DNA ANALYSIS: आने वाले हैं रफाल, पाकिस्‍तान-चीन की नींद हराम

भारतीय वायुसेना का 18 वर्ष का इंतज़ार खत्म होगा और देश की सुरक्षा को नई मजबूती देने के लिए पांच रफाल लड़ाकू विमान भारत पहुंच जाएंगे. हवा में ईंधन भरने वाले ऐसे विमानों को Aerial refueling aircraft कहते हैं.  Aerial Refueling का रणनीतिक महत्व भी बहुत ज्यादा है. 

DNA ANALYSIS: आने वाले हैं रफाल, पाकिस्‍तान-चीन की नींद हराम

नई दिल्ली: बुधवार देश के लिए बड़ा दिन होने जा रहा है. कल भारतीय वायुसेना का 18 वर्ष का इंतज़ार खत्म होगा और देश की सुरक्षा को नई मजबूती देने के लिए पांच रफाल लड़ाकू विमान भारत पहुंच जाएंगे. ये विमान करीब 30 हज़ार फीट की ऊंचाई पर हवा में ही ईंधन भरने की क्षमता से लैस हैं. फ्रांस से UAE तक की 5 हज़ार किलोमीटर की यात्रा में 5 रफ़ाल लड़ाकू विमानों में एक से ज़्यादा बार ईंधन भरा गया. एक विमान से दूसरे विमान के अंदर हवा में ईंधन भरने की इस प्रक्रिया को Aerial Refueling कहा जाता है.

हवा में ईंधन भरने वाले ऐसे विमानों को Aerial refueling aircraft कहते हैं.  Aerial Refueling का रणनीतिक महत्व भी बहुत ज्यादा है. इसकी मदद से किसी भी विमान की उड़ान क्षमता बढ़ाई जा सकती है.उदाहरण के लिए रफ़ाल लड़ाकू विमान एक बार ईंधन भर लेने पर बिना रूके 3700 किलोमीटर तक जा सकता है. लेकिन Aerial Refueling की मदद से वह 5 हज़ार किलोमीटर तक की दूरी भी बिना रुके आसानी से तय कर सकता है. युद्ध जैसे हालात में Aerial Refueling की मदद से लड़ाकू विमान ज्यादा समय तक हवा में रह सकते हैं और दुश्मनों का मुकाबला कर सकते हैं. रफाल लड़ाकू विमान 10 घंटे तक लगातार उड़ सकता है. इस दौरान इस विमान में करीब 6 बार ईंधन भरने की ज़रूरत होती है. जिसे हवा में ही भरा जाता है.

आसमान से जमीन पर पड़ी गेंद जैसी वस्तु को भी देख सकता है रफाल में लगा कैमरा
रफाल लड़ाकू विमान में कुछ ऐसी खूबियां हैं, जिनके बारे में आप जानकर हैरान रह जाएंगे. इस विमान में एक टन यानी करीब एक हज़ार किलोग्राम वज़न का कैमरा लगा है. जो हज़ारों फीट की ऊंचाई से, नीचे ज़मीन पर पड़ी गेंद जैसे आकार वाली वस्तु को भी देख सकता है और उसकी फोटो खींच सकता है. रफाल की रफ्तार करीब 2 हज़ार 130 किलोमीटर प्रति घंटा है. यानी इस विमान की रफ्तार, आवाज़ की रफ्तार से दोगुनी है. इस विमान में परमाणु हमला करने की क्षमता भी है.

वजन से डेढ़ गुणा ज्यादा पेलोड ले जाने वाला दुनिया का पहला विमान है रफाल
रफाल विमान 55 हज़ार फीट की ऊंचाई से दुश्मन पर हमला करने में सक्षम है. ये एक बार में 16 टन बम और मिसाइल ले जा सकता है. ये दुनिया का इकलौता लड़ाकू विमान है. जो अपने वज़न से डेढ़ गुना ज़्यादा Payload ले जा सकता है. रफाल में लगा Multi-Directional Radar 100 किलोमीटर की रेंज में 40 से ज़्यादा टारगेट को एक साथ निशाने पर ले सकता है. इस विमान में एक मिनट के अंदर ढाई हज़ार गोले दागने की क्षमता है.

