DNA ANALYSIS: रिसर्च में कितना आगे है भारत? WIPO ने जारी की नई खोज करने वाले देशों की लिस्ट

अब तक यह माना जाता रहा है कि नई चीजों की खोज के मामले में भारतीय लोग पीछे हैं, लेकिन अब यह सोच बदल लेने का समय आ गया है.

DNA ANALYSIS: रिसर्च में कितना आगे है भारत? WIPO ने जारी की नई खोज करने वाले देशों की लिस्ट

नई दिल्ली: अब तक यह माना जाता रहा है कि नई चीजों की खोज के मामले में भारतीय लोग पीछे हैं, लेकिन अब यह सोच बदल लेने का समय आ गया है. भारत पहली बार दुनिया के ऐसे 50 सबसे बड़े देशों में शामिल हो गया है जहां पर नई-नई खोजें होती हैं. दुनिया की मोस्ट इनो​वेटिव कंट्रीज (Most Innovative Countries) की लिस्ट में भारत अब 48वें नंबर पर पहुंच गया है.

R&D पर फोकस बढ़ा
- World Intellectual Property Organization यानी WIPO एक ऐसी संस्था है जो हर साल खोज करने वाले देशों की ये लिस्ट जारी करती है.

- WIPO संयुक्त राष्ट्र की संस्था है, जो दुनिया भर में नई खोजों के पेटेंट और कॉपीराइट की निगरानी करती है.

- इस लिस्ट में सबसे ऊपर के पांच देश हैं- Switzerland, Sweden, अमेरिका, ब्रिटेन और नीदरलैंड्स.

- इसमें भारत को निम्न आय वर्ग वाले देशों की लिस्ट में तीसरे स्थान पर रखा गया है.

- Information और Communication Technology के मामले में भारत का नंबर 15वां है

- रिपोर्ट में भारत में इनोवेशन में आई तेजी का श्रेय दिल्ली और मुंबई के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी IIT और बेंगलुरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस यानी IIS को दिया गया है.

- साथ ही कहा गया है कि भारत में Research and Development यानी R&D पर फोकस बढ़ा है.

आविष्कारों से ही विकसित होते हैं नए प्रॉडक्ट
यहां पर हम नोबेल पुरस्कार विजेता और अमेरिका के जाने-माने ​फिजिसिस्ट डेविड ग्रॉस के एक विचार का जिक्र करना चाहेंगे. उनके मुताबिक,  'मेक इन इंडिया भारत के लिए बहुत जरूरी है लेकिन ये दूसरों पर निर्भर होकर नहीं होना चाहिए. भारत को खुद ही आविष्कार करने चाहिए. नई खोज करनी चाहिए.आविष्कारों से ही नए प्रॉडक्ट विकसित होते हैं. इसलिए मेक इन इंडिया के नारे को बदलकर डिस्कवर, इन्वेंट और मेक इन इंडिया कर दिया जाना चाहिए.'

रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर अलग-अलग देशों का बजट
कोई देश कितनी खोजें यानी इनोवेशन करता है इसका सीधा संबंध इस बात से है कि वहां पर रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर कितना बजट खर्च किया जाता है. इसे जीडीपी यानी वहां के कुल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के तौर पर देखा जाता है. अब हम आपको बताते हैं कि कौन से देश R&D पर अपनी GDP का कितना प्रतिशत खर्च करते हैं.

- इस मामले में सबसे आगे है द​क्षिण कोरिया, जो अपने अपनी कुल GDP का 4.3 प्रतिशत नई खोजों और आविष्कार पर खर्च करता है.

- दूसरे नंबर पर इजराइल है जो R&D पर 4.2 प्रतिशत खर्च करता है.

- इसके बाद जापान का नंबर आता है जो 3.4 प्रतिशत बजट देता है.

- चौथे नंबर पर फिनलैंड और स्विट्जरलैंड हैं, ये दोनों 3.2 प्रतिशत बजट नई खोजों के लिए खर्च करते हैं.

