DNA ANALYSIS: क्या अब कीड़े मारने वाली इस दवा से होगा कोरोना का इलाज?

अब भी Covid-19 की वैक्सीन उपलब्ध होने में डेढ़ से दो साल का समय लग सकता है. 

DNA ANALYSIS: क्या अब कीड़े मारने वाली इस दवा से होगा कोरोना का इलाज?

नई दिल्ली: पूरी दुनिया के डॉक्टर और वैज्ञानिक कोरोना वायरस की दवा ढूंढने में जुटे हैं. इस समय 100 से ज्यादा रिसर्च ग्रुप इस वायरस पर शोध कर रहे हैं. वैक्सीन बनाने वाली कुछ कंपनियों को इसमें शुरुआती सफलता हासिल भी हुई है. लेकिन अब भी Covid-19 की वैक्सीन उपलब्ध होने में डेढ़ से दो साल का समय लग सकता है. क्योंकि अगर वैज्ञानिकों ने अगले कुछ महीने में इस वायरस की वैक्सीन बना भी दी तो इसे दुनिया के 750 करोड़ लोगों तक पहुंचने में लंबा समय लग जाएगा. ऐसे में दुनियाभर के कई डॉक्टर्स पहले से उपलब्ध कुछ पुरानी दवाओं को कोरोना वायरस के मरीजों पर आजमा रहे हैं. इनमें से कुछ दवाओं ने आशाजनक नतीजे भी दिए हैं. 

Hydroxy Chloroquin की ही तरह एक और दवा है जिसका नाम है IverMectin.ये एक Anti-Parasitic दवा है. जिसका इस्तेमाल छोटे बच्चों में पेट के कीड़ों को मारने के लिए किया जाता है. भारत, जापान, बांग्लादेश और बोलिविया जैसे कई देशों में इस दवा का इस्तेमाल कोरोना वायरस के मरीजों पर किया जा रहा है और इससे हासिल हुए नतीजे उम्मीद बंधाने वाले हैं. 

बांग्लादेश मेडिकल कॉलेज में ये दवा कोरोना वायरस से पीड़ित 60 मरीजों को दी गई और इस मेडिकल कॉलेज का दावा है कि इससे कोरोना के ये सभी मरीज सिर्फ 4 दिन में ठीक हो गए. 

ये दवा शरीर में मौजूद पैरासाइट से जाकर चिपक जाती है और पैरासाइट शरीर में अपना लार्वा नहीं छोड़ पाता, इसके बाद ये दवा पैरासाइट को खत्म कर देती है. भारत में भी कुछ राज्यों में Iver-Mectin का प्रयोग कोरोना वायरस के मरीजों पर किया जा रहा है और डॉक्टरों को उम्मीद है कि बेहद आसानी से उपलब्ध और बहुत सस्ती मानी जाने वाली ये दवा कोरोना वायरस से लड़ाई में नया हथियार साबित हो सकती है. 

तो क्या ये साधारण सी दवा कोरोना वायरस के खिलाफ सबसे बड़ा रामबाण बन जाएगी? या फिर इन नतीजों पर विश्वास करना अभी जल्दबाजी है. इन सारे सवालों के साथ हमने Iver-Mectin को लेकर एक विश्लेषण तैयार किया है. आप भी ये विश्लेषण देखिए ताकि आपको अंदाजा लग जाए कि दवा की तरफ पूरी दुनिया इतनी उम्मीद से क्यों देख रही है. 

Ivermectin (आईवरमैक्टीन) एक ऐसी दवा जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के डी वर्मिंग प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन की सेफ्टी लिस्ट में सुरक्षित माना जाता है. एक ऐसी दवा जो पेट में कीड़े मारने की दवा यानी डी-वर्मिंग टैबलेट के तौर पर जानी जाती है. अब यही दवा कोरोना वायरस के इलाज में काम आ सकती है. भारत में केरल, यूपी के कानपुर और दिल्ली में कई अस्पताल भी अब इस दवा को कोरोना मरीजों पर आजमा रहे हैं. 

मोनाश यूनिवर्सिटी आस्ट्रेलिया और विक्टोरियन इंफेक्शियस डिजीज रेफरेंस लैब में हुई एक लैब स्टडी में ये पाया गया कि ये दवा 48 घंटे के अंदर वायरस का खात्मा कर देती है. लैब स्टडी में देखा गया कि इस दवा से कोरोना वायरस का आरएनए 93 प्रतिशत कमजोर पड़ गया. हालांकि इस स्टडी में इंसानों पर दवा को आजमा कर नहीं देखा गया. लेकिन ये काम बांग्लादेश के एक प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों ने किया. बांग्लादेश के एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने अपने यहां भर्ती 60 कोरोना मरीजों को आईवरमैक्टीन की दवा एक साथ ही एक एंटीबायोटिक दवा डॉक्सीसाइक्लिन दी. अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक दवा देने के 72 घंटे बाद सभी मरीजों का कोरोना टेस्ट नेगेटिव आया. 

दरअसल आईवरमैक्टीन इम्युनिटी बढ़ाने वाली Antimicrobial दवा मानी जाती है. हालांकि ये दवा चमत्कारी दवा साबित हो जाए इसके लिए बड़े ट्रायल की जरुरत होगी, लेकिन बिना खास साइड इफेक्ट वाली इस बेहद सस्ती दवा ने मेडिकल जगत को एक नई उम्मीद दे दी है.