BikeBot घोटाले के आरोपी संजय भाटी पर ED की बड़ी कार्रवाई, 103 करोड़ की संपत्ति अटैच

गौतमबुद्व नगर के दादरी के रहने वाले संजय भाटी ने अगस्त 2017 में इस ठगी की शुरूआत की थी. उसने अपनी कंपनी GIPL के जरिए देश भर के करीब 2.50 लाख लोगों के साथ ठगी की.     

BikeBot घोटाले के आरोपी संजय भाटी पर ED की बड़ी कार्रवाई, 103 करोड़ की संपत्ति अटैच
फाइल फोटो

नई दिल्‍ली: BikeBot Scam के जरिए लाखों लोगों से ठगी करने वाले मामले में ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए संजय भाटी की 103.73 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच कर दी है. ईडी ने यह कदम मनी लॉड्रिंग कानून के तहत उठाया. ED ने संजय भाटी और ठगी करने वाली उसकी कंपनी की गौतमबुद्व नगर, गाजियाबाद, बुलंदशहर, कानपुर और इंदौर में 101.45 करोड़ रुपये की 26 संपत्ति अटैच की है. इसके अलावा 22 बैंकों में जमा 2.28 करोड़ रुपये भी अटैच किए गए हैं. 

ऐसे की थी ठगी की शुरुआत 
गौतमबुद्व नगर के दादरी के रहने वाले संजय भाटी ने अगस्त 2017 में इस ठगी की शुरूआत की थी. उसने अपनी कंपनी GIPL के जरिए देश भर के करीब 2.50 लाख लोगों के साथ ठगी की. संजय भाटी ने कंपनी के जरिए BikeBot नाम की पोंजी स्कीम चलाई. लोगों को कहा गया कि वो इस स्कीम के जरिए 1 से लेकर 7 बाइक में निवेश कर सकते हैं. 

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कंपनी खरीदी गई बाइक को चलाने और रखरखाव का भी ध्यान रखेगी और निवेशकों को बदले में किराए से लेकर प्रॉफिट शेयर भी दिया जाएगा. यानी कि अगर एक निवेशक 62 हजार निवेश करता है तो बदले में उसे हर महीने करीब 9 हजार रुपये दिए जाएंगे. भाटी ने कहा था कि कंपनी इन बाइक को बाइक टैक्सी के तौर पर चलाएगी और इससे होने वाला मुनाफा निवेशकों के साथ बांटा जाएगा. 

फिर दूसरे प्‍लान के नाम पर भी की ठगी 
ED की जांच के मुताबिक निवेशकों ने लालच में आकर संजय भाटी की कंपनी में निवेश किया लेकिन कंपनी ने नंवबर 2018 में एक और E-Bike के नाम से नया प्लान शुरू कर दिया. निवेशकों को कहा गया कि पेट्रोल बाइक को लेकर दिक्कतें आ रहीं हैं इसलिए E-Bike के जरिए नए निवेशक जोड़े गए और ये प्लान पहले वाले से मंहगा बताया गया. भाटी ने बताया कि E-Bike का रजिस्ट्रेशन मंहगा है इसलिए ये प्लान मंहगा है. 

इससे पहले निवेश करने वाले लोगों को अभी तक अपना पैसा मिल रहा था इसलिए लोगों ने भरोसा कर इस प्लान में भी निवेश करना शुरू कर दिया. कंपनी ने E-Bike के नाम पर जमा किए पैसों से पहले वाले निवशकों को पैसे बांटे और दूसरी कंपनियों में निवेश के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों में संपत्ति जमा की. 

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जब लोगों को अपने निवेश किए पैसों के बदले कुछ नहीं मिला तो कंपनी से संपर्क किया गया लेकिन संजय भाटी ने और उसकी कंपनी के किसी आदमी से बात नहीं हो सकी जिसके बाद लोगों नें नोएडा पुलिस में मामला दर्ज करवाया. पुलिस ने जनवरी 2019 में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया और फिर जून में ED ने मनी लॉड्रिंग का मामला दर्ज कर जांच शुरू की और 12 जगहों पर छापेमारी की. नोएडा पुलिस ने भी इस मामले में संजय भाटी समेत 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया था. 

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