जींद: किसानों की महासभा में बोले Rakesh Tikait-'भाग्यवानों के टूटते हैं मंच'
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जींद: किसानों की महासभा में बोले Rakesh Tikait-'भाग्यवानों के टूटते हैं मंच'

कृषि कानूनों (Agriculture Laws) के विरोध और किसान आंदोलन (Farmers Protest) के समर्थन में हरियाणा के जींद (Jind) में आयोजित किसान महापंचायत का मंच टूट गया. मंच टूटते ही गुरनाम सिंह चढूनी (Gurnam Singh Charuni ) और राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) नीचे आ गिरे थे.

जींद: किसानों की महासभा में बोले Rakesh Tikait-'भाग्यवानों के टूटते हैं मंच'

जींद: कृषि कानूनों (Farm Laws) के विरोध में किसान आंदोलन (Farmers Protest) जारी है. इस आंदोलन को हरियाणा की खापों ने अपना समर्थन दिया है. इस सिलसिले में हरियाणा के जींद (Jind) में बुधवार को किसान महापंचायत (Kisan Mahapanchayat) का आयोजन किया गया. महापंचायत में करीब 30 हजार किसान पहुंचे. इसी दौरान आंदोलन की अगुवाई करने वाले किसान नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने आंदोलन के और लंबा खिंचने के संकेत दिए हैं. 

अक्टूबर की तैयारी के मायने

किसानों के कार्यक्रम में पहुंचे राकेश टिकैत ने कहा, 'मैं भी किसान हूं. इस आंदोलन के नेता गांव के लोग हैं. हमारे इस आंदोलन के नेता किसान ही हैं. हमारा ऑफिस अब वहीं होगा. आंदोलन में काम करने वाले आदमी भी वही होंगे. हम सभी तो पंचायती राज को मानने वाले लोग हैं. हम वहीं डटे रहेंगे और वहीं से सारा काम काज देखेंगे. अब अक्टूबर की तैयारी करनी है. हम अब तिजोरी में अनाज बंद नहीं होने देंगे. ये अब जमीन को बचाने की लड़ाई है. राकेश टिकैट के इन बयानों के कई मायने निकाले जा रहे हैं. 

केंद्र सरकार को खुली चुनौती

राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने ये भी कहा, 'हम खाप पंचायतों को मानने वाले हैं. न आफिस बदलेंगे, न मंच बदलेंगे.' उन्होंने आगे कहा, 'राजा डरता है तो किले बंदी करता है. सरकार की हिम्मत नहीं जो कीलों से हमें रोक सके. युद्ध में घोड़े नहीं बदलते.' राकेश टिकैत ने किसानों से कहा, 'आपको दिल्ली जाने की जरुरत नहीं, अपना गुस्सा हमें दे दें.' जींद की महापंचायत से राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार को चुनौती देते हुए ये भी कहा है कि हमने अभी सरकार से बिल वापस की बात कही है, अगर गद्दी वापसी की बात कर दी तो सरकार का क्या होगा.  

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महापंचायत में पांच प्रस्ताव पारित  

महापंचायत में खापों ने पांच प्रस्ताव पारित किए. उन प्रस्तावों कहा गया है कि तीन केंद्रीय कृषि कानून रद्द किए जाएं, एमएसपी (MSP) पर कानूनी जामा पहनाया जाए. स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू किया जाए, किसानों का कर्जा माफ किया जाए तथा 26 जनवरी को पकड़े गए किसानों को और उनके जब्त किए गए ट्रैक्टरों, वाहनों को छोड़ा जाए तथा सभी दर्ज मामले वापस किए जाएं. इन पांचों प्रस्तावों को कंडेला खाप के प्रधान टेकराम कंडेला ने पढ़ कर सुनाया और उपस्थित भीड़ को हाथ उठा कर समर्थन किया. कंडेला ने बताया कि इस महापंचायत में 100 से अधिक खापें, तपे, बारह के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं.

टूट गया किसान महापंचायत का मंच 

गौरतलब है कि कृषि कानूनों (Agriculture Laws) के विरोध में किसान आंदोलन (Farmers Protest) को समर्थन में हरियाणा के जींद (Jind) में बुधवार को आयोजित किसान महापंचायत में मंच टूट गया. मंच टूटते ही गुरनाम सिंह चढूनी (Gurnam Singh Charuni ) और राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) नीचे आ गिरे. महापंचायत में उम्मीद से भी अधिक भीड़ भीड़ थी. राकेश टिकैत जब मंच पर बोलने वाले थे तो उससे चंद मिनट पहले ही मंच टूट गया. लेकिन कुछ ही देर बाद टिकैत दोबारा मंच पर आए. उन्होंने कहा कि मंच भाग्यवानों के टूटते हैं.

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