट सॉल्यूशन की तरफ भाग रहे हैं और सोच रहे हैं कि कड़े नियम कायदों का पालन करने से अच्छा है कि कोई गोली या जड़ी-बूटी खा ली जाए.

लेकिन लोग इस वायरस और इससे जुड़े नियमों से इतना थक क्यों गए हैं इसे आप कनाडा के उदाहरण से समझ सकते हैं. कनाडा में इस समय कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या एक लाख से ज्यादा है और वहां 8 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.

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लॉकडाउन ने लोगों को थकाया 
लेकिन हाल ही में वहां हुए एक सर्वे में पाया गया कि कोरोना वायरस से डरने वालों की संख्या 73 प्रतिशत से घटकर 46 प्रतिशत रह गई है. इसी तरह कुछ दिनों पहले तक कनाडा के 56 प्रतिशत लोग मानते थे कि सार्वजनिक स्थानों पर नहीं जाना चाहिए लेकिन अब ऐसा मानने वालों की संख्या सिर्फ 36 प्रतिशत है.

कनाडा के 31 प्रतिशत लोग मानते हैं कि कोरोना वायरस और लॉकडाउन ने उन्हें थका दिया है. जबकि 28 प्रतिशत लोगों ने माना है कि वो घबराहट का शिकार हो चुके हैं. यानी कनाडा के 60 प्रतिशत लोग या तो Pandemic Fatigue का शिकार हो चुके हैं या फिर इस महामारी ने उनकी मानसिक स्थिति पर बुरा असर डाला है. लेकिन ये हालात सिर्फ कनाडा के नहीं बल्कि दुनिया के ज्यादातर देशों के हैं. 

शरीर और मन पर इसका असर
हमारे शरीर में मौजूद एक हॉर्मोन, स्ट्रेस यानी तनाव को मैनेज करने का काम करता है. इस हॉर्मोन का नाम है कोर्टिसोल (Cortisol). आम तौर पर शरीर में इस हॉर्मोन का स्तर सुबह के समय ज्यादा होता है और शाम होते-होते इसका स्तर कम होने लगता है. लेकिन जब कोई संकट या महामारी लंबे समय तक होती है तो डर और आशंका की वजह से शरीर में ये हॉर्मोन अधिक मात्रा में बनने लगता है. और चौबीसों घंटे इसके स्तर में कमी नहीं आती. इससे शरीर और मांसपेशियों में दर्द, हाई ब्लड प्रेशर और डिप्रेशन जैसी शारीरिक और मानसिक परेशानियां होने लगती हैं. लोग इससे बचने के लिए किसी भी कीमत पर घर से बाहर निकलना चाहते हैं फिर भले ही सामने जानलेवा कोरोना वायरस की क्यों ना हो.

इसके अलावा इसका असर आपके मन पर भी पड़ता है. लोगों को बात-बात पर गुस्सा आने लगता है. लोगों को भविष्य की चिंता जरूरत से ज्यादा सताने लगती है. आत्मविश्वास गिर जाता है और इन सब बातों का असर रिश्तों पर भी पड़ता है और रिश्ते टूटने लगते हैं.

इतना ही नहीं शरीर में कोर्टिसोल जैसे हॉर्मोन की मात्रा बढ़ने से इसका असर इम्युनिटी पर भी पड़ता है और शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता कम होने लगती है. शायद यही वजह है कि इम्युनिटी इस साल की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है. इम्युनिटी हमेशा से हम सबके शरीर में मौजूद रहती है, लेकिन इसे लेकर जितनी चर्चा कोविड 19 के दौर में हो रही है उतनी चर्चा शायद ही पहले कभी हुई हो.

Pandemic Fatigue से खुदको कैसे बचाएं?
इसके लिए आप कुछ नए तरह के व्यायाम अपना सकते हैं. खासकर ऐसे व्यायाम करें जिनमें सजगता की जरूरत होती है. जैसे योग और ताई ची. इसके अलावा अगर आप साइकिलिंग या वॉक करते हैं तो भी अपने मन को एकाग्र रखें और आसपास की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लें.

इसके अलावा आप अपने खान-पान में बदलाव करके और कुकिंग को अपने जीवन का हिस्सा बनाकर भी खुद को थकावट से बचा सकते हैं. लेकिन ध्यान रखें आप पौष्टिक भोजन ही खाएं.

इसके अलावा आप मेडिटेशन यानी ध्यान भी कर सकते हैं. खासकर प्राणायाम आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है.

आप याद करें कि कोविड 19 से पहले वो कौन से काम थे जिन्हें करने से आपको खुशी मिलती थी. अगर आप इस संकट से पहले कुकिंग, पुस्तकें पढ़ने, या फिर गार्डनिंग करने में दिलचस्पी रखते थे तो एक बार फिर इन आदतों को अपनाएं. 

सबसे जरूरी बात ये है कि आप अपनी नींद को लेकर सतर्क रहें. इसके लिए एक टाइम टेबल सेट कर लें. चाहे आप घर से काम कर रहे हों या नहीं आपको एक निश्चित समय पर सोना चाहिए और एक तय समय पर उठना चाहिए.