DNA ANALYSIS: दो महीनों से बंद है शाहीन बाग, प्रदर्शनकारियों पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का असर नहीं

15 दिसंबर 2019 को जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी और इसके आसपास के इलाकों में हिंसा हुई थी और इसी दिन शाहीन बाग में भी विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हुई थी. लेकिन ये प्रदर्शन पिछले 64 दिनों से चल रहे है और अब तक इसे खत्म नहीं कराया जा सका है. आज शाहीन बाग मामले पर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई लेकिन आज भी शाहीन बाग नहीं खुला.

DNA ANALYSIS: दो महीनों से बंद है शाहीन बाग, प्रदर्शनकारियों पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का असर नहीं

 

15 दिसंबर 2019 को जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी और इसके आसपास के इलाकों में हिंसा हुई थी और इसी दिन शाहीन बाग में भी विरोध प्रदर्शन की शुरुआत हुई थी. लेकिन ये प्रदर्शन पिछले 64 दिनों से चल रहे है और अब तक इसे खत्म नहीं कराया जा सका है. आज शाहीन बाग मामले पर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई लेकिन आज भी शाहीन बाग नहीं खुला. यानी सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रदर्शन को खत्म करने का कोई आदेश नहीं दिया. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में ये जरूर कहा कि लोगों को प्रदर्शन करने का अधिकार है लेकिन ये प्रदर्शन रोड जाम करके नहीं होना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि लोकतंत्र लोगों को दी गई अभिव्यक्ति की आजादी से ही चलता है लेकिन इसकी भी एक सीमा है और सड़क या सार्वजनिक स्थान को ब्लॉक करके विरोध-प्रदर्शन नहीं किया जा सकता और विरोध प्रदर्शन के नाम पर यातायात बंद नहीं किया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि सड़क जाम करके विरोध प्रदर्शन करने का विचार अगर और लोगों को भी आ गया तब क्या होगा?

सुनवाई के दौरान सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रदर्शनकारी इस तरह से शहर को बंधक नहीं बना सकते. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने की कोशिश की है और उन्हें लोगों को हो रही परेशानी के बारे में समझाया है. सॉलिसिटर जनरल ने शाहीन बाग के विरोध प्रदर्शन में महिलाओं और बच्चों को ढाल बनाए जाने का भी जिक्र किया.

सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तीन वार्ताकारों को नियुक्त किया है जो प्रदर्शनकारियों से बातचीत करेंगे और समस्या का हल निकालने की कोशिश करेंगे. इनमें वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े, पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह, और वरिष्ठ वकील साधना रामचंद्रन शामिल हैं. लेकिन कुल मिलाकर आज भी शाहीन बाग नहीं खुला. लोगों को उम्मीद थी कि दिल्ली चुनावों के नतीजे आने के बाद शाहीन बाग़ खुल जाएगा लेकिन अब इस मामले की अगली सुनवाई 24 तारीख को होगी और तब तक आम लोगों को शाहीन बाग के आसपास ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलने की कोई उम्मीद नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में भी प्रदर्शनकारियों से पूछा था कि वो अनंत काल के लिए एक सड़क को बंद करके कैसे रख सकते हैं और आज भी कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों को आम लोगों की परेशानी समझने के लिए कहा है कि लेकिन ऐसा लगता है कि शाहीन बाग अब एक ऐसी जगह बन चुका है जहां भारत सरकार और सुप्रीम कोर्ट के फैसले शायद लागू नहीं होते. आज जब शाहीन बाग़ को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई तो लोगों को उम्मीद थी कि सुप्रीम कोर्ट इस पर कोई सख्त फैसला लेगा और इस विरोध प्रदर्शन को खत्म करने का आदेश सुना देगा. लेकिन दिल्ली वालों की उम्मीदें आज एक बार फिर टूट गई क्योंकि अब इस मामले की अगली सुनवाई एक हफ्ते बाद होगी.ये प्रदर्शन शायद इसलिए खत्म नहीं हो रहा क्योंकि शाहीन बाग के पास जो सड़क पिछले दो महीनों से बंद है. उस सड़क से ना तो देश का कोई बड़ा नेता गुजरता है, ना पुलिस के बड़े अधिकारी इस सड़क से गुजरते हैं और ना ही सुप्रीम कोर्ट के जजों को इस रास्ते से गुजरना पड़ता है.

सुप्रीम कोर्ट से शाहीन बाग 12 किलोमीटर दूर है. गृहमंत्रालय से इसकी दूरी करीब 16 किलोमीटर है. दिल्ली पुलिस के मुख्यालय से शाहीन बाग 18 किलोमीटर दूर है और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर सिविल लाइंस से शाहीन बाग करीब 24 किलोमीटर है. शायद इसीलिए 64 दिन बीत जाने के बावजूद इस विरोध प्रदर्शन को खत्म कराने  के लिए अभी तक कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया है. कुल मिलाकर अगर इसी तरह से सुप्रीम में इस मामले की सुनवाई होती रही और कोई नतीजा नहीं निकला तो आने वाले दिनों में शाहीन बाग और इसके आसपास की सड़कों को सच में अनंत काल के लिए प्रतिबंधित करना पड़ सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने आज इस मामले पर जो बड़ी बातें कहीं उसके बारे में भी आपको जानना चाहिए. पहली बड़ी बात ये है कि विरोध के नाम पर सड़क जाम नहीं कर सकते. दूसरी बड़ी बात सुप्रीम कोर्ट ने ये कही कि कोर्ट की  चिंता ये है कि अगर हर कोई सड़क पर उतरेगा तो क्या होगा? तीसरी बड़ी बात ये है कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ये मुद्दा जनजीवन ठप करने से जुड़ा मुद्दा है. चौथी बड़ी बात ये है कि लोकतंत्र सबके लिए, लेकिन प्रदर्शन से किसी को परेशान नहीं होना चाहिए. पांचवीं बड़ी बात सुप्रीम कोर्ट ने ये कही है कि अगर ऐसे प्रदर्शन पूरे शहर में शुरू हो गए तो पूरी दिल्ली बंधक बन जाएगी. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि लोकतंत्र में भी अभिव्यक्ति की भी एक सीमा है. प्रदर्शन जारी रहा तो शहर के विभिन्न इलाके ब्लॉक हो जाएंगे. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि प्रदर्शन की वजह कितनी भी वाजिब हो. इसके लिए सड़क जाम करने की इजाजत नहीं दी जा सकती. लेकिन सवाल ये है कि अगर शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का असर नहीं होता तो फिर इन सारी टिप्पणियों का क्या अर्थ रह जाता है.