जानें क्‍या होता है रिक्‍टर स्‍केल, भूकंप की कितनी तीव्रता पर होता है कितना नुकसान?

दिल्ली-एनसीआर समेत भारत के कई हिस्सों में बुधवार (9 मई) को भूकंप के झटके महसूस किए गए. रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 6 आंकी गई. दिल्ली-एनसीआर के अलावा हिमाचल, पंजाब और राजस्थान के कई हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं. 

जानें क्‍या होता है रिक्‍टर स्‍केल, भूकंप की कितनी तीव्रता पर होता है कितना नुकसान?

नई दिल्‍ली : दिल्ली-एनसीआर समेत भारत के कई हिस्सों में बुधवार (9 मई) दोपहर करीब सवा चार बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए. रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 6.2 आंकी गई. दिल्ली-एनसीआर के अलावा हिमाचल, पंजाब और राजस्थान के कई हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं. यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (यूएसजीएस) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता 6.2 थी, जोकि अफगानिस्‍तान-ताजिकिस्‍तान-पाकिस्‍तान क्षेत्र में आया. भूकंप का केंद्र अफगानिस्‍तान के हिंदुकुश में था.

आपको बता दें कि रिक्‍टर स्‍केल पर जितना ज्‍यादा भूकंप मापा जाता है, जमीन में उतना ही अधिक कंपन होती है. मसलन, रिक्टर पैमाने पर 7.9 तीव्रता का भूकंप आने पर इमारतें तक गिर जाती हैं. वहीं, 2.9 रिक्टर स्केल पर भूकंप आने पर हल्का कंपन होता है. दरअसल, रिक्टर पैमाना भूकंप की तरंगों की तीव्रता मापने का एक गणितीय पैमाना है. किसी भूकंप के समय भूमि के कंपन के अधिकतम आयाम और किसी आर्बिट्रेरी छोटे आयाम के अनुपात के साधारण गणित को 'रिक्टर पैमाना' कहते हैं.

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असम में 'रिक्टर स्केल' अमेरिकी भौतिक विज्ञानी चार्ल्स एफ रिक्टर के नाम पर है. चार्ल्स रिक्टर कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी से जुड़े थे और उन्होंने लगभग 200 से अधिक भूकंपों का अध्ययन करके रिक्टर स्केल नमूने का विकास किया. रिक्टर स्केल का सर्वप्रथम प्रयोग सन् 1935 में किया गया था.

क्या है रिक्‍टर स्‍केल पर भूकंप के पैमाने और भूकंप की तीव्रता से असर...

0 से 1.9 : इस तीव्रता पर भूकंप आने पर सिर्फ सीज्मोग्राफ से ही पता चलता है.
2 से 2.9 : इस तीव्रता का भूकंप आने पर हल्का कंपन होता है.
3 से 3.9 : ऐसा असर होता है, जैसे कोई ट्रक आपके नजदीक से गुजरा हो.
4 से 4.9 : खिड़कियां टूट सकती हैं. दीवारों पर टंगे फ्रेम भी गिर सकते हैं.
5 से 5.9 : फर्नीचर हिल सकता है.
6 से 6.9 : इमारतों की नींव भी दरक सकती है और ऊपरी मंजिलों को नुकसान हो सकता है.
7 से 7.9 : इस तीव्रता में इमारतें गिर जाती हैं और जमीन के अंदर मौजूद पाइप भी फट जाते हैं.
8 से 8.9 : इमारतों सहित बड़े पुल भी गिर जाते हैं.
9 और उससे ज्यादा तीव्रता : इस तीव्रता का भूकंप काफी तबाही मचाता है. यह भूकंप इतना तेज होता है कि अगर कोई मैदान में खड़ा हो तो उसे धरती लहराते हुए दिखेगी. अगर समंदर नजदीक हो तो सुनामी आ सकती है.