रफाल में तीन तरह की घातक मिसाइल के साथ 6 लेज़र गाइडेड बम भी फिट होते हैं. इन लेज़र गाइडेड बम में एक-एक बम की कीमत करीब 3 करोड़ रुपये तक होती है. सीरिया और इराक में ISIS के अड्डों पर रफाल के ज़रिए हमला करने के लिए इन्हीं बम का इस्तेमाल हुआ था.

रफाल की एक और खास बात ये है कि इसमें Integrated Self-Protection System लगा है. जिसे Spectra कहा जाता है. ये रफाल के रक्षा कवच के तौर पर काम करता है. ये दुश्मन के रडार को जाम कर सकता है और उसकी तरफ से आती मिसाइल के बारे में रफाल को अलर्ट कर देता है.

रूस ने चीन को दिया झटका, रोकी S-400 मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी
रफाल लड़ाकू विमानों के बाद अगले साल के आखिर तक Russia से भारत को S-400 मिसाइल सिस्टम भी मिलेगा. यानि कि भारतीय वायुसेना की ताकत का फिर कोई मुकाबला नहीं होगा. वैसे Russia के S-400 मिसाइल सिस्टम उसका नया दोस्त चीन भी खरीद रहा है. लेकिन इस दोस्ती में जासूसी की दीवार आ गई है. जिसके बाद Russia ने चीन को S-400 मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी delivery रोक दी है. ये Russia की तऱफ से चीन को बहुत बड़ा झटका है, क्योंकि इस वक्त जब चीन दुनिया भर में अकेला पड़ गया है. तब Russia ही उसका सबसे बड़ा दोस्त माना जाता है.

S-400 सबसे आधुनिक और सबसे ताकतवर anti-aircraft missile system है. जिसे हर तरह के विमानों और शक्तिशाली मिसाइलों के हमले को नाकाम करने और उन्हें नष्ट करने के लिए बनाया गया है. चीन ने Russia से S-400 मिसाइल सिस्टम का सौदा 2014 में किया था. ये सौदा करने वाला चीन दुनिया का पहला देश था. 2018 में इस मिसाइल सिस्टम की पहली खेप भी चीन को मिल गई थी. लेकिन अब Russia ने चीन को इस मिसाइल सिस्टम की आपूर्ति अनिश्चितकाल के लिए रोक दी है.  Russia के इस फैसले के पीछे चीन की जासूसी को वजह बताया गया. दरअसल Russia ने अपने यहां कुछ ऐसे लोगों को पकड़ा है. जो चीन को गोपनीय जानकारियां पहुंचा रहे थे. यानि कि जासूसी करने
के मामले में चीन ने अपने नए दोस्त Russia को भी नहीं छोड़ा.

हालांकि Russia की तरफ से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है. लेकिन चीन के मीडिया और सोशल मीडिया में ये कहा जा रहा है कि Russia ने S-400 मिसाइल सिस्टम की आपूर्ति को फिलहाल रोक देने का फैसला मजबूरी में किया है. याद रखने वाली बात यह है कि लद्दाख सीमा पर तनाव के बीच चीन ने रूस से भारत को हथियारों और सैन्य उपकरणों की आपूर्ति  न करने की अपील की थी. चीन का कहना था कि इस वक्त पर Russia को ऐसा नहीं करना चाहिए.

डिलीवरी रुक​ने के बावजूद चीन नहीं कर पा रहा नाराजगी का इजहार
लेकिन अब जब Russia ने चीन को S-400 मिसाइल सिस्टम की आपूर्ति रोक दी है, तो चीन इस बात से नाराज़ हो रहा है. लेकिन चीन को अब ये समझना चाहिए कि उसकी हरकतों से ही Russia जैसे देश भी उससे सामाजिक दूरी  बना रहे हैं। लद्दाख के मामले में भी रूस ने भारत और चीन में किसी का पक्ष नहीं लिया था. इसे भी एक तरह से भारत की कूटनीतिक जीत ही कहा जाएगा. जिस तरह से चीन, Russia का करीबी बन चुका था और अमेरिका, भारत के करीब आ गया है. उससे Russia, भारत के विरोध में भी बातें कर सकता था. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. Russia अब भारत को तय समय पर हथियारों की आपूर्ति कर रहा है और चीन को हथियारों की आपूर्ति फिलहाल रोक रहा है.

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