DSP देविंदर पर ZEE NEWS का बड़ा खुलासा, 2001 में आतंकियों की इस तरह की थी मदद

आतंकियों से जुड़े कनेक्शन मामले में जम्मू-कश्मीर से गिरफ्तार डीएसपी देविंदर सिंह मामले में केन्द्रीय खुफिया एजेंसी आईबी की टीम को एक बेहद महत्वपूर्ण जानकारी मिली है. 

DSP देविंदर पर ZEE NEWS का बड़ा खुलासा, 2001 में आतंकियों की इस तरह की थी मदद

जम्मू कश्मीर: आतंकियों की मदद करने के मामले में जम्मू-कश्मीर से गिरफ्तार डीएसपी देविंदर सिंह के मामले में केन्द्रीय खुफिया एजेंसी आईबी की टीम को एक बेहद महत्वपूर्ण जानकारी मिली है, सुत्रों के मुताबिक साल 2005 में दिल्ली पुलिस द्वारा सात संदिग्ध आतंकियों को साउथ वेस्ट डिस्ट्रिक्ट की स्पेशल स्टाफ़ पुलिस ने गिरफ्तार किया था. गिरफ्तार आरोपियों के पास से AK-47 और काफी संख्या में नकली करेंसी भी बरामद हुई थी. लेकिन उन संदिग्ध गिरफ्तार आतंकियों में से एक आतंकी हाजी गुलाम मोइनुद्दीन डार उर्फ जाहिद के पास से जो दस्तावेज़ बरामद हुए थे, उसमें डीएसपी देविंदर सिंह ने संधिग्ध आतंकी को कहीं भी आने जाने की अनुमति देने का पत्र दिया था, हाजी गुलाम मोईनुद्दीन को स्पेशल ड्यूटी का बताकर उसके पास मौजूद हथियार और वायरलैस सेट को भी ड्यूटी का सामान बताया था.

ज़ी न्यूज़ के पास मौजूद उस एक्सक्लूसिव लेटर का मजमून कुछ इस तरह से था..'गुलाम मोइनुद्दीन जो पुलवामा के रहने वाले हैं. ये हमेशा अपने पास पिस्टल और एक वायरलेस सेट रखते हैं, इसलिए सभी फोर्स से अनुरोध है कि उसे बिना कोई पूछताछ/ जांच पड़ताल के जाने दिया जाए. कहीं भी उसे रोका नहीं जाए" इस महत्वपूर्ण डॉक्युमेंट को आरोपी डीएसपी देविंदर सिंह ने 2001 में अपने लेटर हैड पर अपने हस्ताक्षर सहित दिया था. स्पेशल सेल के सूत्रों के मुताबिक गुलाम मोइनुद्दीन की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस की टीम ने उस वक्त देविंदर सिंह से बातचीत की थी और उस मामले में जानकारी मांगी थी. तब देविंदर सिंह ने फोन करके उस खत को सही ठहराया था. जिसका फायदा कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान हुआ और आरोपी को उसका फायदा मिल गया था.

लेकिन सबसे बड़ा सवाल जो उस वक्त था कि कैसे कोई पुलिस अधिकारी किसी प्राइवेट शख़्स को वायरलेस सेट लेकर जाने की इजाजत दे सकता है. MI यानी मिलिट्री इंटेलिजेंसी ने दिल्ली पुलिस को इनपुट दिया था, की ये लोग आतंकी हैं, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सात लोगों को गिरफ्तार किया था ,लेकिन उसमें से एक संदिग्ध आतंकी के पास देविंदर सिंह का लिखा हुआ खत मिलना अपने आप में कई सवाल उठाता है.

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MI के सूत्रों के मुताबिक अगर उसी वक्त यानी साल 2005 में ही अगर जम्मू -कश्मीर पुलिस MI और दिल्ली पुलिस की इस रिपोर्ट को अगर गंभीरता से लेती तो देविंदर सिंह और आतंकियों की सांठगांठ का खुलासा तभी हो जाता.