DNA ANALYSIS: यूरोप कट्टरपंथी इस्लाम का शिकार क्यों हो रहा है?

ऑस्ट्रिया (Austria) में आतंकवादी हमला (Terror Attack) क्यों हुआ इसकी जांच की जा रही है. लेकिन माना जा रहा है कि ये आतंकवादी हमला भी फ्रांस (France) में हुए हमलों की तर्ज पर ही हुआ है और इसके पीछे भी इस्लाम (Islam) की वही कट्टर सोच जिम्मेदार है, 

DNA ANALYSIS: यूरोप कट्टरपंथी इस्लाम का शिकार क्यों हो रहा है?

नई दिल्ली: यूरोप (Europe) के देश ऑस्ट्रिया (Austria) की राजधानी विएना में एक बड़ा आतंकवादी हमला (Terror Attack) हुआ है. इस हमले को विएना में 6 अलग-अलग जगहों पर अंजाम दिया गया और इस हमले में अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है, मरने वालों में दो पुरुष और दो महिलाएं शामिल हैं. विएना की पुलिस ने हमला करने वाले एक आतंकवादी को भी मार गिराया है. घायलों की संख्या 15 है जिनका विएना (Vienna) के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है और इनमें से कम से कम 7 घायलों की स्थिति गंभीर बनी हुई है. आशंका जताई जा रही है इस हमले में एक से ज्यादा आतंकवादी (Terrorists) शामिल थे और विएना की पुलिस अब तक कम से कम 4 संदिग्धों को गिरफ्तार कर चुकी है. पुलिस को हमले में कुछ और लोगों के भी शामिल होने की आशंका है. जिनकी तलाश की जा रही है. ऑस्ट्रिया के गृह मंत्री ने देश के नागरिकों से कहा है कि लोग घरों पर ही रहें और अगर कोई बहुत जरूरी काम हो तभी बाहर निकलें.

'देश के लिए एक मुश्किल समय'
ऑस्ट्रिया की सरकार ने भी इसे एक इस्लामिक आतंकवादी हमला माना है और ऑस्ट्रिया के चांसलर Sebastian Kurz (सेबेस्टियन कुर्ज़) ने कहा है कि ये उनके देश के लिए एक मुश्किल समय है. लेकिन वो हार नहीं मानेंगे और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे. समय के हिसाब से भारत ऑस्ट्रिया से साढ़े चार घंटे आगे हैं. ये हमला ऑस्ट्रिया के समय के मुताबिक 2 नवंबर की शाम को करीब साढ़े सात बजे हुआ था. यानी तब भारत में रात के 12 बज रहे थे. विएना की जिन 6 जगहों पर इस हमले को अंजाम दिया गया उनमें एक यहूदी प्रार्थना स्थल भी शामिल हैं और इसलिए इसे कुछ लोग कट्टर इस्लामिक आतंकवादियों का यहूदियों के खिलाफ किया गया हमला भी बता रहे हैं.

सोशल मीडिया पर इस आतंकवादी हमले की कई तस्वीरें वायरल हो रही हैं. इन तस्वीरों में आतंकी खुली सड़क पर लोगों के ऊपर गोलियां बरसा रहा है. कहा जा रहा है कि वीडियो में आतंकी जिन दो लोगों पर गोली चला रहा है वो दोनों पुलिस वाले थे.

लॉकडाउन होने से पहले घरों से बाहर निकले थे लोग
कोरोना वायरस (Coronavirus) के फैलाव को रोकने के लिए ऑस्ट्रिया में 2 नवंबर की आधी रात से एक बार फिर लॉकडाउन (Lockdown) लगाया गया. विएना के लोग इस लॉकडाउन के लागू होने से पहले बड़ी संख्या में सड़कों पर निकले थे और अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ समय बिता रहे थे. लेकिन लॉकडाउन लगने से साढ़े 4 घंटे पहले ही ऑस्ट्रिया की सड़कों पर अफरातफरी मच गई. गोलियों की आवाज सुनकर शुरू में लोगों को लगा कि आतिशबाजी की जा रही है लेकिन थोड़ी देर में लोगों को समझ आ गया कि ये एक आतंकवादी हमला है.

इस हमले के बाद यहूदी प्रार्थना स्थल के पास करीब 1 हजार पुलिस वाले इकट्ठा हो गए और उन्होंने आतंकवादियों को घेरने की कोशिश की. पुलिसकर्मियों ने एक आतंकवादी को मार गिराया गया जबकि बाकी संदिग्धों की तलाश अभी जारी है.

