फॉर्मूला मिलने के बाद भी दूसरी कंपनियों के लिए आसान नहीं Covaxin का निर्माण

सूत्रों के मुताबिक इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड, जो Covaxin drug substance का निर्माण करेगी, को अपनी बीएसएल -2+ रेबीज सुविधा को फिर से तैयार करने में कम से कम तीन महीने लगेंगे और पूर्ण उत्पादन अक्टूबर के बाद ही शुरू होगा.

फॉर्मूला मिलने के बाद भी दूसरी कंपनियों के लिए आसान नहीं Covaxin का निर्माण
फाइल फोटो.

हैदराबाद: बीते दिनों वैक्सीन निर्माण (Vaccine Production) की दिशा में एक बेहद ही सकारात्मक खबर आई कि भारत बायोटेक (Bharat Biotech) के अलावा दूसरी कंपनियां भी स्वदेशी वैक्सीन ‘कोवैक्सीन’ (Covaxin) का निर्माण करने लगेंगी. अगर ऐसा होता है तो भारत की क्षमता में इजाफा होगा और वैक्सीन की कमी दूर होगी लेकिन अब विशेषज्ञों ने जो कहा है उससे फिलहाल इन प्रयासों पर पानी फिरता दिख रहा है.

भारत में कोवैक्सीन बनाने लायक और कंपनियां ही नहीं?
दरअसल वैक्सीन निर्माता कंपनी भारत बायोटेक (Bharat Biotech) कोवैक्सिन 'फॉर्मूला' (Covaxin Forlmula)  शेयर करने को तैयार हो गई. इसके बाद नीति आयोग ने इच्छुक वैक्सीन निर्माताओं को आगे आने के लिए आमंत्रित किया लेकिन देश में बहुत कम ही कंपनी डेड वायरस वैक्सीन बनाने के लिए Equipped पाई गईं. 

आसान नहीं कोवैक्सीन का फॉर्मूला
बायोकॉन की संस्थापक चेयरपर्सन किरण मजूमदार-शॉ ने भी इस बाबत ट्वीट किया, 'वैक्सीन मेकर्स की कमी को दूर करने की मंशा से कोवैक्सिन का उत्पादन करने के लिए अन्य निर्माताओं को आमंत्रित किया- यह देखने के लिए कि कितनी कंपनियां इसके लिए तैयार हैं लेकिन वास्तव में कोई भी लाइव वायरस से निपटना या इसके साथ काम करना नहीं चाहता है. बाकी दुनिया में, कोई भी ऐसा करने की हिम्मत नहीं करेगा, इसलिए ज्यादातर निर्माता प्रोटीन आधारित टीकों का विकल्प चुनते हैं. महामारी के संदर्भ में, वैक्सीन विकसित करने का सबसे तेज तरीका लाइव वायरस को लेना और उसे निष्क्रिय करना है.' 

'यह कोई मजाक नहीं'
वैक्सीन अग्रणी और शांता बायोटेक के संस्थापक केआई वरप्रसाद रेड्डी (KI Varaprasad Reddy) कहते हैं 'एक वैक्सीन का कोई फॉर्मूला नहीं होता है, इसकी एक प्रक्रिया और तकनीक होती है. यहां तक ​​​​कि यह तकनीक अगर दूसरों को भी मिलती भी है, तो उन्हें अनुकूल होने और उत्पादन शुरू करने में कम से कम 6-8 महीने से एक साल तक का समय लगेगा, क्योंकि BSL-3 सुविधा के सत्यापन में ही 3-6 महीने लगेंगे. साथ ही, लोगों को लाइव वायरस से निपटने के लिए कम से कम छह महीने की ट्रेनिंग देनी होगी. यह एक मजाक नहीं है.' 

BSL-3 सुविधाएं स्थापित करने में लगता है समय
सूत्रों के मुताबिक इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड, जो Covaxin drug substance का निर्माण करेगी, को अपनी बीएसएल -2+ रेबीज सुविधा को फिर से तैयार करने में कम से कम तीन महीने लगेंगे और पूर्ण उत्पादन अक्टूबर के बाद ही शुरू होगा. भारत इम्यूनोलॉजिकल्स एंड बायोलॉजिकल्स के साथ-साथ कोवैक्सिन बनाने के लिए भारत सरकार द्वारा शामिल हैफकिन इंस्टीट्यूट को भी बीएसएल -3 सुविधाएं स्थापित करने में कुछ महीने लगेंगे. 

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BSL-3 सुविधा की आवश्यक
Covaxin बनाने के लिए BSL-3 सुविधा की आवश्यकता के बारे में बताते हुए, सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) के पूर्व निदेशक और अब सलाहकार डॉ राकेश के मिश्रा बताते हैं कि Covaxin को लाइव SARS-CoV-2 वायरस को बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर BSL-3 सुविधा की आवश्यकता होती है. विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत में एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड वैक्सीन कोविशील्ड या यहां तक ​​कि एमआरएनए वैक्सीन जैसे फाइजर बायोएनटेक या मॉडर्ना का निर्माण करना आसान हो सकता है क्योंकि उन्हें बीएसएल-3 सुविधाओं की आवश्यकता नहीं होती है लेकिन Covaxin का निर्माण आसान नहीं है. 

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