अलगाववादियों की रैली के मद्देनजर श्रीनगर में प्रतिबंध, रेल सेवाओं को किया गया रद्द

अलगाववादियों द्वारा बुलाई गई विरोध रैली के मद्देनजर शुक्रवार को अनंतनाग और श्रीनगर के कई हिस्सों में प्रतिबंध लगाए गए हैं.

अलगाववादियों की रैली के मद्देनजर श्रीनगर में प्रतिबंध, रेल सेवाओं को किया गया रद्द
प्रशासन ने एहतियात के तौर पर कश्मीर से बनिहाल जाने वाली रेल सेवाओं को रद्द कर दिया है.(फाइल फोटो)

श्रीनगर: अलगाववादियों द्वारा बुलाई गई विरोध रैली के मद्देनजर शुक्रवार को अनंतनाग और श्रीनगर के कई हिस्सों में प्रतिबंध लगाए गए हैं. सैयद अली गिलानी, मीरवाइज उमर फारुख और मुहम्मद यासीन मलिक के नेतृत्व में अलगाववादी धड़े ज्वाइंट रेजिस्टेंस लीडरशिप (जेआरएल) ने दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में रैली का आह्वान किया है. पुलिस अधिकारी ने बताया, "कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीआरपीसी की धारा 144 के तहत अनंतनाग और श्रीनगर जिले के छह पुलिस थाना क्षेत्रों में प्रतिबंध लगाए गए हैं.

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पुलिस अधिकारी ने बताया, "रैनवाड़ी, नौहट्टा, एम.आर.गंज, सफा कदल में प्रतिबंध लगाए गए हैं, जबकि मैसूमा और क्रालखड में आंशिक प्रतिबंध लगाए गए हैं.

प्रशासन ने एहतियात के तौर पर कश्मीर से बनिहाल जाने वाली रेल सेवाओं को रद्द कर दिया है. पुलिस ने कुछ अलगाववादी नेताओं को रैली में शामिल होने से रोकने के लिए उन्हें गिरफ्तार किया है. कश्मीर घाटी में शुक्रवार को होने वाली स्कूली परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं. 

कश्मीर विलय से जुड़ी खास बातें
- 1947 में ब्रिटेन ने भारत से आपना शासन हटाने और भारत के 30 करोड़ लोगों को आज़ादी देने का फैसला किया था. उस समय मध्य और दक्षिण भारत में हिंदुओं की आबादी बहुसंख्यक थी..जबकि पूर्व और उत्तर पश्चिम भारत में  मुस्लिम जनसंख्या ज्यादा थी. 

- ब्रिटेन के आयोग ने धार्मिक आधार पर अखंड भारत को मुस्लिम जनसंख्या वाले..पाकिस्तान और हिंदू जनसंख्या वाले भारत में बांटने का फैसला किया.

- भारत की रियासतों में से सिर्फ जम्मू कश्मीर ही एक ऐसी रियासत थी..जिसकी बहुसंख्यक मुस्लिम जनसंख्या पर हिंदू शासक महाराज हरि सिंह का नियंत्रण था
और यही बात पाकिस्तान के गले नहीं उतर रही थी..जबकि जम्मू कश्मीर का भारत में बने रहना भारत की सर्वधर्म समभाव वाली छवि से मेल खाता था.

- इसी जलन की वजह से 1947 में पाकिस्तान के North West Frontier Province के रास्ते कबाइली हमलावरों ने पाकिस्तानी सरकार की मदद से कश्मीर पर हमला कर दिया.

- इसी बीच अक्टूबर 1947 में कश्मीर का भारत में विलय हो गया..और पाकिस्तान समर्थित हमलावरों से मुकाबले के लिए भारतीय सेना कश्मीर भेजी गई.

- इसके बाद 1 जनवरी 1948 को भारत, कश्मीर विवाद का हल ढूंढने के लिए United Nations security Council चला गया.

- इसके बाद 1 जनवरी 1949 को दोनों देशों के बीच सीज़फायर लाइन अस्तित्व में आई लेकिन तब तक पाकिस्तान कश्मीर के एक बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर चुका था जिसे आज Pak Occupied कश्मीर यानी PoK के नाम से जाना जाता है.

- इसके बाद 1962 में भारत चीन युद्ध के दौरान चीन  ने लद्दाख के एक बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया जिसे अब अक्साइ चिन कहा जाता है... आपको बता दें कि अक्साइ चिन पर आज भी चीन का कब्जा है.  

- इसके बाद 1963 में चीन और पाकिस्तान के बीच हुए एक समझौते के दौरान पाकिस्तान ने POK का 5180 वर्ग किलोमीटर का इलाका गैरकानूनी ढंग से चीन को सौंप दिया.

- 1970 में पाकिस्तान में गिलगित Agency और बाल्टिस्तान District को मिलाकर Northern Area बना दिया..जिसका एक बड़ा हिस्सा 1963 से ही चीन के कब्जे में है.

इनपुट भाषा से भी