यमुना के न्यूनतम जल प्रवाह का आकलन करने के लिए किया जाएगा व्यापक अध्ययन: अधिकारी

यमुना के न्यूनतम जल प्रवाह का आकलन करने के लिए किया जाएगा व्यापक अध्ययन: अधिकारी

अधिकारियों ने बताया कि एनजीटी की ओर से यमुना के सफाई कार्य की देखरेख के लिए नियुक्त निगरानी समिति के सुझाव पर अध्ययन करने का निर्णय लिया गया है

यमुना के न्यूनतम जल प्रवाह का आकलन करने के लिए किया जाएगा व्यापक अध्ययन: अधिकारी

नई दिल्लीः सरकार यमुना नदी के न्यूनतम जल प्रवाह के आकलन के लिए व्यापक अध्ययन करेगी. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की ओर से यमुना के सफाई कार्य की देखरेख के लिए नियुक्त निगरानी समिति के सुझाव पर अध्ययन करने का निर्णय लिया गया है. निगरानी समिति ने अक्टूबर, 2018 में एक कार्ययोजना पेश की थी जिसमें हथनीकुंड और ओखला के बीच यमुना नदी के न्यूनतम जल प्रवाह का आकलन करने के लिए अध्ययन करने का सुझाव दिया गया था. 

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समिति ने कहा था कि न्यूनतम प्रवाह सुनिश्चित किए बिना नदी का पुनरुद्धार संभव नहीं है क्योंकि ऐसे कई स्थान हैं जहाँ नदी कम से कम नौ माह तक सूखी रहती है.अधिकारियों ने बताया कि निगरानी समिति और विशेषज्ञों के बीच बैठक हुई और इस बात पर चर्चा हुई कि यमुना के निर्बाध प्रवाह के लिए हथनीकुंड में प्रस्तावित 10 क्यूसेक का जल प्रवाह पर्याप्त नहीं है.

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इसके बाद यह निर्णय लिया गया कि जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय यमुना नदी में न्यूनतम जल प्रवाह के आकलन का अध्ययन करेगा.  स्वच्छ गंगा राष्ट्रीय मिशन में कार्यकारी निदेशक डी पी मथूरिया ने एनआईएच निदेशक को एक पत्र लिखकर कहा कि हथनीकुंड से आगरा के बीच यमुना के उचित प्रवाह को बनाए रखने के लिए व्यापक अध्ययन की जरूरत है.

(फाइल फोटो)

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