DNA ANALYSIS: पिछले एक माह में देश में 231 गुना बढ़े कोरोना के मामले, नए आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

भारत में 694 लोगों कोरोना वायरस की पुष्टि हो चुकी है. 26 फरवरी को भारत में सिर्फ 3 मामले थे. लेकिन एक महीने में संक्रमण के मामले 231 गुना बढ़ चुके हैं. महाराष्ट्र और केरल में संक्रमित लोगों का आंकड़ा देश में सबसे ज्यादाहै. यहां 100 से ज्यादामामले आ चुके हैं. पूरे देश में अब तक 16 लोगों की मौत हुई है. 42 लोग इलाज के बाद ठीक हो गए हैं. अब आपको दुनिया का हाल भी बता देते हैं.

DNA ANALYSIS: पिछले एक माह में देश में 231 गुना बढ़े कोरोना के मामले, नए आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

आज लॉकडाउन का दूसरा दिन हैं हम उम्मीद करते हैं कि आप सब स्वस्थ होंगे, कुशल मंगल होंगे और सुरक्षित होंगे लेकिन आज भारत में कोरोना वायरस को लेकर कुछ नए आंकडे आए हैं जिसने सबकी चिंता बढ़ा दी है. भारत में आज इस वायरस के 88 नए मामले सामने आए हैं और ये भारत में इस महामारी का अब तक का सबसे बड़ा जंप है.

भारत में 694 लोगों कोरोना वायरस की पुष्टि हो चुकी है. 26 फरवरी को भारत में सिर्फ 3 मामले थे. लेकिन एक महीने में संक्रमण के मामले 231 गुना बढ़ चुके हैं. महाराष्ट्र और केरल में संक्रमित लोगों का आंकड़ा देश में सबसे ज्यादाहै. यहां 100 से ज्यादामामले आ चुके हैं. पूरे देश में अब तक 16 लोगों की मौत हुई है. 42 लोग इलाज के बाद ठीक हो गए हैं. अब आपको दुनिया का हाल भी बता देते हैं.

दुनिया के 195 देशों तक ये वायरस फैल चुका है. 4 लाख 80 हजार से भी ज्यादा लोग इससे संक्रमित हैं. 22 हजार से भी ज्यादाजानें जा चुकी हैं. इटली में सबसे ज्यादासाढ़े 7 हजार मौत हुई हैं. दूसरे नंबर पर स्पेन है, जहां 24 घंटे में साढ़े 600 से ज्यादालोग मारे गए. मौत के आंकड़े के मामले में स्पेन अब चीन से आगे निकल गया है. पूरे चीन में लगातार दूसरे दिन घरेलू संक्रमण का कोई नया केस नहीं आया. अमेरिका में एक दिन में 13 हजार नए मामले आ गए, वहां एक हजार से भी ज्यादालोगों की मौत हो चुकी है. रूस में पिछले 24 घंटे में 182 नए मामले आ गए, जिससे मॉस्को में एक हफ्ते के लिए लॉकडाउन कर दिया गया.

बड़े शहरों से गांवों की तरफ पलायन जारी
भारत में 21 दिन के लॉक डाउन का आज दूसरा दिन है. अधिकतर लोग लॉकडाउन वाली लक्ष्मण रेखा को समझ तो रहे हैं लेकिन सब जगह इसका पालन नहीं हो रहा है. एक बड़ी संख्या उन लोगों की है, जो नासमझी की वजह से बाहर निकल रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि जो जहां पर है, उसे वहीं पर रहना चाहिए. लेकिन जब से लॉकडाउन का ऐलान हुआ, तब से बड़े शहरों से गांवों की तरफ पलायन हो रहा है. ट्रेन और बस बंद हैं, तो ये लोग परिवार के साथ पैदल ही अपने अपने शहरों और गांवों की तरफ जा रहे हैं. दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों से वापस जा रहे ऐसे लोगों की तस्वीरें लगातार आ रही हैं. इनमें बड़ी संख्या में दिहाड़ी मजदूर हैं. जिनकी अपनी मजबूरियां भी हैं, कि ये लोग कहां रहेंगे और कैसे गुज़ारा करेंगे. ऐसे लोगों के बारे में हमें सोचना होगा.

