DNA ANALYSIS: सोशल मीडिया के जरिए कोई रख रहा आप पर नजर, हो जाएं सावधान

गूगल, फेसबुक, ट्विटर और वॉट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल हम सभी करते हैं. ये सभी मुफ्त होती हैं. हमें इनके लिए कोई पैसा नहीं देना होता. सिर्फ इंटरनेट डेटा का पैसा खर्च होता है. लेकिन यही वेबसाइट अब आपकी पसंद-नापसंद और आपके व्यवहार को नियंत्रित करने लगी हैं. 

DNA ANALYSIS: सोशल मीडिया के जरिए कोई रख रहा आप पर नजर, हो जाएं सावधान

नई दिल्ली: अमेरिकी लेखक और व्यंगकार Mark Twain ने कहा था- ‘A lie can travel half way around the world while the truth is putting on its shoes’ यानी जब तक सच अपने जूते पहन रहा होता है तब तक झूठ आधी दुनिया का चक्कर काट चुका होता है.

गूगल, फेसबुक, ट्विटर और वॉट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल हम सभी करते हैं. ये सभी मुफ्त होती हैं. हमें इनके लिए कोई पैसा नहीं देना होता. सिर्फ इंटरनेट डेटा का पैसा खर्च होता है. लेकिन यही वेबसाइट अब आपकी पसंद-नापसंद और आपके व्यवहार को नियंत्रित करने लगी हैं. आप उनके लिए प्रोडक्ट बन चुके हैं, जिसे इन कंपनियों ने खरीद लिया है. अब ये आपको बताती हैं कि आपको क्या खरीदना चाहिए, कहां घूमने जाना चाहिए और यहां तक कि किस राजनीतिक दल को वोट देना चाहिए.

गूगल, फेसबुक और ट्विटर जैसी कंपनियां देशों की राजनीतिक व्यवस्था में दखल देने लगी हैं. ये कंपनियां अगर चाहें तो किसी देश में चुनी हुई सरकार को गिराने की कोशिश कर सकती हैं. फेक न्यूज फैलाकर सरकारों के खिलाफ लोगों में एक नकली गुस्सा पैदा कर सकती हैं. हाल के दिनों में इसके ढेरों उदाहरण देखने को मिले हैं. नागरिकता कानून यानी CAA के खिलाफ इस साल के शुरू में हुई हिंसा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है.

अक्सर हम सोचते हैं कि गूगल एक सर्च इंजन है और फेसबुक दोस्तों से जुड़ने और उनके साथ फोटो शेयर करने का माध्यम. अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो आज हम आपको जो कुछ बताने जा रहे हैं उसके बाद आपकी राय बदल जाएगी.

फेसबुक पर फेक न्यूज फैलाने का आरोप
पूरे विश्व में ये बहस चल रही है कि क्या फेसबुक और ट्विटर किसी खास पार्टी और विचारधारा के पक्ष में काम कर रहे हैं? इसी महीने की शुरुआत में संसद की स्थायी समिति ने फेसबुक के इंडिया हेड अजित मोहन को बुलाया था. इस बैठक में कुछ सांसदों ने फेसबुक से कई सवाल पूछे और आरोपों पर सफाई मांगी गई. बैठक में जो बातें सामने आईं वो आपको जानना चाहिए.

- इसके अनुसार 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले फेसबुक ने कांग्रेस से जुड़े लगभग 700 पेज डिलीट कर दिए. लेकिन इनके कुल फॉलोअर्स की संख्या मात्र 2 लाख के लगभग थी.

- जबकि इसी दौरान फेसबुक ने BJP का समर्थन कर रहे 15 पेज को हटाया, लेकिन इनके फॉलोअर्स की संख्या 26 लाख के करीब थी.

- भारत में फेसबुक पर पोस्ट की जा रही खबरों के फैक्ट चेक के लिए कुछ बाहरी एजेंसियों की सहायता ली जाती है, लेकिन वो भी एक खास विचारधारा से जुड़ी हुई हैं. इन एजेंसियों के कुछ लोग राजनीतिक दलों से भी जुड़े हैं.

