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जम्मू कश्मीर में बढ़ी नशे की खपत, गिरफ्त में फंस रहे 12 से 25 वर्ष के युवा

जिला कुपवाड़ा के SSP श्रीराम ने बताया कि पाकिस्तान से आने वाले घुसपैठिए ही ड्रग्स लाते हैं. उन्होंने बताया कि हाल ही में बड़े ज़खीरे पकड़े गए.

जम्मू कश्मीर में बढ़ी नशे की खपत, गिरफ्त में फंस रहे 12 से 25 वर्ष के युवा
डॉ. यासिर कहते हैं कि ड्रग एडिक्शन के बढ़ने का कारण है ड्रग का आसानी से मिलना. उन्होंने कहा कि मरीज़ बताते हैं कि एक फ़ोन कॉल पर ड्रग मिल सकता है.

कश्मीर: जम्मू कश्मीर के युवा अब नशे की गिरफ्त में भी आ चुके हैं. पिछले दो सालों में कश्मीर में कभी ना मिलने वाले कोकीन, हेरोइन, ब्राउन शुगर और स्मैक जैसे नशे आम हो चुके हैं. पुलिस के मुताबिक, नशे की खेप पाकिस्तान से आ रही है. ड्रग एब्यूज पर बनी एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक दशक में जम्मू कश्मीर में नशे की खपत 40-50 फीसदी बढ़ गई है. जिसमें 12 वर्ष से 25 वर्ष तक के युवाओं की तादाद सब से ज्यादा है. 

जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी समस्या अब तक आतंकवाद दिख रही थी, लेकिन अब यहां ड्रग्स ने अपना ज़हरीला जाल बिछा लिया है. हाल ही में एक ग्रुप के सर्वे में यह बात सामने आयी है कि राज्य के 40-50 फीसदी युवा उन नशों को इस्तेमाल करते है, जो दो साल पहले राज्य में कहीं मिलते भी नहीं थे. 

श्रीनगर के स्टेट अस्पताल के ड्रग डी-एडिक्शन सेंटर में इलाज करवा रहे दक्षिण कश्मीर का एक युवा ने बताया कि दक्षिणी कश्मीर के संगम इलाके में यह नशा खुले आम बिकता है. युवक की मानें तो कुछ घर है जहां यह सब ड्रग बेचते है और कई जगह ऐसी है जहां नशा करने वाला बेखौफ इनका इस्तेमाल करता है. युवक का आरोप है कि नशे के इन कारोबारियों के साथ पुलिस भी मिली हुई है. 

वहीं, एक अन्य युवक ने बताया कि जिला पुलिस को कई बार इस कारोबार के बारे में बताया. कुछ को पकड़वाया भी मगर दूसरे दिन वो फिर रिहा हो गए. उसने बताया कि मुझे इन नशे के कारोबारियों से धमकी भी मिली. डी-एडिक्शन सेंटर के डॉक्टर इस बढ़ते नशे की लत को काफी गंभीर मानते हैं. 

यहां काम करने वाले डॉक्टर सलीम ने कहा कि घाटी में चरस का नशा तो था मगर आजकल हेरोइन के मरीज़ पाए जाते है. डॉक्टर के मुताबिक रोज ऐसे 8 मरीज़ हर दिन दाखिल होते हैं और अगर ओपीडी की बात करें तो 30 मरीज़ तक देखे जाते हैं. 

डॉ. यासिर कहते हैं कि ड्रग एडिक्शन के बढ़ने का कारण है ड्रग का आसानी से मिलना. उन्होंने कहा कि मरीज़ बताते हैं कि एक फ़ोन कॉल पर ड्रग मिल सकता है. उन्होंने कहा कि ड्रग्स पर नकेल कसने के लिए कानून को सख्ती से लागू करना होगा. उन्होंने कहा कि नशे की लत के कारण अपराध भी बढ़ रहा है. कश्मीर में स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और सेना ने कई जगहों पर ड्रग डी-एडिक्शन सेंटर खोले हैं. युवाओं को ड्रग्स की गिरफ्त से निकालने के लिए कई इलाकों में जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है. 

जिला कुपवाड़ा के SSP श्रीराम ने बताया कि पाकिस्तान से आने वाले घुसपैठिए ही ड्रग्स लाते हैं. उन्होंने बताया कि हाल ही में बड़े ज़खीरे पकड़े गए. पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों से नशे की खेप भारत पहुंचती है. उन्होंने कहा कि काफी लोगों को पकड़ा गया है और आने वाले समय में यह कार्रवाई जारी रहेगी. सुरक्षा एजेंसियों की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो सालों में जम्मू-कश्मीर में जो ड्रग्स बरामद की गई है, उनमें से 60 फीसदी पाकिस्तान से सप्लाई की गई है. 25 फीसदी ड्रग्स पंजाब से सप्लाई की गई. कुछ जम्मू कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों से लाई गई है.