बेटी की परीक्षा तक पिता के नौकरी पर पहुंचने की तारीख टाले ICCR: कैट

केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने आईसीसीआर को निर्देश दिए हैं कि वह स्थानांतरित किए गए एक कर्मचारी के नौकरी पर आने की तिथि को उसकी बेटी की बोर्ड परीक्षाओं के पूरा हो जाने तक टाल दे क्योंकि घर पर उसकी (पिता की) गैरमौजूदगी से लड़की पर गहरा मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ सकता है और इससे उसका करियर भी बर्बाद हो सकता है।

नई दिल्ली : केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने आईसीसीआर को निर्देश दिए हैं कि वह स्थानांतरित किए गए एक कर्मचारी के नौकरी पर आने की तिथि को उसकी बेटी की बोर्ड परीक्षाओं के पूरा हो जाने तक टाल दे क्योंकि घर पर उसकी (पिता की) गैरमौजूदगी से लड़की पर गहरा मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ सकता है और इससे उसका करियर भी बर्बाद हो सकता है।

पी के बसु की अध्यक्षता वाले न्यायाधिकरण ने भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के महानिदेशक से कहा कि वह आनंद कुमार के नौकरी पर पहुंचने की तारीख को थोड़ा बढ़ा दें। आनंद कुमार का स्थानांतरण नयी दिल्ली से पुणे स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में 31 मार्च 2015 तक के लिए कर दिया गया था।

हालांकि न्यायाधिकरण ने यह भी कहा कि सरकारी अधिकारियों द्वारा स्थानांतरण के आदेशों को निलंबित या रद्द करवाने के लिए बार-बार करवाए जाने वाले प्रयासों को प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए। आवेदक द्वारा नौकरी पर पहुंचने की तिथि को बढ़ाने के लिए किया गया अनुरोध एक साल में दो बार आईसीसीआर द्वारा स्वीकार किया जा चुका है।

जब न्यायाधिकरण ने पाया कि नौकरी पर पहुंचने की विस्तारित तारीख पहले ही पार हो चुकी है और कुमार अब तक नई तैनाती वाली जगह पर नौकरी पर नहीं पहुंचे हैं, तो उसने कहा, ‘नौकरी पर पहुंचने की तिथि में विस्तार पाने के लिए इस न्यायाधिकरण के समक्ष आने से पहले स्थानांतरण आदेश को विफल करने के आवेदक :कुमार: के प्रयासों की झलक मिलती है।’

न्यायाधिकरण ने कहा, ‘सरकारी कर्मचारियों द्वारा आदेशों की इस तरह की अवज्ञा को किसी कीमत पर बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए।’ न्यायाधिकरण ने आगे कहा, ‘हालांकि इस बात पर गौर करते हुए कि इससे एक बच्ची का अकादमिक करियर भी जुड़ा हुआ है और बोर्ड परीक्षाओं के समय उसके पिता की घर में गैरमौजूदगी से बच्ची पर गहरा मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ सकता है, जिसके कारण उसकी परीक्षाएं और फिर करियर बिगड़ने का खतरा है, प्रतिवादियों (आईसीसीआर अधिकारियों) को ये निर्देश दिए जाते हैं कि नौकरी पर पहुंचने की तारीख को 31 मार्च 2015 कर बढ़ा दिया जाए।

ऐसा आवेदक की ओर से यह शपथपत्र देने पर किया जाए, कि वह नए स्थान (पुणे) में एक अप्रैल 2015 को नौकरी पर पहुंच जाएगा और इसके बाद नौकरी पर पहुंचने की समयसीमा के विस्तार का कोई दावा नहीं करेगा। कुमार ने अगस्त 2014 में जारी हुए स्थानांतरण आदेश को दरकिनार करने की मांग के साथ कैट से संपर्क किया था।

स्थानांतरण पर रोक लगाने और उन्हें दिल्ली में ही नौकरी जारी रखने दिए जाने का अनुरोध करते हुए कुमार ने न्यायाधिकरण के समक्ष कहा था कि वह पिछले पांच साल से दिल की बीमारी से पीड़ित हैं और उनकी पत्नी को सर्वाइकल कैंसर का खतरा है। उन्होंने यह भी कहा था कि उनकी बेटी को मार्च 2015 में होने वाली बोर्ड की परीक्षाओं में बैठना है।

अपनी याचिका में कुमार ने आरोप लगाया था कि यह स्थानांतरण दरअसल दुर्भावना के साथ की गई कार्रवाई है क्योंकि उन्होंने आईसीसीआर के एक अधिकारी की सेवानिवृत्ति की तिथि को विस्तार दिए जाने का विरोध किया था। वहीं आईसीसीआर ने न्यायाधिकरण को बताया कि अपने अधिकारियों के स्थानांतरण का अधिकार उसके पास है।