इस बीच विएना की पुलिस द्वारा एक संदिग्ध आतंकवादी का मोटरसाइकिल पर पीछा करने की तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं.

बहुत सारे लोगों ने इस अफरा तफरी और आतंक को अपने घरों की छत से मोबाइल फोन के कैमरे से रिकॉर्ड किया.

फिलहाल पूरे ऑस्ट्रिया में सेना की तैनाती कर दी गई है और लोगों से सतर्कता बरतने के लिए कहा जा रहा है.

फ्रांस और विएना में हुए हमले में क्या फर्क है?
पिछले गुरुवार को फ्रांस में पेरिस के पास नीस नाम के शहर में भी आतंकवादी हमला हुआ था जिसमें तीन लोग मारे गए थे. फर्क सिर्फ इतना था कि फ्रांस में हमलावर के हाथ में चाकू था और वह लोगों का सिर कलम कर रहा था, जबकि विएना के आतंकवादी के हाथ में राइफल और पिस्टल थी और वो लोगों पर अंधाधुंध फायरिंग कर रहा था. यानी कट्टरपंथ वही है, नारा वही है, सोच वही है, बस इस बार हथियार अलग है.

पूरी दुनिया में इस आतंकवादी हमले की निंदा हो रही है. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की है और कहा है कि इस मुश्किल घड़ी में भारत ऑस्ट्रिया के साथ खड़ा है. ऑस्ट्रिया के चांसलर ने भी एक ट्वीट करके प्रधानमंत्री मोदी और भारत को शुक्रिया कहा है.

यूरोप के सभी देशों ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
ऑस्ट्रिया मध्य यूरोप का एक छोटा सा देश है जिसकी सीमाएं जर्मनी, इटली और हंगरी जैसे देशों से लगती हैं. इस हमले के बाद यूरोप के सभी देशों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्वीट करके कहा है कि इस दुख की घड़ी में वो ऑस्ट्रिया के लोगों के साथ हैं.

आतंकवाद से लड़ने की जिम्मेदारी अब दो सबसे युवा नेताओं के ऊपर
इमैनुएल मैक्रों सिर्फ 42 वर्ष के हैं, जबकि ऑस्ट्रिया के चांसलर सेबेस्टियन कुर्ज़ सिर्फ 34 वर्ष के हैं. जिस तरह भारत में प्रधानमंत्री का पद होता है उसी तरह ऑस्ट्रिया और जर्मनी जैसे देशों में सरकार का नेतृत्व चांसलर करते हैं. यानी यूरोप में कट्टर इस्लामिक आतंकवाद से लड़ने की जिम्मेदारी अब दो सबसे युवा नेताओं के ऊपर आ गई है और दुनिया चाहे तो इन दोनों . युवा नेताओं से बहुत कुछ सीख सकती है. इसके अलावा ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और यूरोपियन यूनियन ने भी इस हमले की निंदा की है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने तो यहां तक कह दिया कि क्रूर इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ पूरी दुनिया को एकजुट होना होगा.

उदारता का नतीजा आज पूरा यूरोप भुगत रहा
जिस आतंकवादी ने इस हमले को अंजाम दिया था. उसकी उम्र सिर्फ 20 वर्ष थी और इस आतंकवादी का नाम है कुज़तिम फेज़ुलाई. ये आतंकवादी ऑस्ट्रियन और नॉर्थ मैसेडोनियाई मूल का था और इसके पास दोनों देशों की नागरिकता भी थी. इसने कुछ समय पहले ISIS में शामिल होने के लिए सीरिया जाने की कोशिश थी और इसकी वजह से इसे पिछले साल अप्रैल में 22 महीने की जेल की सजा भी हुई थी. लेकिन उम्र कम होने की वजह से इसे पिछले साल दिसंबर में ही रिहा कर दिया गया था.

यानी वैचारिक रूप से कट्टर हो चुके एक युवक को उसकी उम्र देखते हुए रिहा करना आज पूरे ऑस्ट्रिया को भारी पड़ गया. फ्रांस में जिन आतंकवादियों ने लोगों का गला काटा वो शरणार्थी थे और ऑस्ट्रिया में जिस आतंकवादी ने लोगों की हत्या की वो ISIS में भर्ती होना चाहता था. फ्रांस के हत्यारों को शरण देते समय किसी ने पहचाना नहीं और ऑस्ट्रिया के आतंकवादी को समय से पहले ही जेल से रिहा कर दिया गया और इसी उदारता का नतीजा आज पूरा यूरोप भुगत रहा है.

