धर्म के नाम पर 2047 में एक बार फिर होगा देश का विभाजन : गिरिराज सिंह

गिरिराज सिंह ने कहा कि देश में विभाजनकारी ताक़तों का जनसंख्या विस्फोट भयावह है. इससे देश के हालात खराब ही होंगे.

धर्म के नाम पर 2047 में एक बार फिर होगा देश का विभाजन : गिरिराज सिंह
केंद्रीय मंत्री ने देश की बढ़ती जनसंख्या पर तीखा कटाक्ष किया है

नई दिल्ली : केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने एक बार फिर विवादित बयान देकर राजनीतिक गलियारे में तूफान खड़ा कर दिया है. देश में बढ़ती जनसंख्या को लेकर दिए बयान पर नई बहस छिड़ गई है. गिरिराज सिंह ने कहा है कि 2047 में देश में एक बार फिर विभाजन होगा. उन्होंने कहा कि अभी तो 35A की बहस पर हंगामा हो रहा है, आने वाले वक़्त में तो एक भारत का ज़िक्र करना असंभव होगा. कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने उनके इस बयान की निंदा की है.

केंद्रीय मंत्री ने अपने एक ट्वीट संदेश में देश की बढ़ती जनसंख्या पर तीखा कटाक्ष किया है. उन्होंने लिखा, '1947 में धर्म के आधार पर ही देश का विभाजन हुआ वैसी ही परिस्थिति पुनः 2047 तक होगी. 72 साल में जनसंख्या 33 करोड़ से बढ़कर 135.7 करोड़ हो गई है. विभाजनकारी ताक़तों का जनसंख्या विस्फोट भयावह है. अभी तो 35A की बहस पर हंगामा हो रहा है. आने वाले वक़्त में तो एक भारत का ज़िक्र करना असंभव होगा.'

गिरिराज सिंह के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारे में नई बहस छिड़ गई है. कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने बीजेपी के मंत्री की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि बीजेपी और उसके मंत्री देश में धर्म और जातिवादी के नाम पर जहर घोलने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि बीजेपी ने कहा कि गिरिराज सिंह के बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है. बीजेपी के कहना है कि भारत अखंड देश है और उसके टुकड़े कभी नहीं हो सकते. 

ना सामाजिक समरसता बचेगी, ना ही विकास होगा
ट्वीट के अलावा अमरोह में एक कार्यक्रम में गिरिराज सिंह ने कहा कि 1947 में देश की आबादी 33 करोड़ थी, जोकि आज 125 करोड़ हो गई है. उन्होंने कहा कि 125 करोड़ तो घोषित आबादी है, अघोषित आबादी 136-141 करोड़ होगी. उन्होंने कहा कि आज देश में 54 जिलों में हिंदुओं की आबादी गिर गई है. अगर जनसंख्या नियंत्रण कानून नहीं बना तो ना सामाजिक समरसता बचेगी और ना ही देश का विकास होगा.  

अनुच्छेद 35-ए का जिक्र
गिरिराज सिंह ने अपने ट्वीट में अनुच्छेद 35 ए का जिक्र भी किया है. अनुच्छेद 35 ए के तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ है. इसके तहत राज्य को यह दर्जा मिला हुआ है कि वह किसे अपना स्थाई निवासी माने या और किसे नहीं. जम्मू-कश्मीर में उन लोगों को स्थाई निवासी माना जाता है जो 14 मई, 1954 से पहले कश्मीर में आकर बसे थे. यहां स्थाई निवासियों को ही जमीन खरीदने, सरकारी सेवाओं का लाभ उठाने और रोजगार पाने का अधिकार मिला हुआ है. दूसरे राज्य का निवासी ना तो राज्य में जमीन खरीद सकता है और ना ही यहां सरकारी नौकरी हासिल कर सकता है. इतना ही नहीं राज्य की अगर कोई लड़की किसी अन्य राज्य के लड़के से शादी कर लेती है तो उसके सभी अधिकार खत्म हो जाते हैं.