DNA on harmful substances in biscuits: क्या आप भी रोजाना चाय की चुस्कियो के साथ बिस्किट खाना पसंद करते हैं. अगर ऐसा है तो अपनी ये आदत तुरंत बदल लें. ऐसा न करने पर आपको सेहत से हाथ गंवाना पड़ जाएगा.
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Why Priya Gold biscuits were banned in Kashmir: एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के करीब 45 करोड़ लोग रोज बिस्किट खाते हैं. ऐसे में यह खबर आप सबके लिए बहुत काीम की है. खबर है कि जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में प्रियागोल्ड बिस्किट के बटर डिलाइट ब्रांड को असुरक्षित घोषित कर दिया है. दावा है कि ये बिस्कुट सेहत के लिए हानिकारक है. अधिकारियों ने बताया है कि लैब में जांच के दौरान प्रियगोल्ड बटर डिलाइट बिस्किट के एक बैच में सल्फाइट की मात्रा तय सीमा से ज्यादा पाई गई है.
बिस्किट में कितना सल्फाइट मान्य?
जो बिस्किट हम खाते हैं, इसमें सल्फाइट का इस्तेमाल बिस्किट बनाने के लिए आटे को नरम और लचीला बनाने के लिए होता है. साथ ही बिस्कुट की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए भी सल्फाइट का प्रयोग होता है. सरल शब्दों में सल्फाइट के इस्तेमाल से बिस्किट ज्यादा दिन तक ताजा रहता है. भारत में नियम के मुताबिक एक किलो खाद्य पदार्थ में 15 मिलीग्राम सल्फाइट ही प्रयोग किया जा सकता है.
ये मात्रा इसलिए तय की गई है क्योंकि ज्यादा सल्फाइट से सांस से जुड़ी बीमारी जैसे अस्थमा अटैक हो सकता है. ज्यादा सल्फाइट के इस्तेमाल से एनाफिलेक्सिस शॉक हो सकता है. एनाफिलेक्सिस शॉक से ब्लड प्रेशर तेजी से गिरता है, इससे जान भी जा सकती है. एंजाइम की कमी के शिकार लोगों के लिए सल्फाइट की ज्यादा मात्रा जानलेवा हो सकता है.
25 कारोबार पर प्रियागोल्ड की पकड़
मेडिकल फील्ड से जुड़े लोग ज्यादा सल्फाइट को पाचन के लिए भी खतरा बताते हैं. ये खतरा तब और बड़ा हो जाता है जब सल्फाइट जैसे केमिकल बिस्किट में तय मात्रा से ज्यादा हो. बता दें कि देश के बिस्किट बाजार में करीब 75% हिस्सा कम दम वाले बिस्किट का है.
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— Zee News (@ZeeNews) December 12, 2025
करीब 90% भारतीय परिवार हर महीने बिस्किट खाते हैं. जिस प्रिया गोल्ड ब्रांड को बैन किया गया है उसकी पहुंच भारत के 25% परिवारों तक है. कंपनी का कुल कारोबार करीब 3 हजार करोड़ रुपए का है. यानी भारत के एक चौथाई घरों तक प्रिया गोल्ड ब्रांड का बिस्किट पहुंचता है. इसलिए ये खतरा भी बड़ा है. इसलिए हम कह रहे है कि कुछ बैन अच्छे भी होते हैं.
अपने बिस्किट का पैकेट आज ही चेक करें
अब हम आपको बिस्किट के बारे में कुछ दिलचस्प तथ्य भी शेयर करते हैं. भारत में बिस्किट खाने का चलन अंग्रेजों के साथ आया. 1857 के आसपास कलकत्ता और बॉम्बे में अंग्रेजों के लिए यूरोपीय बेकरियों में बिस्कुट बनता था. यानी बिस्किट पहले उच्च वर्ग का खाद्य पदार्थ था. 1892 में पहली भारतीय बिस्कुट फैक्ट्री तमिलनाडु में शुरू हुई थी. भारत का पहला बिस्किट ब्रांड 1929 में लॉन्च हुआ था.
इसके बाद बिस्किट सस्ता हुआ और खास वर्ग से आम वर्ग के घरों तक इसकी पहुंच हो गई. चाय की तरह बिस्किट भी नाश्ते में शामिल हो गया. अगर आपकी किचन में बिस्किट का पैकेट है तो उसे चेक कीजिए. अगर वो बैन किए गए ब्रांड का बिस्किट हो तो उसे तत्काल नष्ट कर दें.