शरणार्थियों के लिए सबसे पहले अपने बॉर्डर खोले
वर्ष 2015 में जब सीरिया में युद्ध चल रहा था, तब ऑस्ट्रिया, यूरोप के उन देशों में शामिल था जिसने सीरिया से आने वाले शरणार्थियों के लिए सबसे पहले अपने बॉर्डर खोले थे. तब ऑस्ट्रिया के लोगों ने बाकायदा राजधानी विएना में रैलियां निकालकर इन शरणार्थियों का स्वागत किया था और कहा था कि दुनिया ये साफ साफ सुन ले कि ऑस्ट्रिया शरणार्थियों का स्वागत करता है. लेकिन आज उसी ऑस्ट्रिया के लोगों को इसके बदले में आतंकवाद मिला है और अब लोग कह रहे हैं कि ऑस्ट्रिया, फ्रांस और जर्मनी जैसे देश अपनी उदारवादी नीतियों का खामियाजा भुगत रहे हैं.

दुनिया को कट्टर इस्लाम के खतरे समझ आने लगे
हम यहां किसी देश की निंदा नहीं कर रहे लेकिन जब भारत पर आतंकवादी हमले होते थे तो पश्चिम के ज्यादातर देश आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का साथ नहीं देते थे और कई बार तो यहां तक देते थे कि भारत में एक विशेष धर्म के लोगों को दबाया जा रहा है और ये आतंकवाद इसी की प्रतिक्रिया है. लेकिन आज लगभग पूरी दुनिया को कट्टर इस्लाम के खतरे समझ आने लगे हैं.

कट्टरपंथी इस्लाम को सुधारने की कोशिशें
कुछ दिनों पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने देश में कट्टरपंथी इस्लाम को सुधारने की कोशिशें शुरू की हैं. ये इस्लामिक आतंकवाद को खत्म करने की दिशा में बढ़ाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है. अब आपको आतंकवाद के खिलाफ फ्रांस से आई एक और अच्छी खबर बताते हैं.

- फ्रांस की सेना ने पश्चिमी अफ्रीका के एक देश माली में हवाई हमला करके अल-कायदा के 50 आतंकवादियों को मार दिया है. 50 आतंकवादी कम नहीं होते हैं, विएना में कुछ ही आतंकियों ने मिलकर 6 जगहों पर हमला किया.

- फ्रांस के एक ड्रोन ने आतंकवादियों के इस ग्रुप का पता लगाया. इसके बाद फ्रांस ने अपने दो मिराज फाइटर जेट्स और एक कॉम्बैट ड्रोन से हवाई हमला करके इन आतंकियों को मार दिया.

- ये हमला शुक्रवार 30 अक्टूबर को किया गया, जिसमें 4 आतंकवादियों को गिरफ्तार भी किया गया है.

- पिछले महीने फ्रांस ने माली में आतंकवादियों के कब्जे से अपने एक नागरिक सहित 4 लोगों की सुरक्षित रिहाई के लिए 200 लोगों को रिहा किया था, इनमें से कई आतंकवादी भी थे. हालांकि इस ऑपरेशन के बाद अफ्रीका में आतंकवादियों की संख्या में थोड़ी कमी जरूर आई है.

- फ्रांस के मुताबिक उसके 3 हजार सैनिक, पश्चिमी अफ्रीका में आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट के खिलाफ एक और ऑपरेशन कर रहे हैं. यानी यूरोप से लेकर अफ्रीका तक फ्रांस का एंटी टेरर ऑपरेशन जारी है.

आपको याद होगा फरवरी 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकवादी हमले के बाद भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में हवाई हमला किया था. ये हमला आतंकवादी संगठन जैश के एक ट्रेनिंग सेंटर पर किया गया था. बालाकोट हमले में भारतीय वायु सेना ने फ्रांस में बने मिराज फाइटर जेट्स का ही इस्तेमाल किया था. यानी फ्रांस और भारत लगातार दुनिया से आतंकवाद को खत्म करने की कोशिशें कर रहे हैं.

