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2022 तक गंगा में गंदे नालों का गिरना पूरी तरह बंद हो जाएगा : जन शक्ति मंत्री

केन्‍द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्‍द्र सिंह शेखावत ने कहा कि दिसम्‍बर तक गंगा को पूरी तरह से धार्मिक अनुष्‍ठानों के अनुकूल बना दिया जाएगा.

2022 तक गंगा में गंदे नालों का गिरना पूरी तरह बंद हो जाएगा : जन शक्ति मंत्री
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा है कि 2024तक देश के हर घर में पाइप के जरिए साफ पानी पहुंचा दिया जाएगा. (फोटो: PIB)

नई दिल्‍ली: केन्‍द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्‍द्र सिंह शेखावत ने आज कहा है कि 2022 तक गंगा में गंदे नालों का गिरना पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा. सरकार इस लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए मिशन मोड पर काम कर रही है. नई दिल्‍ली में जल समाधान के नए तरीकों पर आयोजित एक राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन एवं प्रदर्शनी को संबोधित करते हुए गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि उत्तराखंड और झारखंड में गंगा में गंदे नालों का गिरना पूरी तरह रोक दिया गया है. उन्‍होंने कहा कि दिसम्‍बर तक गंगा को पूरी तरह से धार्मिक अनुष्‍ठानों के अनुकूल बना दिया जाएगा.

केन्‍द्रीय मंत्री गजेंद्र‍ सिंह शेखावत ने कहा कि देश साफ पीने के पानी की कमी और 25 लीटर पानी नहाने में व्‍यर्थ करने के चलन की दोहरी समस्‍या से एक साथ नहीं निपट सकता. इसके लिए प्रत्‍येक व्‍यक्ति और बड़ी कंपनियों को मिलकर प्रयास करने होगे. उन्‍होंने कहा कि औद्योगिक इकाइयों में पानी के इस्‍तेमाल तथा ऐसी इकाइयों से  निकलने वाले प्रदूषित जल और अन्‍य रसायनों को नदियों में छोड़े जाने के मामलों पर प्रभावी नीति तय करने के बारे में वे उद्योगों के साथ बातचीत करने के लिए तैयार हैं. 

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत में दुनिया की कुल आबादी का 18 प्रतिशत तथा इतनी ही संख्‍या में पशुधन मौजूद होने के बावजूद वैश्विक अनुपात के हिसाब से पानी के मामले में हमारी हिस्‍सेदारी 4 प्रतिशत से भी कम है और उसका भी बड़ा हिस्‍सा प्रदूषित है. उन्‍होंने कहा कि हम सभी को यह आत्‍म निरीक्षण करना चाहिए कि आखिर जल प्रदूषण के मामले में भारत दुनिया में 122वें स्‍थान पर क्‍यों है?

जल शक्ति मंत्री ने 2024 तक हर घर में पाइप के जरिये पीने का साफ पानी पहुंचाने के काम को नदियों को साफ करने जैसा बेहद चुनौतीपूर्ण काम बताते हुए कहा कि इन कार्यों को केवल सरकार की जिम्‍मेदारी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि पूरे समाज को इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपनी रोजमर्रा की आदतों का आकलन कर जिम्मेदार तरीके से काम करना चाहिए.