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आतंकियों पर आसमान से नजर रखेगा भारत, ISRO ने लॉन्च किया एमिसैट

सुबह 9.27 बजे उड़ान भरने के लगभग 17 मिनट बाद रॉकेट 749 किलोमीटर दूर स्थित कक्षा में 436 किलोग्राम के एमीसेट को प्रक्षेपित किया. 

आतंकियों पर आसमान से नजर रखेगा भारत, ISRO ने लॉन्च किया एमिसैट
फोटो साभार : ANI

नई दिल्ली : अंतरिक्ष की दुनिया में लगातार इतिहास रचने वाले भारत ने आज एक और कामय़ाबी हासिल की है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सोमवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से आज सुबह 9.27 पर भारतीय रॉकेट पोलर सैटेलाइट लांच व्हीकल (पीएसएलवी) द्वारा इलेक्ट्रॉनिक इंटेलीजेंस उपग्रह, एमिसैट का प्रक्षेपण किया गया. 

 

सुबह 9.27 बजे उड़ान भरने के लगभग 17 मिनट बाद रॉकेट 749 किलोमीटर दूर स्थित कक्षा में 436 किलोग्राम के एमीसेट को प्रक्षेपित किया. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "सामरिक क्षेत्रों से उपग्रहों की मांग बढ़ गई है. .

27 घंटे की गिनती खत्म होने के बाद इसरो के विश्वसनीय प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-क्यूएल के नए प्रकार करीब 50 मीटर लंबे रॉकेट का यहां से करीब 125 किलोमीटर दूर श्रीहरिकोट अंतरिक्ष केंद्र से सुबह नौ बजकर 27 मिनट पर प्रक्षेपण किया गया. एमीसैट उपग्रह का उद्देश्य विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम को मापना है. इसरो के अनुसार, प्रक्षेपण के लिए पहले चरण में चार स्ट्रैप-ऑन मोटर्स से लैस पीएसएलवी-क्यूएल रॉकेट के नए प्रकार का इस्तेमाल किया जाएगा. 

पीएसएलवी का भारत के दो अहम मिशनों 2008 में ‘‘चंद्रयान’’ और 2013 में मंगल ऑर्बिटर में इस्तेमाल किया गया था. यह जून 2017 तक 39 लगातार सफल प्रक्षेपणों के लिए इसरो का सबसे भरोसेमंद और बहु उपयोगी प्रक्षेपण यान है. इस मिशन में इसरो के वैज्ञानिक तीन अलग-अलग कक्षाओं में उपग्रहों और पेलोड को स्थापित करेंगे जो एजेंसी के लिए पहली बार होगा.

अन्य 28 अंतरराष्ट्रीय उपग्रहों में लिथुआनिया के दो, स्पेन का एक, स्विट्जरलैंड का एक और अमेरिका के 24 उपग्रह शामिल हैं. इसरो ने बताया कि इन सभी उपग्रहों का वाणिज्यिक समझौतों के तहत प्रक्षेपण किया जा रहा है. फरवरी में इसरो ने फ्रेंच गुआना से भारत का संचार उपग्रह जीसैट-31 प्रक्षेपित किया था.

जुलाई में भी रचा जाएगा इतिहास
भारत जुलाई या अगस्त में किसी समय अपने नए स्मॉल सेटेलाइट लांच व्हीकल (एसएसएलवी) रॉकेट से दो या ज्यादा रक्षा उपग्रहों को भी लांच करेगा. एमीसेट को कक्षा में रखकर रॉकेट 28 विदेशी उपग्रहों (अमेरिका के 24, लिथुआनिया के दो और स्पेन तथा स्विट्जरलैंड के एक-एक उपग्रह) को 504 किलोमीटर की ऊंचाई पर प्रक्षेपित करने के लिए वापस आएगा. इन सभी 28 उपग्रहों का वजन लगभग 220 किलोग्राम है. ऐसा करने के बाद भारत कुल 297 विदेशी उपग्रहों को कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर लेगा.