प्रियंका गांधी के बिहार भाषण में महात्मा गांधी से तुलना पर शिवसेना नेता शाइना एनसी भड़क उठीं. उन्होंने कहा, “गांधी सरनेम होने से कोई महात्मा नहीं बन जाता.” प्रियंका ने मोदी सरकार पर लोकतंत्र दबाने का आरोप लगाया, जबकि एनसी ने कांग्रेस पर झूठ और पाखंड का.
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सोशल मीडिया और सियासत दोनों ही जगहों पर इन दिनों प्रियंका गांधी के बयान को लेकर जबरदस्त बहस छिड़ गई है. दरअसल, प्रियंका गांधी ने बिहार में हुई एक जनसभा में महागठबंधन की राजनीतिक लड़ाई को महात्मा गांधी के आंदोलन से जोड़ा था. इस बयान के बाद शिवसेना नेता शाइना एनसी ने उन पर जोरदार हमला बोला. उन्होंने कहा, “आपका सरनेम गांधी जरूर है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आप महात्मा गांधी के सिद्धांतों का पालन कर रही हैं. महात्मा गांधी ने हमेशा अहिंसा और शांति की बात की, जबकि आप उन्हीं लोगों के साथ हैं जिन्हें जनता लुटेरा मानती है.”
शाइना एनसी ने प्रियंका गांधी पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि बिहार की जनता अब सब जानती है और अगर विकास के लिए वोट देना है तो एनडीए ही एकमात्र विकल्प है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस और महागठबंधन को जनता के अधिकारों की चिंता कम और सत्ता की भूख ज्यादा है. शाइना ने यह भी कहा कि महात्मा गांधी ने सत्य, त्याग और पारदर्शिता का संदेश दिया था, जबकि प्रियंका गांधी की पार्टी उन्हीं आदर्शों से सबसे ज्यादा दूर है.
प्रियंका गांधी ने मोदी सरकार पर साधा निशाना
बिहार के कटिहार जिले के कदवा में आयोजित जनसभा में प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर तीखा हमला किया. उन्होंने कहा कि आज की लड़ाई सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है. उन्होंने इसे महात्मा गांधी के स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा और कहा, “आज भी हम एक ऐसे साम्राज्य के खिलाफ लड़ रहे हैं जो लोगों को दबाने का काम कर रहा है.” प्रियंका ने बीजेपी पर लोकतंत्र और संविधान को कमजोर करने का भी आरोप लगाया.
बिहार चुनाव में तेज होती सियासी जंग
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान शांतिपूर्वक पूरा हो चुका है, जिसमें 65.08 प्रतिशत वोटिंग हुई. अब दूसरे चरण में 122 सीटों पर 11 नवंबर को वोट डाले जाएंगे, जबकि नतीजे 14 नवंबर को घोषित होंगे. इस बीच प्रियंका गांधी और शाइना एनसी के बीच की जुबानी जंग ने चुनावी माहौल को और गर्मा दिया है. एक तरफ प्रियंका गांधी ‘जनाधिकारों की लड़ाई’ का नारा दे रही हैं, तो दूसरी ओर एनडीए नेताओं का कहना है कि जनता अब भावनाओं से नहीं, विकास से वोट करेगी.