DNA ANALYSIS: World Radio Day- जब सिर्फ 'आवाज' पर किया जाता था भरोसा

आज World Radio Day है. इस अवसर पर हम आपके और रेडियो के दशकों पुराने रिश्ते का विश्लेषण करना चाहते हैं.

DNA ANALYSIS: World Radio Day- जब सिर्फ 'आवाज' पर किया जाता था भरोसा

आज World Radio Day है. इस अवसर पर हम आपके और रेडियो के दशकों पुराने रिश्ते का विश्लेषण करना चाहते हैं. हमारे देश में एक ऐसा दौर था जब दृश्य नहीं हुआ करते थे, लोगों के पास TV नहीं थे, मोबाइल फोन नहीं थे, तब सिर्फ़ आवाज़ हुआ करती थी, और उस आवाज़ पर लोग तुरंत भरोसा कर लिया करते थे. समाचार, संगीत और क्रिकेट की Commentary से लेकर देश की सत्ता चलाने वालों की बातों को, बहुत ध्यान से सुना जाता था. आज भी रेडियो पूरे भारत के दिल में बसता है. कार चलाने वालों से लेकर खेत में हल चलाने वालों तक रेडियो, सबका साथी है. 

भारत में रेडियो की शुरुआत वर्ष 1923 में हुई थी. उसके बाद से रेडियो देश के इतिहास के कई महत्वपूर्ण लम्हों का गवाह बना है. रेडियो के जरिए ही देश के लोगों ने 11 मई 1947 को महात्मा गांधी का भाषण सुना था, 1947 में देश के आज़ाद होने की सूचना भी रेडियो की जरिए ही सुनी गई थी, देशवासियों ने तमाम बड़े नेताओं की मृत्यु के शोक समाचार से लेकर इमरजेंसी लागू करने की घोषणा भी रेडियो पर ही सुनी थी.

लेकिन बदलते वक़्त के साथ रेडियो धीरे-धीरे लोगों से दूर होता चला गया.  लेकिन 3 अक्टूबर 2014 को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रेडियो को जनता से जोड़कर, एक बार फिर इसे सुपरहिट बना दिया.  मन की बात कार्यक्रम के ज़रिए प्रधानमंत्री ने रेडियो से देश के करोड़ों लोगों को जोड़ दिया. 

World Radio Day के अवसर पर आज हम भारत में रेडियो की यात्रा से जुड़ा हुआ एक दिलचस्प किस्सा आपके साथ शेयर करना चाहते हैं. ये किस्सा रेडियो की उस धुन से जुड़ा हुआ है, जिसने भारत में आकाशवाणी को एक नयी पहचान दी.  

जिस धुन को आपने अभी सुना वो All India Radio की Signature Tune हुआ करती थी.  इस धुन के साथ ही रेडियो पर कार्यक्रमों की शुरुआत हुआ करती थी.  आपको जानकर हैरानी होगी कि इस धुन को आप तक पहुंचाने में जर्मनी के तानाशाह हिटलर का बहुत बड़ा हाथ है. 

वर्ष 1933 में जर्मनी में यहूदियों पर हिटलर के अत्याचारों की वजह से Walter Kaufmann नामक एक संगीतकार भारत आ गये.  उन्होंने मुंबई में All India Radio में Music Composer के रूप में काम करते हुए इस ऐतिहासिक धुन को तैयार किया. 

इस धुन में भारतीय संगीत और पश्चिमी संगीत का अनोखा संगम है. अगर हिटलर के अत्याचारों से तंग आकर Walter Kaufmann भारत नहीं आए होते तो भारत में रेडियो की कोई और धुन बजाई जा रही होती. 

Walter की प्रतिभा का अंदाज़ा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि 1938 में मशहूर वैज्ञानिक Albert Einstein ने एक पत्र लिखकर उन्हें एक महान संगीतकार बताया था.  एक संगीतकार के प्रति एक महान वैज्ञानिक की ये भावना आज भी याद की जाती है. भारत में रेडियो का अपना गौरवशाली इतिहास रहा है.