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Exclusive: भारत-चीन सीमा पर बसे देश के आखिरी गांव पर पड़ती है सूरज की पहली रोशनी

भले ही यह जमीन देश के दूसरे हिस्सों से क्यों न हो ज़ी न्यूज़ (Zee News) की टीम ने इस गांव में जाकर लोगों से मिलने का फैसला किया और यह समझने की कोशिश की कि इस गांव के लोग चीन सीमा (China border) से सटे इन इलाकों में किन समस्याओं से जूझ रहे हैं.

Exclusive: भारत-चीन सीमा पर बसे देश के आखिरी गांव पर पड़ती है सूरज की पहली रोशनी
अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) का डोंग (Dong) गांव भारत-चीन सीमा (India-China border) पर बसा देश का आखिरी गांव (last village) है

नई दिल्ली: देश के उत्तर पूर्व के सबसे पूर्वी हिस्से में बसे अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) का डोंग (Dong) गांव भारत-चीन सीमा (India-China border) पर बसा देश का आखिरी गांव (last village) है. इस गांव के बारे में शायद कुछ लोगों को ही पता होगा कि देश की धरती पर सूरज की सबसे पहली रोशनी अगर कहीं पड़ती है तो इसी डोंग गांव पर पड़ती है. भले ही यह जमीन देश के दूसरे हिस्सों से क्यों न हो ज़ी न्यूज़ (Zee News) की टीम ने इस गांव में जाकर लोगों से मिलने का फैसला किया और यह समझने की कोशिश की कि इस गांव के लोग चीन सीमा (China border) से सटे इन इलाकों में किन समस्याओं से जूझ रहे हैं.

दिल्ली (Delhi) से डोंग गांव (Dong Village) जाने के लिए सबसे पहले हम डिब्रूगढ़ (Dibrugarh) गए और यहां से फिर सड़क के रास्ते तेजू (Teju) पहुंचे और फिर हमारा वह सफर (suffer) शुरू हुआ जो सबसे मुश्किल था. तेजू से डोंग की दूरी करीब 270 किलोमीटर है और हमें यहां तक पहुंचने में दो दिन लग गए. हम जैसे ही डोंग पहुंचने वाले ही थे हमें रास्ते में नार्थ-ईस्ट (North-East) के पूर्वी हिस्से में स्थित एक ऐसी सड़क मिली जिसे "The most eastern road of North-East India" कहा जाता है.

डोंग गांव (Dong Village) से करीब दो किलोमीटर पहले ही हमें अपनी गाड़ी छोड़नी पड़ी. क्योंकि इसके बाद का रास्ता हमें ऐसे ही तय करना था. रास्ता संकरा था और गांव तक जाने के लिए हमें सस्पेंशन ब्रिज (Suspension bridge) यानि हैंगिंग ब्रिज (Hanging bridge) को पार करके जाना था. करीब 50 मीटर के इस ब्रिज (bridge) को पार करने का अनुभव बेहद डरावना था. लोहित नदी (Lohit River) के ऊपर बनी ये पुलिया पूरे समय हवा में हिलती रहती है.

भले ही डोंग (Dong) जाने में लंबा वक्त क्यों न लगता हो लेकिन घने जंगलों, नदियों और खूबसूरत नज़ारे से भरे ये इलाके दिल को छू लेते हैं. कुछ किलोमीटर का सफर तय कर के आखिकार हम डोंग गांव (Dong Village) पहुंच गए. डोंग गांव की आबादी 25-30 लोगों की है. महज 7 घरों के इस गांव के सामने पहाड़ी है और सुबह 4.30 से 4.45 के बीच सूरज के दर्शन होते हैं. 

हम जैसे ही डोंग गांव (Dong Village) पहुंचे हमें यहां गांव वाले मिले. गांव के सभी लोग हमें देख कर हैरान थे. डोंग (Dong) की बदहाली देख कर हमें काफी दुख हुआ. डोंग के इस इलाके को अगर टूरिस्ट प्लेस (Tourist Place) के तौर पर विकसित करने की कोशिश की जाए तो यहां बड़ा बदलाव लाया जा सकता है. इस गांव के लोग बेहद गरीबी में जी रहे हैं. जब हमने गांव की एक महिला से बात की तो पता चला कि आस-पास कोई हॉस्पिटल (Hospital) नहीं है और न ही कोई डॉक्टर (doctor) उपलब्ध है.

डोंग गांव (Dong Village) की महिला के मुताबिक गांव के आस-पास हॉस्पिटल (Hospital) न होने से अगर कोई बीमार हो जाए तो काफी दिक्कत होती है. गांव तक सड़क न होने से मरीजों (patient) को पैदल कई किलोमीटर दूर अस्पताल ले जाना होता है और अगर कोई महिला बीमार है या वो प्रेग्नेंट (Pregnant) है तो सही समय पर जरूरी चिकित्सा सुविधा (medical facility) न मिल पाने से दिक्कतें काफी बढ़ जाती हैं. डोंग गांव (Dong Village) के लोगों का कहना है कि कभी-कभी टूरिस्ट (Tourist) यहां घूमने आते हैं. उनमें से ज्यादातर भारतीय सेना (Indian Army) के लोग होते हैं जिनके आस पास कैंप (camp) हैं. लेकिन ऐसे टूरिस्ट की संख्या महज दो-चार ही होती है.