- भारत अपनी कुल GDP का मात्र 0.7 प्रतिशत ही नई खोजों पर खर्च करता है. ये सारे आंकड़े जो हमने आपको बताए ये 2019 के हैं.

पेटेंट के मामले में ये देश आगे
किसी भी देश के लोग कितनी नई खोजें करते हैं इसका पैमाना होता है पेटेंट. क्योंकि जब भी कोई नई खोज होती है तो उसका पेटेंट कराना होता है, ताकि कोई और उसकी नकल न कर पाए और उस खोज का श्रेय आपको ही दिया जाए. हम आपको 2017 के आंकड़ों के हिसाब से बताते हैं कि पेटेंट के मामले में कौन से देश आगे हैं.

- पिछले कुछ साल में चीन इस मामले में सबसे आगे निकल चुका है, जिसने 2017 में लगभग 13 लाख पेटेंट के आवेदन दिए.

- इसके बाद अमेरिका का नंबर है, जिसने 6 लाख से ज्यादा पेटेंट आवेदन दिए.

- भारत का स्थान इस लिस्ट में बहुत नीचे है. 2017 में भारत ने पेटेंट के लिए सिर्फ 47 हजार पेटेंट आवेदन भेजे। इसके अभी ताजा आंकड़े नहीं आए हैं. जब ये आएंगे तो इसमें अब भारत काफी आगे निकल चुका होगा.

भारत अभी तक पिछड़ा क्यों?
इनोवेशन और रिसर्च के क्षेत्र में भारत अभी तक पिछड़ा क्यों रहा, इसकी एक बड़ी वजह है रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर कम खर्च करना. Organisation for Economic Cooperation and Development क्या कहता है इसे समझिए-

- भारत में GDP का सिर्फ शून्य दशमलव 7 प्रतिशत हिस्सा शोध पर खर्च किया जाता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि इसे कम से कम दो प्रतिशत होना चाहिए.

- भारत का ये हिस्सा दक्षिण अफ्रीका ((0.80)) और मलेशिया ((1.3)) जैसे देशों द्वारा रिसर्च पर खर्च किये जाने वाले हिस्से से भी कम है.

- भारत का पड़ोसी देश चीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर GDP का 2 फीसदी से ज्यादा हिस्सा खर्च करता है.

पहली बार इस सोच में बदलाव
भारत में शोध और अनुसंधान के महत्व की अब तक अनदेखी होती रही है. सरकार और कंपनियों की सोच ये रही है कि उसे पके पकाए आविष्कार और तकनीकें मिल जाए और उन्हें खुद पसीना न बहाना पड़े, कोई खर्च न करना पड़े. यही वजह है कि भारत के अच्छे वैज्ञानिक देश छोड़कर विदेश में बस जाते हैं और अपने हुनर का इस्तेमाल करके नये आविष्कार भारत के बजाए दूसरे देशों के लिए करते हैं, लेकिन अब पहली बार इस सोच में बदलाव के लक्षण दिखाई दे रहे हैं. मेक इन इंडिया हो या आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियान, भारत में नई खोज करने का माहौल पहले से बेहतर हुआ है. अब उम्मीद है कि चीन के सस्ते माल पर रोक के बाद इसमें और भी सुधार आएगा.

अब आप सोच रहे होंगे कि जब दुनियाभर के देश रिसर्च और नई तकनीकों को खोजने में जुटे हैं, तो भारत सरकार क्या कर रही है. यहां जानिए-

- वर्ष 2016 में सरकार ने राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति की घोषणा की है

- इसमें नई खोजों और उन खोजों के व्यवसायिक इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए जरूरी नियम तय किये गए हैं.

- उम्मीद है कि नई नीति से अगले 10 वर्षों में भारत को इनोवेटिव इकोनॉमी यानी नई खोजों वाली अर्थव्यवस्था बनाने में मदद मिलेगी.

- राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति के जरिये सरकारी खर्चे पर चलने वाली शोध संस्थाओं को रिसर्च एंड डेवलपमेंट में तेजी के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है.

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