- यह भी पाया गया है कि फेसबुक के लिए फैक्ट चेक करने वाले खुद ही कई बार फेक न्यूज फैलाते हैं. लोकसभा चुनाव से पहले देश में नए हवाई अड्डों को लेकर ऐसी ही एक अफवाह फेसबुक के फैक्ट चेकर ने फैलाई थी. तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि पिछले 4 साल में 35 एयरपोर्ट बनाए गए हैं, लेकिन फेसबुक की तरफ से नियुक्त फैक्ट चेक वेबसाइट ने इसे गलत दावा बता दिया और कहा कि सिर्फ 7 नए हवाई अड्डे ही बनाए गए हैं. इस पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बयान जारी करके सारे तथ्य रख दिए थे. यानी जिन पर फेसबुक फैक्ट चेक के लिए भरोसा करता है, उनका फैक्ट ही गलत निकला.

- यह भी देखा जा रहा है कि फेसबुक एक खास विचारधारा के नेताओं के हेट स्पीच वाले भाषण बार-बार अनुरोध के बाद भी नहीं हटाता. जिनमें असदुद्दीन ओवैसी और कन्हैया कुमार के भाषण भी शामिल हैं.

- कुछ सांसदों के इन आरोपों के जवाब फेसबुक के अधिकारियों से मांगे गए हैं और अभी इसका इंतजार है कि वो क्या जवाब देते हैं.

फेसबुक में काम करने वालों का बैकग्राउंड 
यहां आपको जानना चाहिए कि भारत में फेसबुक कंपनी में काम करने वालों का बैकग्राउंड क्या है? हम यहां बताना चाहते हैं कि ये जानकारी संसद की स्थायी समिति की बैठक में रखी गई है.

- फेसबुक इंडिया के एमडी अजित मोहन UPA सरकार के समय योजना आयोग में काम करते थे. वो UPA सरकार में ही शहरी विकास मंत्रालय में भी काम कर चुके हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अजित मोहन को फेसबुक का एमडी बनाया गया.

- इसके बाद बात करते हैं फेसबुक की पब्लिक पॉलिसी टीम के सिद्धार्थ मजूमदार की. सिद्धार्थ मजूमदार सोनिया गांधी और अहमद पटेल के बहुत करीबी बताए जाते हैं.

- फेसबुक में काम करने वाली कविता KK विपक्षी दल के एक सांसद के साथ 2015 से 2017 के बीच काम कर चुकी हैं.

- मनीष खंडूरी, फेसबुक के न्यूज पार्टनरशिप हेड रह चुके हैं, उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले फेसबुक छोड़ा और कांग्रेस के टिकट पर उत्तराखंड की गढ़वाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा.

सोशल मीडिया का हम पर असर
क्या सोशल मीडिया हमारे व्यक्तित्व और सोचने के तरीके को बदल रहा है? गूगल, फेसबुक और ट्विटर जैसी कंपनियों के कुछ शुरुआती कर्मचारियों ने बताया है कि उन्होंने जो सोचकर इन्हें बनाया था वो कुछ और ही बन गया है.

- वेबसाइट्स के इन पूर्व कर्मचारियों ने जो कुछ बताया है उसके आधार पर एक डॉक्यूमेंट्री भी बनाई गई है।
- इस डॉक्यूमेंट्री में पूर्व कर्मचारियों का कहना है कि इंटरनेट कंपनियां आप पर हर समय नजर रखती हैं.
- आप क्या पढ़ते हैं, क्या देखते हैं और कितनी देर तक देखते हैं, ये सारा डेटा रिकॉर्ड किया जाता है.
- ये कंपनियां जानती हैं कि आप कब किस मूड में हैं. कब खुश हैं और कब आप परेशान हैं.
- इतना ही नहीं, वो यह भी जानती हैं कि आपकी निजी जिंदगी में क्या चल रहा है और आप किन लोगों से मिलते-जुलते हैं.
- जब वो इसका अनुमान लगा लेते हैं तो आपके व्यवहार को बदलने की कोशिश भी कर सकते हैं.
- करोड़ों लोगों की जानकारी रखने के लिए गूगल, फेसबुक और ट्विटर जैसी कंपनियों ने बड़े-बड़े डेटा सेंटर बनाए हैं.
- ये सारा काम बहुत जिस टेक्नोलॉजी से किया जाता है उसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) या AI कहा जाता है.