कट्टरपंथी इस्लाम की असहनशीलता
ऑस्ट्रिया में ये आतंकवादी हमला क्यों हुआ इसकी जांच की जा रही है. लेकिन माना जा रहा है कि ये आतंकवादी हमला भी फ्रांस में हुए हमलों की तर्ज पर ही हुआ है और इसके पीछे भी इस्लाम की वही कट्टर सोच जिम्मेदार है, जो बिल्कुल भी सहनशील नहीं है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पूरी दुनिया में इस कट्टरपंथी इस्लाम की असहनशीलता को किन तीन नेताओं ने सबसे ज्यादा बढ़ावा दिया है? ये नेता हैं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोआन और मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद इन तीनों नेताओं के हाथ में बंदूक या बारूद तो नहीं है.  लेकिन ये अपने माइक का इस्तेमाल किसी मशीन गन की तरह और ट्विटर का इस्तेमाल किसी टाइम बॉम्ब की तरह करते हैं.

 इमरान खान फ्रांस का विरोध खुलकर कर चुके हैं. अर्दोआन फ्रांस के राष्ट्रपति को मानसिक रूप से बीमार बता चुके हैं और महातिर मोहम्मद तो ट्विटर पर खुलेआम मुसलमानों को भड़काते हुए कह चुके हैं कि मुसलमानों को फ्रांस के करोड़ों लोगों को मार डालने का हक है. ये तीनों नेता इस खून खराबे के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं.

इस्लामिक दुनिया का नया लीडर बनने की चाह
विएना में हुए आतंकवादी हमले को आपको वर्तमान और इतिहास की परिस्थितियों के नजरिए से भी समझना चाहिए. वर्तमान में तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन इस्लामिक दुनिया का नया लीडर बनाना चाहते हैं और इसके लिए वो तुर्की के इतिहास का सहारा ले रहे हैं. 13वीं शताब्दी में टर्किश मूल के लोगों ने ऑटोमन साम्राज्य की स्थापना की थी और इनके नेता का नाम था उस्मान. 13वीं शताब्दी के मध्य तक ऑटोमन साम्राज्य यूरोप के एक बहुत बड़े हिस्से तक फैल चुका था और आज यूरोप के जो देश आतंकवाद का शिकार हो रहे हैं वो भी कभी इसी ऑटोमन साम्राज्य का हिस्सा हुआ करते थे. इनमें ऑस्ट्रिया और विएना भी शामिल थे. ये साम्राज्य इतना शक्तिशाली था कि एक समय में ये एशिया और यूरोप को आपस में जोड़ने वाली कड़ी बन गया था. लेकिन जैसा कि हर साम्राज्य के साथ होता है, वैसा ही ऑटोमन साम्राज्य के साथ भी हुआ और ये धीरे धीरे नष्ट होने लगा. इसमें एक महत्वपूर्ण कड़ी ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना थी.

ऑटोमन साम्राज्य ने की थी विएना पर कब्जा करने की कोशिश
ऑटोमन साम्राज्य के शासकों ने 1683 में विएना पर कब्जा करने की कोशिश की थी. लेकिन ऑटोमन शासकों को इसमें सफलता नहीं मिली. यहीं से इस साम्राज्य का अंत शुरू हो गया है और इसी के साथ यूरोप में इस्लाम का विस्तार भी रुक गया. ऑटोमन साम्राज्य को हराने में एक बड़ी भूमिका रोमन साम्राज्य की थी जिसमें रोमन साम्राज्य का साथ ऑस्ट्रिया और ग्रीस के लोगों ने भी दिया था. ऑस्ट्रिया पहुंचकर इस्लाम का विस्तार रुक जाने की ये टीस आज भी दुनिया के कई इस्लामिक नेताओं के मन में है और ये टीस अर्दोआन जैसे नेताओं के बयानों में भी दिखाई देती है. इसलिए बहुत सारे विशेषज्ञ मानते हैं कि अर्दोआन, इमरान खान और महातिर मोहम्मद जैसे नेता मिलकर एक बार फिर से इस्लाम के विस्तार का सपना देख रहे हैं.

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भी ये ऑटोमन साम्राज्य ही लाखों लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार था. अपनी कमजोर स्थिति को देखकर ऑटोमन शासकों ने जर्मनी के साथ एक गुप्त समझौता कर लिया था. लेकिन इस समझौते की वजह से दुनिया दो हिस्सों मे बंट गई और इस युद्ध में लाखों लोग मारे गए.

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