DNA Analysis: आज हम उस खतरे के बारे में बात करेंगे, जिससे हमारा-आपका सामना रोज होता है. हालांकि हमारे बीच के ही कुछ लोग इसे खतरा नहीं मानते लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया है कि ये खतरा है और सरकारों का दायित्व है कि वो इस खतरे से आम लोगों को बचाएं. स्ट्रे डॉग्स को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज बड़ा फैसला दिया और डॉग लवर्स से बड़े सवाल भी किए.
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DNA: सबसे पहले आपको बताते हैं कि आज स्ट्रे डॉग्स को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा, कोर्ट ने कहा कि अगर कोई बच्चा या बुजुर्ग स्ट्रे डॉग्स के काटने से जख्मी होता है या उसकी मौत हो जाती है तो राज्य सरकारें मुआवजा देंगी. क्योंकि राज्य सरकारों ने 5 साल से नियमों को लागू करने के लिए कुछ नहीं किया है. स्ट्रे डॉग्स को खाना खिलाने वालों की जिम्मेदारी तय की जाएगी. अगर आपको इन जानवरों से इतना प्यार है, तो इन्हें अपने घर क्यों नहीं ले जाते. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि डॉग्स में खतरनाक वायरस होता है जिसका इलाज नहीं है.
सरल शब्दों में कहें तो कोर्ट ने साफतौर पर कहा है कि डॉग्स खतरनाक होते हैं, स्ट्रे डॉग्स को कंट्रोल करना सिस्टम यानी सरकार की जिम्मेदारी है. इसलिए डॉग बाइट पर मुआवजा राज्य सरकार देगी और जो डॉग लवर्स हैं उन्हें अगर जिम्मेदारी दिखानी है तो वो स्ट्रे डॉग्स को अपने घर ले जाएंगे. इस श्वान विमर्श में आज सुप्रीम कोर्ट ने एक और बहुत बड़ी बात कही. स्ट्रे डॉग्स को लेकर जो लोग मानवता वाली थ्योरी को आगे बढ़ाते हैं, उनसे आज सुप्रीम कोर्ट ने अहम सवाल पूछा. डॉग लवर्स की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि स्ट्रे डॉग्स का मामला एक भावुक मुद्दा है. इसपर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की, कोर्ट ने कहा कि ये भावुकता सिर्फ डॉग्स के लिए ही क्यों दिखाई पड़ती है. इंसानों के लिए भावुकता क्यों नहीं दिखाई देती है.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ?
स्ट्रे डॉग्स को गोद लेने के सुझाव पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सड़क पर रहनेवाले अनाथ बच्चों को गोद लेने की बात क्यों नहीं होती है. जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि अब तक किसी ने इंसानों के लिए इतनी लंबी बहस नहीं की. इस मामले में अगली सुनवाई अब 20 जनवरी को होगी. समझिए कोर्ट ने आज साफ कर दिया कि स्ट्रे डॉग्स के खतरे को अनदेखा नहीं किया जा सकता है. हालांकि खाए-पिए और अघाए हुए एक खास मानसिकता वाले लोग स्ट्रे डॉग्स के लिए प्रेम दिखाते हैं. बेशक अपनी महंगी गाड़ी में चलने वाले इन लोगों के लिए स्ट्रे डॉग्स खतरा नहीं होंगे. लेकिन सड़क पर गली मुहल्ले में पैदल चलने वाले आम आदमी के लिए ये बड़ा खतरा हैं. ऐसा खतरा हैं कि आम आदमी एक दिन में कई बार इस खतरे का सामना करता है.
भारत में कितने कुत्ते?
रिपोर्ट के मुताबिक भारत में डॉग्स की संख्या करीब 9 करोड़ 50 लाख है. इनमें से करीब 4 करोड़ पालतू डॉग्स हैं और करीब 5 करोड़ 50 लाख स्ट्रे डॉग्स हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत के करीब 13 प्रतिशत घरों में पेट डॉग्स हैं. इन आकंड़ों को ध्यान से समझिए. देश में करीब 31 करोड़ परिवार हैं, उनमें से करीब 13 प्रतिशत यानी करीब 4 करोड़ घरों में पेट डॉग्स हैं और आबादी के लिहाज से देंखे तो भारत में हर 15 आदमी पर एक डॉग है और सुनिए जो लोग डॉग्स को लेकर आंसू बहाते हैं, जिनकी भावना डॉग्स को लेकर उफान मारती है उनकी पंसद आप जानेंगे तो आश्चर्यचकित हो जाएंगे. डॉग्स पालनेवाले 30% लोग जर्मन शेफर्ड, 23% लोग लैब्राडोर रिट्रीवर, 7% बुलडॉग, 7% गोल्डन रिट्रीवर पालते हैं.
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कौन सी नस्ल के कुत्ते लोकप्रिय?
इतना ही नहीं कई लोग पिटबुल, रॉटवाइलर, जापानीज तोसा, डॉगो अर्जेंटीनो जैसे शिकारी नस्ल के डॉग्स पालते हैं. समझिए जब डॉग्स पालने की बारी आती है तो ये डॉग लवर्स विदेशी नस्ल को चुनते हैं. क्योंकि ये इनके लिए स्टेट्स सिंबल होता है. ये विदेशी नस्ल के डॉग्स को घर में रखते हैं. लेकिन प्रेम दिखाते हैं सड़क पर घूमते भारतीय नस्ल के स्ट्रे डॉग्स पर. हालांकि उन्हें घर में नहीं रखते हैं. यही स्ट्रे डॉग्स आम लोगों को काटते हैं और जब कोर्ट इन्हें खतरा बताता है तो ये श्वान प्रेमी विलाप करने लगते हैं.