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DNA ANALYSIS: भारत में प्रेम, आतंकवाद से ज्यादा लोगों को क्यों मार रहा है?

आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2018 में प्रेम संबंधों की वजह से 1 हज़ार 581 हत्याएं हुई थीं जबकि अवैध संबंधों की वजह से 1 685 लोगों की हत्या की गई. इसी तरह 2018 में प्रेम 5 हजार 342 आत्महत्याओं के लिए जिम्मेदार था. 2018 में 24 हज़ार से ज्यादा लोगों का अपहरण जबरन विवाह के लिए किया गया था. 

DNA ANALYSIS: भारत में प्रेम, आतंकवाद से ज्यादा लोगों को क्यों मार रहा है?

आज वैलेंटाइन डे है और शायद आपने भी आज किसी ना किसी से अपने प्रेम का इज़हार ज़रूर किया होगा. अगर हम आपसे कहें कि प्रेम की इन भावनाओं के लिए आपका दिल नहीं बल्कि सिर्फ आपका दिमाग और शरीर में मौजूद कुछ केमिकल जिम्मेदार हैं तो आप भी शायद हैरान हो जाएंगे. यानी अगर आपके शरीर में कुछ विशेष प्रकार के हार्मोन्स का प्रवेश करा दिया जाए तो आपको ऐसा लगने लगेगा कि आप प्रेम में हैं.जबकि हो सकता है कि असल में ऐसा ना हो. 

वैज्ञानिक मानते हैं कि रोमांस और प्रेम की भावनाएं तीन चरणों में किसी को प्रभावित करती हैं. पहला चरण किसी को पाने की इच्छा पर आधारित होता है और इस दौरान दिमाग Testo-sterone और Estrogen नाम के Hormones को तेज़ी से रिलीज करने लगता है. इसे आप वासना भी कह सकते हैं. दूसरा चरण होता है आकर्षण का. प्रेम का तीसरा चरण होता है किसी के साथ जुड़ाव यानी लगाव महसूस करना. इसके लिए मुख्य रूप से दो केमिकल जिम्मेदार होते हैं.पहला है oxytocin और दूसरा है vaso-pressin (वेसो-प्रेसिन). ये दोनों हार्मोन्स माता पिता के बच्चों के प्रति प्यार, दोस्ती और समाज के साथ मधुर संबंध बनाए रखने के लिए भी जिम्मेदार होते हैं. 

यानी प्यार का फार्मूला किसी लैब में भी तैयार किया जा सकता है और इस फार्मूले को अपनाकर आप प्रेम को महसूस कर सकते हैं लेकिन क्या ये रसायनिक प्रेम सच्चा प्रेम होता है? और क्या प्रेम को जीव विज्ञान और रसायन विज्ञान की भाषा में समझा जा सकता है?

हमने आपको प्रेम के तीन चरण बताए. पहला किसी को पाने की इच्छा. दूसरा उसके प्रति आकर्षण और तीसरा उससे जुड़ाव.लेकिन वैज्ञानिक प्रेम का चौथा चरण नहीं बता पाते. ये चरण आत्म समर्पण का चरण होता है. जब आप प्यार में खुद को पूरी तरह समर्पित कर देते हैं. हम आपको इस चौथे चरण के बारे में बताएंगे लेकिन पहले ये समझ लीजिए कि जब लोग प्रेम के सिर्फ शुरुआती तीन चरणों में फंसे रहते हैं तो क्या क्या होता है. आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2018 में प्रेम संबंधों की वजह से 1 हज़ार 581 हत्याएं हुई थीं जबकि अवैध संबंधों की वजह से 1 685 लोगों की हत्या की गई. इसी तरह 2018 में प्रेम 5 हजार 342 आत्महत्याओं के लिए जिम्मेदार था. 2018 में 24 हज़ार से ज्यादा लोगों का अपहरण जबरन विवाह के लिए किया गया था. 

2018 में ही बलात्कार के 12 हज़ार से ज्यादा मामले ऐसे थे जिनके लिए पति, लिव इन पार्टनर या पत्नी से अलग हो चुके पति जिम्मेदार थे. 2001 से 2018 के बीच 45 हज़ार से ज्यादा हत्याओं के लिए सिर्फ प्रेम संबंध जिम्मेदार थे. यानी प्रेम के नाम पर हमारे देश में एक दूसरे को सताया जाता है. एक दूसरे का शोषण किया जाता है और कई बार तो प्यार ही जान लेने की वजह भी बन जाता है. प्रेम को सबसे पवित्र भावना माना जाता है लेकिन इसकी खातिर इतनी हत्याएं और अपराध ये बताते हैं कि इस भावना का सबसे ज्यादा दुरुपयोग किया जाता है. 

