पहली बार अविश्वास प्रस्ताव का सामना करेगी मोदी सरकार, BJP बोली-टेंशन नहीं है

लोकसभा में सोमवार (19 मार्च) को वाईएसआर कांग्रेस और तेलुगुदेशम पार्टी (टीडीपी) नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ अपना अविश्वास प्रस्ताव ला सकती हैं.

पहली बार अविश्वास प्रस्ताव का सामना करेगी मोदी सरकार, BJP बोली-टेंशन नहीं है
मौजूदा वक्त में बीजेपी के पास 273 सांसद हैं, जो बहुमत से एक ज्यादा है.
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नई दिल्ली: लोकसभा में सोमवार (19 मार्च) को वाईएसआर कांग्रेस और तेलुगुदेशम पार्टी (टीडीपी) नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ अपना अविश्वास प्रस्ताव ला सकती हैं. वाईएसआर कांग्रेस के वाईवी सुब्बारेड्डी ने लोकसभा सचिवालय को अविश्वास प्रस्ताव के लिए नोटिस को सोमवार की कार्यवाहियों में सूचीबद्ध करने के लिए लिखा है. वहीं टीडीपी ने भी अविश्वास प्रस्ताव के लिए नोटिस दे रखा है.

पिछले सप्ताह नोटिस नहीं लिए जाने पर संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने दलील दी थी कि सदन में आसन के पास जाकर कई दलों के सदस्यों की नारेबाजी के कारण सदन में व्यवस्था नहीं बन पाने के कारण ऐसा नहीं हो पाया.

अविश्वास प्रस्ताव को लेकर BJP है बेफिक्र
लोकसभा में मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आने से ठीक पहले आंध्र प्रदेश में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के हरि बाबू (K Haribabu) ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि उन्हें जरा भी टेंशन नहीं है. हरि बाबू (K Haribabu) ने कहा, 'बीजेपी के पास लोकसभा में पूर्ण बहुमत है, हम अविश्ववास प्रस्ताव का सामना करने के लिए तैयार हैं. ये सभी पार्टियां मिलकर भी बीजेपी का कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे, हम आसानी से बहुमत साबित कर देंगे.'

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हाल ही में टीडीपी ने बीजेपी से तोड़ा है नाता
विधायी कार्यों पर सरकार के साथ अक्सर सहयोग करने वाली तेलंगाना राष्ट्र समिति और अन्नाद्रमुक कई मुद्दों पर विरोध कर रही है इसलिए इस पर अनिश्चितता ही है कि कल व्यवस्था बन पाएगी . बजट सत्र के अंतिम चरण का पहला दो हफ्ता बीत चुका है हालांकि सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक लाने और बिना चर्चा के ध्वनिमत के जरिए बजट पारित कराने में कामयाब रही. केंद्र की ओर से आंध्रप्रदेश को विशष दर्जा दिए जाने से इनकार के बाद सबसे पहले वाईएसआर कांग्रेस ने पिछले सप्ताह अविश्वास प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया था. मुद्दे पर बीजेपी की लंबे समय से सहयोगी रही तेदेपा ने इसके बाद सरकार से अपना नाता तोड़ने का फैसला किया और खुद ही अविश्वास प्रस्ताव लायी.

दोनों पार्टियां अपने- अपने नोटिसों पर समर्थन जुटाने के लिए विपक्षी दलों को लामबंद कर रही हैं. अविश्वास प्रस्ताव नोटिस के लिए सदन में कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन चाहिए. सरकार ने भरोसा जताया है कि नोटिस स्वीकारकर लिये जाने पर भी लोकसभा में उसकी संख्या बल के कारण प्रस्ताव औंधे मुंह गिर जाएगा. लोकसभा में मौजूदा सदस्यों की संख्या539 है और सत्तारूढ़ बीजेपी के274 सदस्य हैं. यह बहुमत से अधिक है और पार्टी को कई घटक दलों का समर्थन भी है.

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हार के बाद अब BJP के पास बहुमत से केवल 1 सीट ज्‍यादा बची
गोरखपुर और फूलपुर उपचुनावों में हार के बाद लोकसभा में बीजेपी सांसदों की संख्‍या घटकर 273 रह गई है. 2014 आम चुनावों में बीजेपी ने अपने दम पर 282 लोकसभा सीटें जीती थीं. उसके बाद हुए उपचुनावों में कई सीटें हारने के बाद बीजेपी के पास अब 273 सीटें बची हैं. बहुमत का जादुई आंकड़ा हालांकि 272 सीटों का है. ऐसे में अब बीजेपी के पास बहुमत से एक सीटें ज्‍यादा हैं. हालांकि बीजेपी के नेतृत्‍व में एनडीए के पास 300 से भी ज्‍यादा सीटें हैं. इस लिहाज से सरकार पर किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है.

2014 के बाद 6 सीटों पर हार
2014 के बाद से अब तक कुल 19 लोकसभा उपचुनाव हुए हैं. इनमें से बीजेपी का आठ सीटों पर कब्‍जा था. इस दौरान पार्टी केवल वड़ोदरा और शहडोल सीटों को बचाने में कामयाब रही, जबकि बाकी छह सीटों पर उसे हार का सामना करना पड़ा. यानी इन चार वर्षों में गुरदासपुर (पंजाब), रतलाम (मध्‍य प्रदेश), अलवर एवं अजमेर (राजस्‍थान) सीटें बीजेपी के हाथ से निकलकर कांग्रेस के पास चली गईं. अब गोरखपुर और फूलपुर सीटें सपा के खाते में चली गईं. यानी कि इस दौरान हुए उपचुनावों में तीन चौथाई सीटें पार्टी के हाथ से निकल गईं.

वैसे इन चार वर्षों में हुए इन उपचुनावों में से 12 सीटों पर उन्‍हीं दलों का कब्‍जा रहा है, जिन्‍होंने 2014 में जीत हासिल की थी. इस लिहाज से बीजेपी के अलावा केवल सहयोगी पीडीपी को नुकसान उठाना पड़ा है क्‍योंकि श्रीनगर उपचुनावों में यह सीट पीडीपी के हाथ से निकलकर नेशनल कांफ्रेंस के पास चली गई. वहां से फारूक अब्‍दुल्‍ला चुनाव जीत गए. यानी कि 2014 के बाद से जो भी लोकसभा उपचुनाव हुए हैं, उनमें से केवल एनडीए को ही नुकसान उठाना पड़ा है. विपक्षी दल अपनी सीटें बचाने में कामयाब रहे हैं.

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