Oath Rules After Election Result: भारत में जब भी चुनाव होते हैं और चुनावों के परिणाम घोषित होते हैं तो उसके बाद सबसे बड़ा सवाल जनता के मन में यही रहता है कि शपथ कब ली जाएगी? चलिए आज हम आपको इसी सवाल का जवाब देंगे कि क्या शपथ लेने की भी एक समय सीमा होती है या नहीं.
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Oath Rules After Election Result: आपने नोटिस किया होगा कि कई बार चुनाव जीतते ही पार्टी अपने नेता का नाम घोषित कर देती हैं, लेकिन कभी चुनाव जीतने के 5 से 7 दिन तक शपथ का कुछ पता नहीं होता है. ऐसे में आम आदमी के मन में यही सवाल होता है कि क्या शपथ ग्रहण समारोह को लेकर कोई समय सीमा है या नहीं, या ये सब नेताओं के मन की मर्जी है. चलिए जानते हैं.
शपथ ग्रहण की समय सीमा
दरअसल, भारत के संविधान में निर्वाचित प्रतिनिधियों या मुख्यमंत्रियों के लिए पद की शपथ लेने की कोई तय समय सीमा नहीं है. शपथ का कार्यक्रम आमतौर पर चुनाव जीतने के बाद ही शुरू हो जाता है. पार्टियां कोशिश करती हैं कि जल्द से जल्द शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन हो. लेकिन इसकी कोई तय समय सीमा नहीं होती है. आमतौर पर देखें तो ज्यादातर राज्यों में चुनावी नतीजे आने के 10 दिनों के भीतर शपथ ग्रहण समारोह करवा दिया जाता है. दरअसल, शपथ कब ली जाएगी इसका फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि चुनाव जीतने वाली पार्टी या गठबंधन कब सरकार बनाने का दावा पेश करता है.
ये है पूरी प्रक्रिया
चुनाव परिणाम घोषित होते ही सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. मतगणना समाप्त होने के बाद चुनाव आयोग अंतिम रिजल्ट घोषित करता है और संबंधित राज्य विधानसभा या सदन को जीते हुए उम्मीदवारों के नाम की औपचारिक रूप से बताता है. चुनाव परिणाम के बाद जिस दल या गठबंधन के पास बहुमत होता है वो राज्य में राज्यपाल और केंद्र में राष्ट्रपति के पास सरकार बनाने का दावा पेश करने जाते हैं. इस दावे पर जीते हुए उम्मीदवारों के समर्थन पत्र भी होने चाहिए. इससे ये साबित होता है कि सच में इस दल के पास बहुमत है.
सरकार बनाने को आमंत्रित
जब राष्ट्रपति या राज्यपाल इस बात से संतुष्ट हो जाते हैं कि किसी दल या गठबंधन के पास पूर्ण बहुमत है तो वे उसके नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं. इसके बाद जीते हुए सदस्य एक मीटिंग करते हैं और अपने नेता चुनते हैं. केंद्र में सांसद प्रधानमंत्री को चुनते हैं और राज्य में विधायक राज्यपाल को चुनते हैं. इसके बाद नेता अपने मंत्री परिषद का चयन शुरू करते हैं. विधानसभा की बात करें तो यहां कुल सदस्यों के 15 फीसदी से ज्यादा सदस्यों को मंत्री नहीं बनाया जा सकता है. इसके बाद प्रोटोकॉल के साथ शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाता है.
Disclaimer प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. Zee News इसकी पुष्टि नहीं करता है