जल्द होगा DRDO के इस 'ब्रह्मास्त्र' ATAGS का आखिरी परीक्षण, रेंज जान कर दहल उठेंगे दुश्मन

DRDO Trials of Towed Artillery Gun: 'धनुष' के सेना में शामिल होने के बाद ATAGS स्वदेशी तोपों का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है. इस सेगमेंट के ग्लोबल टेंडर में इजराइली कंपनी एलबिट की ATHOS तोप सबसे सस्ती साबित हुई थी लेकिन उस पर आखिरी फैसला नहीं हो पाया.

जल्द होगा DRDO के इस 'ब्रह्मास्त्र' ATAGS का आखिरी परीक्षण, रेंज जान कर दहल उठेंगे दुश्मन
प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली: सबसे लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम स्वदेशी तोप यानी एडवांस टोड आर्टिलरी गन सिस्टम यानि ATAGS का आखिरी परीक्षण इसी महीने रेगिस्तान में किया जाएगा. तपती गर्मियों के दौरान रेगिस्तान में होने वाले ट्रायल के बाद ATAGS की सेना के लिए खरीद का रास्ता खुलने की संभावना है. इसकी रेंज 48 KM होने का दावा किया गया है. लेकिन पिछले साल हुए एक परीक्षण के दौरान इसकी नाल फटने की घटना के बाद इसे लेकर कई संदेह जाहिर किए गए थे.

DRDO के चेयरमैन डॉ. जी गोपाल रेड्डी ने कहा, 'ATAGS का प्रोजेक्ट पूरी तौर पर सफलता के साथ चल रहा है और जून में इसका गर्मी में रेगिस्तान का परीक्षण कर लिया जाएगा. धनुष के बाद 155 मिमी की ये दूसरी स्वदेशी तोप होगी जो भारतीय सेना में शामिल की जाएगी. वहीं DRDO द्वारा विकसित 155मिमी की ATAGS का पहला फायर 2016 में हुआ था.

स्वदेशी सेगमेंट का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट

स्वदेशी धनुष के सेना में शामिल होने के बाद ATAGS स्वदेशी तोपों का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है. हालांकि इस किस्म की तोपों के ग्लोबल टेंडर में इज़राइली कंपनी एलबिट की ATHOS तोप सबसे सस्ती साबित हुई थी लेकिन अभी तक उस पर आखिरी फैसला नहीं हो पाया है. ATAGS को भारत फोर्ज और टाटा पावर मिलकर बनाएंगे और दोनों को ही इन तोपों के ऑर्डर दिए जाएंगे. 

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कामयाब रहे हाई एल्टीट्यूड ट्रायल्स

ATAGS को हाई एल्टीट्यूड ट्रायल्स के लिए उत्तरी सिक्कम के लुकरेप ले जाया गया था. इसने 500 किमी की पहाड़ी रास्तों की दूरी को आसानी से पार किया. यहां परीक्षण के लिए इन तोपों को 15000 फीट से ज्यादा ऊंचाई तक ले जाया गया. वहां 10 दिनों तक इस तोप के जितने भी परीक्षण हुए सब कामयाब रहे थे.

ATAGS के वजन को लेकर भारतीय सेना ने सवाल खड़े किए थे. ATAGS का 18 टन का वजन इसे पहाड़ों पर तैनात करने में रुकावट साबित हो सकता है.साथ ही इसकी कीमत भी इजराइली तोप ATHOS से ज्यादा है. सेना के टेंडर में ऐसी 400 तोपों को कंपनी से सीधे खरीदा जाना है वहीं 1180 तोपों को ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड कंपनी की तकनीक के आधार पर बनाएगी.

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