1.7 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का ऐलान
ये संकटकाल है, जिसका सामना हम सबको मिलकर करना है. केंद्र सरकार ने आज लॉकडाउन से लड़ने की ताकत देने लिए 1 लाख 70 हजार करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया है. ये पैकेज खासतौर पर गरीबों और कमज़ोर वर्ग के लोगों के लिए है. सरकारी राशन की दुकानों में तीन महीने के लिए मुफ्त अनाज मिलेगा. इनमें 5 किलो गेहूं या चावल के साथ एक किलोग्राम दाल दी जाएगी. 8 करोड़ किसानों को अप्रैल के पहले हफ्ते में 2 हजार रुपये दिए जाएंगे. 20 करोड़ महिलाओं के जनधन खाते में 3 महीने तक 500 रुपये दिए जाएंगे. गरीब परिवार की महिलाओं को तीन महीने तक मुफ्त में 3 गैस सिलेंडर मिलेंगे. बुज़ुर्गों, विधवाओं और दिव्यांग जनों को अगले 3 महीने में 1000 रुपये मिलेंगे. मनरेगा के तहत दैनिक मजदूरी को 182 रुपये से बढ़ाकर 202 रुपये किया गया. निर्माण कार्य में लगे मजदूरों की देखभाल के लिए 31 हजार करोड़ रुपये रखे गए हैं. जिनकी सैलरी 15 हजार रुपये से कम है, उनके पीएफ की रकम भी तीन महीने तक सरकार देगी

कोरोना वायरस से पूरी दुनिया को खतरा
कोरोना वायरस पूरी दुनिया का खतरा है. मानवता के लिए खतरा है. इस वायरस से किस तरह लड़ा जाए. इन सवालों के साथ आज जी-20 के देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने वीडियो कॉन्फ्रेंस की . इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-20 देशों के नेताओं से कहा है कि लोगों की जान बचाने के लिए एक ठोस योजना बनाने की ज़रूरत है और कमज़ोर वर्ग के लोगों को मुसीबत से निकलाने की ज़रूत है. प्रधानमंत्री ने कहा कि इस संकट से हजारों लोगों की जान चली गई है. चिंता की बात ये है कि इसकी सामाजिक और आर्थिक कीमत चुकानी पड़ रही है. प्रधानमंत्री ने कहा कि जी-20 देश 2008 के आर्थिक संकट से निपटने के लिए सबसे प्रमुख मंच बना था. जिससे आर्थिक स्थिरता और विकास दर फिर से लौटी थी. प्रधानमंत्री ने ये भी कहा कि कई मामलों में ग्लोबलाइजेशन ने हमें फेल किया है चाहे वो जलवायु परिवर्तन हो या फिर आतंकवाद हो- प्रधानमंत्री ने कहा है कि कोरोना वायरस ने हमें मौका दिया है कि हम ग्लोबलाइजेशन को नए नज़रिए से देखें. 

DNA वीडियो:

कोरोना संकट से लड़ने के लिए साथ जी-20 देश
कोरोना संकट से लड़ने के लिए जी-20 देशों ने मिलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था में 5 लाख करोड़ डॉलर के निवेश का फैसला किया है. सभी राष्ट्राध्यक्ष इस बात पर सहमत हुए कि इस संकट से हजारों लोगों की जान जाना एक बड़ी त्रासदी है और ये सामाजिक और आर्थिक रुप से बेहद चिंताजनक स्थिति है. G-20 देश मिलकर दुनिया की 80 प्रतिशत अर्थव्यवस्था बनाते हैं और दुनिया की 60 फीसदी जनसंख्या इन देशों में रहती है और यही देश अब कोरोना के सबसे बड़े पीड़ित हैं जहां कोरोना के 90 प्रतिशत मामले इन्हीं देशों में सामने आ रहे हैं. दुनिया में कोरोना से मौतों के 88 प्रतिशत केस भी G-20 देशों में ही हुए हैं. 

जो लोग नासमझी में घर से बाहर निकल रहे हैं या मजबूरी में अपने गांवों की तरफ जा रहे हैं. उनकी नासमझी और मजबूरी तो एक बार समझ में भी आती है. लेकिन कई लोग ऐसे भी हैं, जिनका जीवन वैसे ही चल रहा है, जैसे पहला चल रहा था. इनकी कोई मजबूरी भी नहीं है और इन्हें लॉकडाउन की कोई परवाह भी नहीं है. हम आपको देश के अलग अलग हिस्सों की कुछ तस्वीरें दिखाते हैं. ये दिल्ली के बाटला हाउस और शाहीन बाग की तस्वीरें हैं. लोग सड़कों पर हैं. दुकानें खुली हैं. कोरोना वायरस से लड़ने के लिए पूरा देश लॉकडाउन है लेकिन ऐसा लगता है कि ये लोग दिमागी लॉकडाउन में हैं.