प्रेम के नाम पर लोग एक दूसरे के जीवन पर कब्ज़ा करना चाहते हैं. उन्हें अपने इशारों पर चलाना चाहते हैं जबकि प्रेम की पहली शर्त ही होती है स्वतंत्रता. अगर आप प्रेम में पड़ने के बाद स्वंतत्र महसूस नहीं करते और दूसरे को भी स्वतंत्र महसूस नहीं होने देते तो आपका प्रेम सिर्फ कुछ रासायनिक बदलावों का नतीजा है और इसके अलावा कुछ नहीं. प्रेम मुक्ति का मार्ग है. प्रेम संयोग से होता है प्रयोग से नहीं और इसे आप किसी एक रिश्ते की परिभाषा में नहीं बांध सकते. यानी सिर्फ प्रेमी या प्रेमिका ही प्रेम नहीं करते बल्कि इसमें माता-पिता का प्रेम, दोस्तों का प्रेम, समाज का प्रेम, राष्ट्र के प्रति प्रेम और गुरु के प्रति प्रेम भी
शामिल होता है. 

सुदामा और कृष्ण का प्रेम मित्रता वाले प्रेम को दर्शाता है. श्रवण कुमार का प्रेम माता पिता के प्रति अथाह प्रेम का परिचायक है. कृष्ण के प्रति मीरा का प्रेम भक्ति का शिखर है. गांधी जी का प्रेम समाज के हर वर्ग के लिए प्राण न्योछावर करने वाला प्रेम है. तो भगत सिंह जैसे शहीदों का प्रेम देश के लिए आहुति देने वाले वीरों का प्रेम है. और जो प्रेम आप किसी से करते हैं वो जीवन में अमृत बरसाने वाला होता है लेकिन कुछ लोग इसे जहरीला बना देते हैं और इसमें नफरत की भावना भर देते हैं. 

प्रेम में आपका अपना कुछ नहीं होता. सबकुछ दूसरे को समर्पित होता है. प्रेम पर संत कबीर ने अपने एक दोहे में कहा था कि प्रेम गली अति सांकरी जा में दो ना समाएं यानी प्रेम की गली इतनी संकरी होती है..कि उसमें दो के लिए कोई जगह नहीं होती और किसी एक को तो मिटना ही पड़ता है लेकिन आज के दौर में प्रेम सबकुछ अर्पित करने का नहीं बल्कि दूसरे के ज़रिए सबकुछ अर्जित करने का ज़रिया बन गया..ऐसा क्यों है आज ये हमने अपने विश्लेषण के ज़रिए समझने की कोशिश की है. 
 
कहते हैं इश्क जिसे, खलल है दिमाग का - मिर्जा गालिब ने ये शेर सदियों पहले लिखा था लेकिन प्यार सच में दिमाग का खलल है इसे विज्ञान की दुनिया ने भी माना है. अगर आप किसी की मोहब्बत में गिरफ्तार हैं तो इसमें आपका दिल नहीं - आपका दिमाग ज़िम्मेदार है. तो प्यार होने पर दिल में घंटियां बजती हों या वॉयलन ये सब दिमाग का ही फितूर है. दिमाग का बायां हिस्सा यानी लेफ्ट साइड हमारी भावनाओं के लिए ज़िम्मेदार होता है.विज्ञान की भाषा में इसे लिंबिक सिस्टम कहा जाता है। किसी को देखने पर दिमाग के इसी हिस्से में केमिकल्स का कॉकटेल बनने लगता है. और दिमाग से हैप्पी हार्मोन निकलने लगते हैं और दुनिया अच्छी लगने लगती है. 

डोपामिन से आनंद, सेरोटोनिन से खुशी और ऑक्सीटोसिन से बॉंडिंग यानी अपनेपन का अहसास होता है. प्यार का यही कॉकटेल नशे की लत जैसा अहसास करवाता है. एक्सपर्ट की राय में प्यार भी नशे की लत की तरह दिमाग को गिरफ्त में ले लेता है. क्योंकि प्यार को नशे की तरह ही आदत और लत वाला माना जाता है इसलिए ये ध्य़ान रखना भी ज़रुरी है कि ये नशा आप पर इतना हावी ना हो जाए कि प्यार जूनून में बदल जाए.  
आंकड़े गवाह हैं कि नाकाम रिश्ते, एकतरफा प्यार और ब्रेकअप ने जुर्म की बहुत सी कहानियों को जन्म दिया है. प्रेम में समर्पण की भावना हो और खुद से ज्यादा पार्टनर की खुशी का ख्याल हो. असली प्यार तो वही है वरना जैसा किसी शायर ने कहा है -- इश्क में और कुछ नहीं होता, आदमी बावरा सा रहता है.