कंप्यूटर कैसे इंसानी दिमाग को कंट्रोल कर सकता है? 
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर कंप्यूटर इंसानों के दिमाग को कैसे पढ़ सकता है और कैसे उसे कंट्रोल कर सकता है? दरअसल इसके लिए जो शब्द इस्तेमाल किया जाता है उसे एल्गोरिदम कहते हैं. जब आप किसी एक खास तरह के वीडियो या फोटो को देखते हैं तो इंटरनेट कंपनियों को पता चल जाता है कि आप क्या देखना पसंद करते हैं. वो आपको उसी तरह की फोटो और वीडियो दिखाने की कोशिश करते हैं. यही वो समय होता है जब आप एक जाल में फंसते जाते हैं जब आपके दिमाग और पसंद-नापसंद पर धीरे-धीरे गूगल या फेसबुक जैसी कंपनियों का कब्जा होता जाता है. उनके पास आपसे जुड़ी हर छोटी-छोटी जानकारी होती है जिसके आधार पर वो आपकी सोच में बदलाव करते जाते हैं.

सोशल मीडिया कंपनी के तीन प्रमुख लक्ष्य
- पहला लक्ष्य है Engagement यानी आपको सोशल मीडिया की आदत डालना
- इसके बाद आता है ग्रोथ का लक्ष्य, इसमें वो कंपनी आपको ही अपने विस्तार का माध्यम बनाती है. आप अपने दोस्तों के साथ एक नेटवर्क बनाते हैं और धीरे-धीरे नए दोस्त इसमें जुड़ते जाते हैं.
- फिर आता है रेवेन्यू यानी आपके जरिए कमाई करना. इसमें कोई इंटरनेट कंपनी आपको विज्ञापन दिखाकर कमाई कर रही होती है.
- तीसरी स्टेज तक आते-आते आपके व्यवहार को फेसबुक जैसी कंपनियां पूरी तरह कंट्रोल में ले चुकी होती हैं. इसे आप इंसान के दिमाग की हैकिंग कह सकते हैं.

कैसे पैसे कमाती हैं सोशल मीडिया कंपनियां
शायद आप भी ये सोचते होंगे कि इंटरनेट पर मौजूद ये सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए आप पैसे नहीं चुकाते हैं. यानी फेसबुक, वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम जैसी सर्विसेज आपके लिए फ्री हैं. लेकिन सच्चाई ये है कि अलग-अलग एडवर्टाइजर्स इन कंपनियों को पैसा देते हैं.

- सिर्फ 60 सेकेंड में पूरी दुनिया में 3 लाख और भारत में करीब 30 हजार फेसबुक पोस्ट्स शेयर किए जाते हैं.
- बहुत से फेसबुक यूजर्स बिना सोचे विचारे या अनजाने में फेक न्यूज को भी आपस में शेयर करते हैं और उससे भी फेसबुक की कमाई होती है.
- डेटा को अब दुनिया में नया Oil कहा जाता है. ये एक ऐसा प्रोडक्ट है जिसकी मांग लगातार बढ़ रही है. वर्ष 2019 में भारत में फेसबुक ने 892 करोड़ और गूगल ने 4 हजार करोड़ से अधिक का बिजनेस किया.
- फेसबुक का नेट वर्थ 10 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा है. वर्ष 2020 में भारत का रक्षा बजट करीब 3 लाख 37 हजार करोड़ रुपए है और ये उससे भी तीन गुना ज्यादा है.
- इसी तरह गूगल का नेट वर्थ 46 लाख करोड़ रुपए से अधिक है. भारत की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 146 लाख करोड़ रुपए है. यानी गूगल जैसी तीन कंपनियां भारत की अर्थव्यवस्था के बराबर हैं.
- आप कह सकते हैं कि इन कंपनियों में मौजूद सुपर कंप्यूटर्स में आपसे जुड़ी इतनी जानकारी है जितना शायद आपको भी अपने बारे में पता नहीं होगा.

सोशल डिस्टेंसिंग ने बढ़ाया सोशल मीडिया यूसेज
इस समय Covid-19 के संक्रमण की वजह से पूरी दुनिया में लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं. इसलिए सोशल मीडिया पर लोग एक दूसरे के करीब आ रहे हैं.
- भारत के लोगों का सबसे पसंदीदा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक है. जिसके 35 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं. यानी भारत में हर चौथा व्यक्ति फेसबुक का इस्तेमाल करता है.
- भारत में फेसबुक यूजर्स की संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा है और अनुमान है कि वर्ष 2023 तक ये यूजर्स बढ़कर 45 करोड़ हो जाएंगे.
- एक आम भारतीय हर दिन औसतन 3 से 4 घंटे सोशल मीडिया का इस्तेमाल करता है और ये भी दुनिया में सबसे अधिक है. यहां सोशल मीडिया का मतलब फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम से है.
- वर्ष 2019 और 2020 में 73 प्रतिशत फेसबुत यूजर्स की उम्र 18 से 24 वर्ष के बीच थी.
- फेसबुक के बाद भारत के लोगों का दूसरा सबसे पसंदीदा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वॉट्सऐप है. जिसके 30 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं. तीसरे नंबर पर इंस्टाग्राम है जिसको करीब 10 करोड़ लोग इस्तेमाल करते हैं.
(Source- Data Reportal)

- मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है जिसे लोगों से मिलना जुलना, बातें करना और शेयर करना पसंद है. एक रिसर्च के मुताबिक ट्विटर पर फेक न्यूज की रफ्तार सच्ची खबरों से 6 गुना ज्यादा तेज होती है. फेक न्यूज फैलाने में इंसानों की रफ्तार रोबोट्स से भी ज्यादा होती है और अगर ये फेक न्यूज राजनीति से जुड़ी हो तो इसकी रफ्तार और बढ़ जाती है.
(Source - Massachusetts Institute of Technology की रिसर्च)

नौजवानों के लिए ड्रग्स की तरह है सोशल मीडिया
नौजवान पीढ़ी के लिए सोशल मीडिया एक तरह से ड्रग्स का काम कर रहा है. वर्ष 2012 के बाद अमेरिका में आत्महत्या के के मामलों में भारी तेजी आई है. इसके लिए सोशल मीडिया को बड़ा जिम्मेदार माना जाता है. क्योंकि यही वो समय था जब 10 साल से 19 साल की उम्र के बीच के ज्यादातर नौजवान पहली बार सोशल मीडिया से परिचित हुए थे.

इस शताब्दी के पहले दशक के मुकाबले दूसरे दशक यानी 2010 से 2020 के बीच अमेरिका में आत्महत्या की दर में 70 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है. इनमें बड़ी संख्या 10 से 19 साल की लड़कियां हैं. यह देखा जा रहा है कि सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा खतरा इसी उम्र के बच्चों पर है. क्योंकि वो एक सोशल मीडिया आइडेंटिटी को जीने लगते हैं में और उनके लिए दूसरों के लाइक्स और कॉमेंट्स बहुत महत्वपूर्ण होने लगते हैं. मनोवैज्ञानिकों के अनुसार कम उम्र में बच्चों के दिमाग पर सोशल मीडिया बहुत बुरा असर डाल रहा है.

इन 5 बातों का रखें ध्यान
ऐसे में ये सवाल उठ रहे हैं कि क्या सोशल मीडिया के लिए आचार संहिता बनाई जानी चाहिए. अगर आप सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं तो आपको इन 5 बातों का ध्यान रखना चाहिए.

- बहुत जरूरी न हो तो अपने सारे नोटिफिकेशंस OFF करके रखें.
- गूगल के अलावा दूसरे सर्च इंजन का भी इस्तेमाल करें.
- कभी भी किसी वीडियो को देखने के बाद सजेस्टेड वीडियो न देखें.
- बिना कारण किसी पोस्ट को लाइक और शेयर नहीं करना चाहिए.
- फेसबुक और ट्विटर को ये अनुमान न लगाने दें कि आपकी विचारधारा क्या है, इसके लिए कुछ विपरीत विचारधारा के लोगों को भी फॉलो करें.